Editorial – Parmarth TV https://parmarthtv.com Parmarth Bhakti Tue, 25 Feb 2025 22:05:34 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://parmarthtv.com/wp-content/uploads/2022/08/cropped-IMG-20220719-WA0005-32x32.jpg Editorial – Parmarth TV https://parmarthtv.com 32 32 भारत आकर क्यों घिरे? – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%98%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%87-naya-india-hindi-news-latest-hindi-news-breakin/ https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%98%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%87-naya-india-hindi-news-latest-hindi-news-breakin/#respond Tue, 25 Feb 2025 22:05:34 +0000 https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%98%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%87-naya-india-hindi-news-latest-hindi-news-breakin/

इल्जाम है कि पिछले हफ्ते हुई भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री दहल ने नेपाल को पूरी तरह भारत पर निर्भर बना दिया। जबकि इस यात्रा के दौरान नेपाल को ज्यादा कुछ हासिल नहीं हुआ।

नेपाल के विपक्षी दलों के साथ-साथ बुद्धिजीवियों और मीडिया का एक बड़ा हिस्सा भी प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल को घेरने में जुट गया है। उनका इल्जाम है कि पिछले हफ्ते हुई भारत यात्रा के दौरान दहल ने नेपाल को पूरी तरह ‘भारत पर निर्भर’ बना दिया। इस यात्रा के दौरान नेपाल को ज्यादा कुछ हासिल नहीं हुआ। कहा गया है कि दहल सीमा विवाद, विमान रूट, पंचेश्वर परियोजना के बारे में नेपाल की मांगों पर भारत को राजी नहीं कर पाए। जबकि उनकी यात्रा के दौरान यही तीन प्रमुख मसले थे। इसके बजाय दहल ने दोनों देशों के बीच इलाकों की अदला-बदली की बात की है। नेपाल में इसका यह अर्थ निकाला गया है कि नेपाली प्रधानमंत्री ने भारत को यह संकेत दे दिया है कि नेपाल कालापानी इलाके पर से अपना दावा छोड़ने को तैयार है। दहल की भारत यात्रा शुरू होने से ठीक पहले नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने नेपाल के विवादित नागरिकता विधेयक पर दस्तखत कर दिया था। विपक्ष का आरोप है कि ऐसा भारत सरकार को खुश करने के लिए किया गया। इसके अलावा कभी अपने को धर्म निरपेक्ष राजनीति का चेहरा बताने वाले दहल ने मध्य प्रदेश में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर का दौरा किया।

इसे भी भारत की मौजूदा सरकार को खुश करने की कोशिश बताया गया है। आलोचकों ने कहा है कि भारत में दहल का स्वागत संदेह के साथ किया गया। वहां उन्हें एक कमजोर गठबंधन के नेता के तौर पर देखा गया है। साथ ही उनकी ‘चाइना मैन’ की छवि के कारण भी भारत सरकार ने ज्यादा उत्साह नहीं दिखाया। नेपाल में परंपरा रही है कि वहां प्रधानमंत्री बनने के बाद कोई नेता अपनी पहली विदेश यात्रा पर भारत जाता है। आलोचकों ने कहा है कि दहल ने यह रस्म-अदायगी की, लेकिन वे अपने देश के लिए कुछ हासिल नहीं कर पाए। इस सिलसिले में दहल की जल्द ही संभावित चीन यात्रा की चर्चा शुरू हो गई है। क्या चीन में दहल कुछ ज्यादा हासिल कर पाएंगे? या वहां उनकी अब उनकी भारत समर्थक की बनी छवि आड़े आ जाएगी- यह सवाल उठाया जा रहा है।



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भागलपुर का पुल – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b2-naya-india-hindi-news-latest-hindi-news-breaking-news-hindi-samachar/ https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b2-naya-india-hindi-news-latest-hindi-news-breaking-news-hindi-samachar/#respond Tue, 25 Feb 2025 10:05:06 +0000 https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b2-naya-india-hindi-news-latest-hindi-news-breaking-news-hindi-samachar/

