भारत के कुछ अनूठे मंदिरों में फल-फूल के बजाय कागज पर लिखी अर्जियां और कंकड़-पत्थर चढ़ाकर न्याय और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की जाती है।
By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Sun, 02 Aug 2026 10:34:11 AM (IST)Updated Date: Sun, 02 Aug 2026 10:34:11 AM (IST)
HighLights
- उत्तराखंड के अल्मोड़ा में चितई गोलू देवता मंदिर में स्टाम्प पेपर चढ़ाते हैं
- बिलासपुर के मां बगदाई वनदेवी मंदिर में 5 गोटा पत्थर चढ़ाया जाता है
- देश के कई धार्मिक स्थानों में पत्थरों से छोटा घर बनाने की परंपरा है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत में देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए आमतौर पर फल, फूल, मिठाई या सोना-चांदी चढ़ाने की प्रथा है। लेकिन देश के कुछ ऐसे मंदिर भी हैं, जहां की मान्यताएं आम परंपराओं से बिल्कुल अलग हैं। इन धामों में भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए पत्थर और अपनी आपबीती (कहानी) लिखकर अर्पित करते हैं।
जब अदालत से पहले ‘न्याय के देवता’ के पास पहुंचती है लिखित कहानी
उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित चितई गोलू देवता मंदिर में आस्था का एक अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान को फूल-प्रसाद की जगह कागजों पर अपनी ‘कहानी और आपबीती’ लिखकर अर्पित करते हैं।
यदि किसी व्यक्ति को न्याय नहीं मिल रहा हो या वह किसी बड़ी विपदा में फंसा हो, तो वह स्टाम्प पेपर या साधारण कागज़ पर अपनी पूरी समस्या लिखकर भगवान के चरणों में टांग देता है। जब भक्तों की फरियाद पूरी हो जाती है, तो वे आभार व्यक्त करने के लिए मंदिर परिसर में पीतल की घंटी बांधते हैं।
बिलासपुर के खमतराई में 5 पत्थरों से पूरी होती है मन्नत
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले का मां बगदाई वनदेवी मंदिर (खमतराई) पत्थर चढ़ाने की अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां श्रद्धालु खेतों से मिलने वाले 5 गोटा पत्थर (कंकड़) लेकर देवी के सामने अर्पित करते हैं और अपनी मनोकामना मांगते हैं।
लगभग 100 साल पुरानी इस मान्यता के तहत प्राचीन काल में जब लोग घने जंगलों से गुजरते थे, तो सुरक्षित यात्रा के लिए यहां 5 पत्थर रखकर आगे बढ़ते थे। आज भी मन्नत पूरी होने पर लोग दोबारा आकर यहां 5 पत्थर चढ़ाते हैं।
पत्थर जोड़कर बनाए जाते हैं ‘सपनों के महल’
देश के कुछ अन्य हिस्सों में पत्थरों के चढ़ावे का रूप और भी अनोखा है-
- आंध्र प्रदेश-कर्नाटक सीमा पर स्थित ‘बंगारू तिरुपति’: यहां भक्त मंदिर परिसर के एक खास कुंड में कंकड़-पत्थर अर्पित करके अपनी मन्नत मांगते हैं।
- हिमाचल और छत्तीसगढ़ के देव स्थान: हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों और छत्तीसगढ़ के रतनपुर (बिलासपुर) स्थित मां महामाया मंदिर परिसर के आसपास, भक्त जमीन पर पत्थरों को एक के ऊपर एक रखकर छोटा सा ‘पत्थर का घर’ बनाते हैं। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से मां की कृपा से उनका खुद का पक्का मकान बनाने का सपना जल्द सच होता है।







