धर्म डेस्क। सनातन धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, पंचामृत और बेलपत्र अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर विधि-विधान से बेलपत्र चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
बेल पत्र चढ़ाते समय गलतियां
हालांकि, कई लोग बेलपत्र चढ़ाते समय एक सामान्य गलती कर बैठते हैं। उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि बेलपत्र का कौन-सा हिस्सा शिवलिंग की ओर होना चाहिए।
शास्त्रों के मुताबिक, बेलपत्र चढ़ाते समय उसका चिकना भाग शिवलिंग की तरफ यानी नीचे होना चाहिए, जबकि खुरदरा हिस्सा ऊपर की ओर रहता है। मान्यता है कि उल्टा बेलपत्र चढ़ाना पूजा की दृष्टि से सही नहीं माना जाता।
बेलपत्र अर्पित करते समय कुछ अन्य बातों का ध्यान रखना भी जरूरी बताया गया है। पूजा में हमेशा तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ही इस्तेमाल करना चाहिए। इसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना जाता है।
इन बातों का रखना चाहिए ध्यान
इसके अलावा बेलपत्र कहीं से टूटा, फटा या सूखा नहीं होना चाहिए। खंडित या अशुद्ध बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित नहीं किया जाता।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बेलपत्र के चिकने हिस्से पर पीला चंदन लगाकर चढ़ाना शुभ माना गया है। साथ ही बेलपत्र अर्पित करने से पहले शिवलिंग का जल या पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए।
क्या है बेलपत्र चढ़ाने की सही विधि
बेलपत्र चढ़ाने की सही विधि के अनुसार उसका डंठल अपनी ओर और पत्तियों वाला भाग शिवलिंग की तरफ रखना चाहिए। डंठल के सिरे पर मौजूद छोटी गांठ को तोड़कर ही बेलपत्र अर्पित करना शुभ माना गया है। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’, महामृत्युंजय मंत्र और बिल्वपत्र मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी माना गया है।