जब हादसा होता है, तो कुछ दिन तक मीडिया में उसकी चर्चा रहती है और लोग भी उस पर बातें करते हैं। हर ऐसी बड़ी घटना पर जांच का एलान किया जाता है। फिर धीरे-धीरे सब कुछ ‘सामान्य’ हो जाता है।

बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर बन रहे पुल के गिरने का वीडियो दुनिया भर में चर्चित हुआ है। चूंकि ऐसे विजुअल कम ही मिलते हैं, इसलिए मेनस्ट्रीम से लेकर सोशल मीडिया तक पर लोगों ने इसे खूब देखा। और चूंकि यह घटना ओडिशा के बालासोर में हुई भीषण ट्रेन दुर्घटना से बने माहौल के बीच हुई, तो इसे भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर की असल हालत की कहानी के हिस्से के रूप में सहज ही पेश किया गया। चूंकि उसी जगह पर बन रहा पुल दूसरी बार गिरा है, तो उससे इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण में जुड़े भ्रष्टाचार का नैरेटिव भी लोगों के गले उतर गया। गौरतलब यह है कि भारत के लिए ना तो ट्रेनों का पटरी से उतरना कोई असामान्य घटना है, ना निर्माणाधीन या बन चुके पुलों का गिरना। अभी कुछ महीने ही हुए हैं, जब गुजरात के मोरवी में पुल गिरने की जानलेवा घटना हुई थी। ऐसी घटनाओं के एक साथ एक सामान्य बात यह भी है कि जब हादसा होता है, तो कुछ दिन तक मीडिया में उसकी चर्चा रहती है और लोग भी उस पर बातें करते हैं।

हर ऐसी बड़ी घटना पर जांच का एलान किया जाता है। फिर धीरे-धीरे सब कुछ ‘सामान्य’  हो जाता है और किसी को इस बात की फिक्र नहीं रहती कि उस जांच का क्या हुआ? क्या दुर्घटना के लिए किसी की जवाबदेही तय हुई और जिन्हें जवाबदेह पाया गया, उन्हें क्या दंड मिला। वैसे भी बात सिर्फ प्रत्यक्ष जवाबदेही की नहीं है। जवाबदेही तो उन सबकी बननी चाहिए, जो उन निर्माण संबंधी निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा रहे हों। लेकिन यह अपने देश में बहुत बड़ी बात है। बहरहाल, चूंकि कभी जवाबदेही तय नहीं होती, तो हर हादसे के बाद निर्णय और निर्माण की प्रक्रियाएं यथावत चलती रहती हैँ। और इस तरह अगले हादसे की जमीन तैयार होती रहती है। भारत के विकास की राह में यह बाधा दशकों से रही है, जो बदस्तूर जारी है। यहां यह जरूर याद रखना चाहिए कि जहां बालासोर में सैकड़ों जिंदगियां तबाह हुई हैं, वहीं भागलपुर में 1800 करोड़ रुपए की बलि चढ़ गई है। ऐसे नुकसान को क्या कोई जिम्मेदार देश बर्दाश्त कर सकता है?



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एआई से चिंतित दुनिया! – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%8f%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-naya-india-hindi-news-latest-hindi-news/ https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%8f%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-naya-india-hindi-news-latest-hindi-news/#respond Mon, 24 Feb 2025 22:04:21 +0000 https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%8f%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-naya-india-hindi-news-latest-hindi-news/

