इंटरनेट डेस्क। देश के शीर्ष न्यायालय ने आज सीनियर सिटीजन्स की संपत्ति को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय ने आज इस संबंध में कहा कि सीनियर सिटीजन्स अपने बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं। न्यायालय ने बोल दिया कि बढ़ती उम्र का मतलब असुरक्षा या अपमान नहीं होना चाहिए।
हर व्यक्ति को जीवनभर गरिमा के साथ जीने का अधिकार है। ये देश के सीनियर सिटीजन्स के लिए अच्छी खबर है। खबर ये है कि उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को भी पलट दिया, जिसमें बेटे और बहू को मकान से बेदखल करने के ट्रिब्यूनल कोर्ट के आदेश को रद्द किया गया था।
न्यायालय ने कहा कि बुजुर्गों की गरिमा के लिए ट्रिब्यूनल के पास बच्चों को संपत्ति से निकालने का आदेश देने का अधिकार है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने फैसला सुनाया है। बेंच ने बोल दिया कि कानून का मकसद बुजुर्गों की गरिमा और सुरक्षा तय करना है। न्यायालय ने लखनऊ के विकास नगर निवासी रवि कांत गुप्ता की अपील पर सुनवाई की है।
PC:britannica
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