जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर उपयोग की गई भाषा पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। इस पर उन्होंने अत्यंत दुख और निराशा प्रकट की है। गहलोत ने इस संबंध में आज सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया दी है। पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने एक्स के माध्यम से कहा कि आज यह देखकर अत्यंत दुख और निराशा होती है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रति जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया जा रहा है और जिस तरह के कटाक्ष किए जा रहे हैं, वे न केवल दुर्भाग्यपूर्ण हैं, बल्कि भाजपा नेतृत्व और स्वयं प्रधानमंत्री की राजनीतिक मानसिकता को भी दर्शाते हैं।
लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष की भूमिकाएँ अलग-अलग अवश्य होती हैं, लेकिन दोनों का सम्मान समान रूप से आवश्यक है। प्रधानमंत्री जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाती है कि वे नेता प्रतिपक्ष द्वारा उठाए गए जनहित के मुद्दों का तथ्यात्मक और गंभीरता से जवाब दें, न कि व्यक्तिगत टिप्पणियों और कटाक्षों के माध्यम से उनकी उपेक्षा करें। आज देश की जनता के बीच राहुल गांधी एक नेक, निर्भीक, काबिल, कर्मठ और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध नेता के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुके हैं। भाजपा द्वारा लगातार किए जा रहे राजनीतिक हमलों और दुष्प्रचार के बावजूद उनका आत्मविश्वास, संघर्ष और जनता के प्रति समर्पण निरंतर मजबूत हुआ है।
गहलोत ने कहा कि मेरा मानना है कि अब राहुल गांधी को पीछे मुड़कर देखने की आवश्यकता नहीं है। वे महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों पर चलते हुए देश के संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। सत्ता के कथित अहंकार और तानाशाही प्रवृत्तियों के विरुद्ध उनका संघर्ष केवल किसी राजनीतिक दल का संघर्ष नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और देश के भविष्य की रक्षा का संघर्ष है।
व्यक्तिगत कटाक्षों से न तो जनहित के मुद्दे समाप्त होते हैं और न ही जनता की आवाज को दबाया जा सकता है
पूर्व सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र में विपक्ष का सम्मान करना कमजोरी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक परिपक्वता और राजनीतिक शालीनता की पहचान है। व्यक्तिगत कटाक्षों से न तो जनहित के मुद्दे समाप्त होते हैं और न ही जनता की आवाज को दबाया जा सकता है। लोकतंत्र की असली ताकत सत्ता के अहंकार में नहीं, बल्कि असहमति के सम्मान, संवाद की मर्यादा और जनता के विश्वास में निहित है।
PC: ndtv
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