घूम-फिर कर सवाल यही आएगा कि क्या ऐसे कानूनों से वह चिंता दूर होगी, जिसके लिए ये सारी कवायद की जा रही है? अक्सर किसी नई तकनीक और उसके प्रभाव को रोकने में कानून अक्षम साबित होते हैं।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने अपनी अमेरिका यात्रा की इसे एक बड़ी कामयाबी बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने उनकी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) संबंधी योजना को स्वीकार कर लिया। पिछले हफ्ते जब ह्वाइट हाउस में दोनों नेता मिले, तो सुनक ने बाइडेन के सामने प्रस्ताव रखा कि ब्रिटेन एआई के विनियम का केंद्र बनना चाहता है। बाइडेन इस पर सहमत हो गए। जब दो विश्व नेता किसी ऐसे एजेंडे पर सहमत हो, तो यह समझा जा सकता है कि संबंधित मुद्दा दुनिया में किस तरह चिंता का विषय हुआ है। दरअसल, ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया के कई देशों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर सख्त और कड़े कानून बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इन कानूनों के तहत दिखने में असली लेकिन फर्जी सामग्री बनाने वाली तकनीकों पर प्रतिबंध लगाना भी संभव है। मगर घूम-फिर कर सवाल यही आएगा कि क्या ऐसे कानूनों से वह चिंता दूर होगी, जिसके लिए ये सारी कवायद की जा रही है? अक्सर किसी नई तकनीक और उसके प्रभाव को रोकने में कानून अक्षम साबित होते हैं।

बहरहाल, यह सच है कि इस समय दुनिया भर में एआई को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। तकनीक की दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोग- मसलन ट्विटर के मालिक इलॉन मस्क और गूगल के सीईओ तक एआई को लेकर चेतावनी दे चुके हैं। ऐसे में उचित ही है कि सरकारें भी इस बात पर विचार करें कि कैसे एआई के दुष्प्रभावों से लोगों को बचाया जाए। पिछले हफ्ते ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय साइंस और तकनीक परिषद ने एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें कहा गया कि एआई से तैयार सामग्री कई तरह से नुकसानदायक हो सकती है। मसलन, अगर किसी देश की संसदीय समिति किसी विषय पर जनता से राय मांगती हैं, तो तो एआई के जरिये जनता की फर्जी राय दर्ज कराई जा सकती है, जिससे यह संकेत जाएगा कि कि जनता की राय एक खास पक्ष में है। फिर कॉपीराइट, प्राइवेसी और उपभोक्ता सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बनाए गए कानून एआई के नए दौर में नाकाफी हो गए हैं। इसलिए अगर सरकारें नया कानूनी ढांचा बनाना चाहती हैं, यह पहल सही दिशा में मानी जाएगी।



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मायूसी एक भ्रम है! – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%b9%e0%a5%88-naya-india-hindi-news-latest-hindi-news-breaking-news-hindi-sama/ https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%b9%e0%a5%88-naya-india-hindi-news-latest-hindi-news-breaking-news-hindi-sama/#respond Mon, 24 Feb 2025 09:58:45 +0000 https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%b9%e0%a5%88-naya-india-hindi-news-latest-hindi-news-breaking-news-hindi-sama/

हमेशा ऐसा ही रहेगा, जब दुनिया विकास के पथ पर नए मुकाम हासिल करेगी, लेकिन लोग यही कहते सुने जाएंगे कि चीजें पहले बहुत अच्छी थीं। एक ताजा अध्ययन से भी इसी बात की पुष्टि हुई है। लोग मान रहे हैं कि नैतिकता का पतन हो रहा है।

