ओडिशा के जगन्नाथ धाम पुरी में मिलने वाली निर्माल्य की पोटली को धार्मिक दृष्टि से बेहद शुभ माना जाता है।
Publish Date: Sun, 12 Jul 2026 03:41:43 PM (IST)Updated Date: Sun, 12 Jul 2026 03:41:43 PM (IST)
HighLights
- स्कंद पुराण में मिलता उल्लेख
- पूजा कक्ष में रखें सम्मानपूर्वक
- धार्मिक अनुष्ठान से पहले ग्रहण करें
धर्म डेस्क, नईदुनिया। ओडिशा के पवित्र जगन्नाथ धाम पुरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन के साथ उनके महाप्रसाद का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु अक्सर दर्शन के बाद एक छोटी पोटली अपने साथ लेकर जाते हैं। इस पोटली को निर्माल्य कहा जाता है। इसमें भगवान जगन्नाथ को अर्पित किए गए सूखे चावल के दाने होते हैं, जिन्हें महाप्रसाद का स्वरूप माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह सामान्य चावल नहीं बल्कि भगवान को अर्पित प्रसाद होता है। स्कंद पुराण में भी निर्माल्य की महिमा का विस्तृत उल्लेख मिलता है।
निर्माल्य प्रसाद से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं
मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक प्रतिदिन निर्माल्य के चावल का सेवन करता है, उसकी रक्षा स्वयं भगवान जगन्नाथ करते हैं। यह भी माना जाता है कि जिस घर में निर्माल्य की पोटली रखी होती है, वहां धन-धान्य की कमी नहीं होती।
धार्मिक विश्वासों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के अंतिम समय में निर्माल्य का एक चावल का दाना भी उसके मुख में रखा जाए, तो उसे मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी कारण जगन्नाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को निर्माल्य प्रसाद साथ लाने की सलाह दी जाती है।
ऐसे तैयार किया जाता है निर्माल्य
मंदिर की परंपरा के अनुसार, भगवान को अर्पित पके हुए प्रसाद को मंदिर परिसर में तेज धूप में सुखाया जाता है, ताकि वह लंबे समय तक सुरक्षित रह सके। पूरी तरह सूखने के बाद इन चावल के दानों को लाल या गुलाबी रंग की छोटी-छोटी पोटलियों में बांधकर श्रद्धालुओं को दिया जाता है।
घर में निर्माल्य रखने के नियम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्माल्य की पोटली को घर में साफ-सुथरे और पवित्र स्थान, विशेष रूप से पूजा कक्ष में रखना चाहिए। पूजा के समय इसे धूप-दीप दिखाना शुभ माना जाता है।
यदि किसी कारणवश निर्माल्य में रखा चावल खराब होने लगे, तो उसे बहते जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। इसके अलावा उसे तुलसी के पौधे के पास रखना भी एक उचित विकल्प माना गया है।
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