तकरीबन तीन दशक पहले निराशावाद पर एक किताब आई थी। उसमें कहा गया था कि दुनिया में हमेशा ऐसा रहेगा, जब दुनिया विकास के पथ पर नए मुकाम हासिल करेगी, लेकिन लोग यही कहते सुने जाएंगे कि चीजें पहले बहुत अच्छी थीं। एक ताजा अध्ययन से सामने आए निष्कर्ष ने उस किताब की याद ताजा कर दी है। आज अधिकांश लोग यही मान कर चल रहे हैं कि मनुष्य में दया, दूसरे के लिए सम्मान का भाव, और ईमानदारी जैसे गुण खत्म होते जा रहे हैँ। बहरहाल, मनोवैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि ऐसी राय सिर्फ एक स्वभावगत भ्रम है। नए अध्ययन की रिपोर्ट मशहूर पत्रिका नेचर के ताजा अंक में प्रकाशित हुई है। अध्ययन 60 देशों में हुए एक सर्वेक्षण पर आधारित है। इस सर्वे के दौरान ज्यादातर लोगों ने यही राय जताई कि बीते छह-सात दशकों में नैतिकता में भारी गिरावट आई है। यह अध्ययन अमेरिका के कोलंबिया बिजनेस स्कूल में अनुसंधानकर्ता एडम मैस्त्रियानी के नेतृत्व में हुआ।

इस दौरान लोगों से एक सवाल यह पूरा गया कि उनकी राय में 2020, 2010 और साल 2000 में कौन सा ऐसा वक्त था, जब स्थितियां बेहतर थीं। दौरान आम राय उभरी की अब दया की भावना और नैतिकता में गिरावट आई है। ऐसी राय हाई स्कूल में पढ़ रहे छात्रों से लेकर उनके माता-पिता की पीढी तक ने जताई। लिबरल से लेकर कंजरवेटिव दोनों तरह के व्यक्तियों को इस मामले में एकमत पाया गया। मगर खुद इसी अध्ययन से जुड़े विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि दशकों पहले हुए सर्वेक्षणों में भी लोगों ने ऐसी ही राय जताई थी। इसका अर्थ यह हुआ कि नैतिक पतन की बात एक भ्रम है। दरअसल, ऐसे कई संभव कारण हो सकते हैं, जिनकी वजह ऐसा भ्रम पैदा होता है। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक इनसान का स्वभाव ऐसा है, जिसमें वह नकारात्मक सूचनाओं पर अधिक ध्यान देता है। इसके अलावा देखा गया है कि मनुष्य की बुरी यादें अच्छी यादों की तुलना जल्दी भूल जाती हैं। ऐसे में अक्सर यह महसूस होता है कि पहले स्थितियां बेहतर थीं। यानी मनुष्य का यही स्वाभाव ऐसे भ्रम का कारण बनता है।



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सवाल सुरक्षित यात्रा का – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%b8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-naya-india-hin/ https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%b8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-naya-india-hin/#respond Fri, 21 Feb 2025 09:22:33 +0000 https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%b8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-naya-india-hin/

इस बीच कई ट्रेन दुर्घटनाएं ऐसी हुई हैं, जिनके लिए चरमराते बुनियादी ढांचे को जिम्मेदार ठहराया गया है। जाहिर है, इन हादसों के कारण ट्रेनों के रखरखाव और ट्रैक के नवीनीकरण पर खर्च किए जा रहे पैसे पर सवाल उठे हैं।

ओडिशा के बालासोर में हुई ट्रेन दुर्घटना ने फिर भारत में रेलवे सुरक्षा के मुद्दे पर ध्यान खींचा है। यह हादसा ऐसे समय में हुआ, जब भारत सरकार रेल यात्रा को कथित रूप से तेज और सुखद बनाने की कोशिश कर रही है। पिछले कुछ सालों से भारत सरकार ने रेल नेटवर्क में से एक में हाई-स्पीड- ऑटोमेटेड ट्रेनों को शुरू करके रेल आधुनिकीकरण को आगे बढ़ाने का दावा किया है। सरकार के घोषित लक्ष्यों में 2024 तक रेलवे का 100 फीसदी विद्युतीकरण करना और 2030 तक नेटवर्क को कार्बन न्यूट्रल बनाना शामिल है। लेकिन इसी बीच कई ट्रेन दुर्घटनाएं ऐसी हुई हैं, जिनके लिए चरमराते बुनियादी ढांचे को जिम्मेदार ठहराया गया है। जाहिर है, इन हादसों के कारण ट्रेनों के रखरखाव और ट्रैक के नवीनीकरण पर खर्च किए जा रहे पैसे पर सवाल उठे हैं। भारतीय रेलवे को 13-14 लाख कर्मचारियों के साथ देश की जीवन रेखा माना जाता है। भारतीय ट्रेनों में प्रतिदिन लगभग सवा दो करोड़ लोग सफर करते हैं और रेलवे 30 लाख टन माल की ढुलाई करती है। लगभग 68,000 किलोमीटर के ब्रॉड-गेज नेटवर्क पर 21,000 से अधिक ट्रेनें दौड़ती हैं। मगर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) के एक आकलन के मुताबिक, 2017-18 से 2020-21 के बीच खराब ट्रैक रखरखाव, ओवरस्पीडिंग और मैकेनिकल फेलियर ट्रेनों के पटरी से उतरने के प्रमुख कारण रहे।

दिसंबर 2022 में संसद में पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया कि इन दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण रेलवे पटरियों पर रखरखाव की कमी है। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रैक नवीनीकरण के लिए फंड में कमी आई है और कई मामलों में इसका पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। रेलवे ने ट्रेनों की टक्कर को रोकने के लिए एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रॉटेक्शन सिस्टम ‘कवच’ पर 2012 में काम शुरू किया था। इसका पहला परीक्षण 2016 में किया गया था। 2022 में इसका लाइव डेमो दिखाया गया और इसे लॉन्च किया गया। लेकिन रेल नेटवर्क में अभी यह सिर्फ दो प्रतिशत हिस्से में कार्यरत है। तो साफ है कि हादसों का कारण ढांचागत कमजोरियां और भटकी प्राथमिकताएं हैं। जब तक ये मौजूद हैं, रेल यात्रा सुरक्षित नहीं हो सकेगी।

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आंदोलन मैनेज हो गया? – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%9c-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%97%e0%a4%af%e0%a4%be-naya-india-hindi-news-latest-hindi-news-breakin/ https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%9c-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%97%e0%a4%af%e0%a4%be-naya-india-hindi-news-latest-hindi-news-breakin/#respond Thu, 20 Feb 2025 21:21:02 +0000 https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%9c-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%97%e0%a4%af%e0%a4%be-naya-india-hindi-news-latest-hindi-news-breakin/

इस बात को नहीं भुलाया जा सकता कि आरोपी को तुरंत गिरफ्तार ना कर पुलिस ने डर और आशंकाओं का वह माहौल बनने दिया, जिससे उत्पीड़ित पहलवानों का हौसला टूटा। इस रूप में न्याय की भावना के साथ एक तरह का विश्वासघात हुआ है।

यौन उत्पीड़न के खिलाफ आंदोलन पर उतरे पहलवान सार्वजनिक रूप से भले यह कह रहे हों कि उनका संघर्ष जारी रहेगा, लेकिन जिस रूप में लगभग डेढ़ महीने तक यह आंदोलन चला, उसके आगे भी जारी रहने की संभावना न्यूनतम है। इस बात के साफ संकेत हैं कि गृह मंत्री अमित शाह इस आंदोलन को मैनेज करने में सफल हो गए हैँ। पहलवानों के साथ उनकी सहमति बन जाने के ठोस संकेत हैँ। बेशक, (कथित तौर पर) उत्पीड़ित महिला पहलवान हुई थीं, इसलिए पहलवानों को यह अधिकार है कि वे अपना हित देखें और किसी समाधान पर पहुंचने के प्रयास में शामिल हों। लेकिन गौरतलब यह है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है। उसमें एक नाबालिग पहलवान के यौन उत्पीड़न का मामला भी है, जो पॉक्सो कानून के तहत आता है। इसी एफआईआर को वापस लिए जाने या इसे बदले जाने की बात मीडिया में आई है। बहरहाल, विधि विशेषज्ञों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय न्याय व्यवस्था के तहत जघन्य अपराध एक बार दर्ज हो जाने के बाद उत्पीड़ित व्यक्ति भी उसे वापस नहीं ले सकता, लेकिन यह राज्य के खिलाफ अपराध का मामला बन जाता है।

ये दीगर बात है कि अगर उत्पीड़ित पक्ष मामले को आगे बढ़ाने में सहयोग ना करे, तो फिर केस साबित होने की संभावनाएं बेहद कम हो जाती हैं। इस बीच नौ जून को आंदोलन का प्रस्तावित कार्यक्रम स्थगित हो चुका है, तो दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने आरोपी बृजभूषण शरण सिंह से उनके घर जाकर पूछताछ की है। कुल संकेत यह है कि अब जो भी मामला चलेगा, वह पुलिस और कानून की दायरे में चलेगा। इस तरह जन आंदोलन से सत्ताधारी भाजपा के लिए जो असहज स्थितियां बन रही थीं, उन्हें नियंत्रित कर लिया गया है। इसके बावजूद इस बात को नहीं भुलाया जा सकता कि आरोपी को तुरंत गिरफ्तार ना कर पुलिस ने डर और आशंकाओं का वह माहौल बनने दिया, जिससे उत्पीड़ित पहलवानों का हौसला टूटा। इस रूप में न्याय की भावना के साथ एक तरह का विश्वासघात हुआ है। यह इस देश के लिए गहरी चिंता की बात है।

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उत्तराखंड में खतरनाक संकेत – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95/ https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95/#respond Thu, 20 Feb 2025 09:17:47 +0000 https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95/

सवाल पोस्टर लगाने वाले व्यक्तियों की पहचान और उन पर ऐसी कार्रवाई का है, जिससे समाज में इस तरह के विभेद पैदा करने वाले तत्वों को सख्त संदेश जा सके। अपराध कोई व्यक्ति करता है। इसके लिए किसी पूरे समुदाय को निशाना बनाना तार्किक नहीं है।

खबरों के मुताबिक उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के पुरोला में नाबालिग लड़की को अगवा करने के प्रयास के बाद तनाव का माहौल बना हुआ है। एक संगठन की तरफ से ऐसे पोस्टर लगाए हैं, जिनमें अल्पसंख्यकों से अपनी दुकानों को खाली करने को कहा गया है। खबर है कि ये पोस्टर पुरोला में लगाए गए हैं, जहां के मुख्य बाजार में करीब 700  दुकानें हैं, जिनमें 40 दुकानें मुसलमानों की हैं। उत्तरकाशी जिले में स्थित इस कस्बे में ‘देवभूमि रक्षा अभियान’ नाम के संगठन की तरफ से भड़काऊ पोस्टर चिपकाए गए हैं। जाहिर है, पोस्टर लगाए जाने के बाद से अल्पसंख्यक समुदाय में डर पैदा हुआ है और वहां के व्यापारियों ने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। पुलिस को बेशक इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। चूंकि यह खबर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हो चुकी है, इस बारे में राज्य सरकार को भी अवश्य सूचना मिली होगी।

बेहतर यह होता कि राज्य सरकार इस मामले में फुर्ती दिखाती, आशंकित समुदाय को आश्वस्त करती और पोस्टर लगाने वाले संगठन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की शुरूआत कर दी जाती। लेकिन आज के राजनीतिक माहौल में ऐसी साधारण अपेक्षाएं भी कई बार बेमतलब लगने लगती हैँ। अब तक मिली खबरों के मुताबिक पुलिस ने स्थानीय व्यापार मंडल और स्थानीय लोगों के साथ भी बैठक की है और उनसे कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। साथ ही पोस्टरों को हटा दिया गया है। यह स्वागतयोग्य बात है। यहां यह गौरतलब है कि अपराध कोई व्यक्ति करता है। इसके लिए किसी पूरे समुदाय को निशाना बनाना ना तो तार्किक है और ना ही इसकी किसी सभ्य समाज इजाजत होनी चाहिए। मौजूदा घटना बीते दिनों हुई एक आपराधिक घटना से जुड़ी बताई गई है। बीते 26  मई को दो लोगों ने इस इलाके से एक नाबालिग को अगवा करने की कोशिश की थी। स्थानीय लोगों ने लड़की को अगवा से होने बचा लिया और पुलिस ने दोनों युवकों को गिरफ्तार भी कर लिया था। अब पुलिस का फर्ज है कि दूसरे अपराध के मामले में भी वह इतनी ही चुस्ती दिखाए।

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मणिपुर में कोई हल नहीं? – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%ae%e0%a4%a3%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%b9%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-naya-india-hindi-news-latest/ https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%ae%e0%a4%a3%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%b9%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-naya-india-hindi-news-latest/#respond Wed, 19 Feb 2025 21:14:34 +0000 https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%ae%e0%a4%a3%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%b9%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-naya-india-hindi-news-latest/

हिंसा पर काबू नहीं पाया जा सका है। राज्य में ऐसा माहौल बन गया है कि हर व्यक्ति सामने वाले को संदेह की निगाहों से देखने लगा है। ऐसे में समाधान सिर्फ संवाद से ही निकल सकता है। मगर उसके लिए निष्पक्ष माध्यम की जरूरत है।

मणिपुर में हिंसा और अविश्वास के माहौल का कोई समाधान निकलता नहीं दिख रहा है। बल्कि अगर मैतयी और कुकी समुदायों के बीच अविश्वास की बात करें, तो हालत बिगड़ती जा रही है। राज्य की हालत से परिचित जानकारों ने कहा है कि सबसे बड़ी समस्या संवाद के सभी माध्यमों का टूट जाना है। ऐसे हालात में अक्सर सरकारें बातचीत का माहौल बनाती हैं। लेकिन जब सरकार को ही एक पक्ष माना जाने लगे, तो फिर समाधान निकलना बहुत टेढ़ी खीर बन जाता है। मणिपुर में ऐसा ही हुआ लगता है। इस बीच बड़े पैमाने पर हिंसा, आगजनी और विस्थापन के बीच प्रदेशवासियों और दूसरे प्रदेशों से आए कामगारों और कारोबारियों की हालत खराब होती जा है। एक ओर जहां उन्हें सुरक्षा की चिंता है, वहीं कामकाज भी ठंडा है। और बाहर से आए कामगारों के लिए फिलहाल राज्य से बाहर जाना भी आसान नहीं है। मई की शुरुआत से मैतेयी और कुकी-नागा समुदाय के बीच जारी हिंसा में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। सैकड़ों लोग घायल हुए हैं और हजारों मकान और अन्य इमारतों को जला दिया गया है।

हिंसा से डरे बहुत से लोगों ने घर से पलायन कर राज्य के राहत शिविरों या पड़ोसी मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और सुदूर दिल्ली तक शरण ली है। अनुमान के मुताबिक राज्य में दूसरे राज्यों से आए प्रवासियों की तादाद करीब पांच हजार है। इनमें बंगाली और मारवाड़ी के अलावा बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग और म्यांमार से दशकों पहले लौटे तमिल समुदाय के लोग भी शामिल हैं। राज्य में उन्हें बाहरी कहा जाता है। ये लोग पहले से भेदभाव का शिकार रहे हैँ। मौजूदा हालत में उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैँ। इस बीच गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से हालत सुधरने की उम्मीद निराधार साबित हो चुकी है। हिंसा पर काबू नहीं पाया जा सका है, जबकि राज्य में ऐसा माहौल बन गया है कि हर व्यक्ति सामने वाले को संदेह की निगाहों से देखने लगा है। ऐसे में समाधान सिर्फ संवाद से ही निकल सकता है। जबकि उसके लिए निष्पक्ष माध्यम की जरूरत है।

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पाकिस्तान में खतरनाक खेल – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%96%e0%a5%87%e0%a4%b2-naya/ https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%96%e0%a5%87%e0%a4%b2-naya/#respond Tue, 18 Feb 2025 09:09:38 +0000 https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%96%e0%a5%87%e0%a4%b2-naya/

पाकिस्तान की सेना संभवतः यह भूल गई है कि जब वहां किसी लोकप्रिय नेता को राजनीति से हटाने की जब कोशिशें हुईं, तो उसके कैसे नतीजे सामने आए। ऐसे कदमों से असंतोष बढ़ा और स्थायी समस्याएं पैदा हुईं। एक बार तो देश का बंटवारा ही हो गया।

अब यह साफ है कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सियासी रूप से नष्ट करने में वहां का ‘ऐस्टैबलिशमेंट’ (सेना+खुफिया नेतृत्व) फिलहाल सफल हो गया है। इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) में अब गिने-चुने नेता ही बचे हैँ। बाकी नेता ऐस्टैबलिशमेंट का दबाव नहीं झेल पाए, जैसा करना पाकिस्तान में कभी आसान नहीं रहा है। जुल्फिकार अली भुट्टो ने 1970 के दशक में ऐसा करने की कोशिश की थी, तो उसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी थी। अब इमरान खान पर भी एक वकील की हत्या के मामले में मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। कई हलकों में इसे भुट्टो कांड की पुनरावृत्ति के रूप में देखा गया है। बहरहाल, इमरान खान के मामले में पाकिस्तान की सेना उस हद तक जाएगी या नहीं, यह अभी साफ नहीं है। यह स्पष्ट है कि पीटीआई की सियासी हत्या का काम काफी आगे बढ़ चुका है। पिछले दिनों पार्टी से निकले नेता जहांगीर खान तरीन ने अपनी नई पार्टी बना लीहै। इसका नाम इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान (आईपीपी) रखा गया है।

आम राय है कि में यह पार्टी ऐस्टैबलिशमेंट की शह पर और उसके निर्देशन में बनाई गई है। इसका मकसद इमरान खान को राजनीति से अलग-थलग करना और पाकिस्तान में ऐस्टैबलिशमेंट की मन-माफिक विपक्षी पार्टी का गठन है। आईपीपी में कई ऐसे नेता शामिल हुए हैं, जिन्होंने पिछले एक महीने के दौरान पीटीआई छोड़ी है। यह खेल इतने खुले रूप में खेला जा रहा है कि वहां के कुछ साहसी टीकाकार इसे सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं। उन्होंने यह बताया है कि इमरान खान को यह संदेश दिया गया कि वे या तो खुद को राजनीति से अलग कर लें या अपनी आंखों के सामने अपनी पार्टी नष्ट होती देखें। ऐसा करते हुए ऐस्टैबलिशमेंट यह भूल गया कि पाकिस्तान में लोकप्रिय नेता को राजनीति से हटाने की जब कोशिशें हुईं, तो उसके कैसे नतीजे सामने आए। ऐसे कदमों से असंतोष बढ़ा और स्थायी समस्याएं पैदा हुईं। शेख मुजीबुर रहमान के साथ पहले ऐसी कोशिश हुई थी और फिर भुट्टो के साथ। अब इमरान खान अगले ऐसे नेता बने हैं।

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हवाई बातों से क्या होगा? – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%b9%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be-naya-india-hindi-news/ https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%b9%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be-naya-india-hindi-news/#respond Mon, 17 Feb 2025 21:05:55 +0000 https://parmarthtv.com/editorial/%e0%a4%b9%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be-naya-india-hindi-news/

भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कुछ ऊंचे दावे किए हैं और साथ ही यूनिवर्सल बेसिक इनकम (यूबीआई) की भारत में जरूरत को सिरे से नकार दिया है।

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