डिजिटल डेस्क, भोपाल। श्रावण मास के पावन धार्मिक आयोजनों के बीच मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सामाजिक और आध्यात्मिक बदलाव की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आ रही है। भोपाल में अब महिलाएं केवल पूजा-पाठ में शामिल होने वाली श्रद्धालु तक सीमित नहीं हैं। बल्कि वे वैदिक विधि-विधान से रुद्राभिषेक, यज्ञ-हवन, विवाह और विविध संस्कार संपन्न कराने वाली पुरोहित की मुख्य भूमिका निभा रही हैं।
गायत्री शक्तिपीठ और माधव आश्रम जैसी संस्थाओं के माध्यम से महिलाओं को धार्मिक कर्मकांड और मंत्रोच्चार की ट्रेनिंग दी जा रही है।
महिला पुरोहितों की नई पहल
गायत्री शक्ति पीठ (भोपाल) के रमेश नागर के अनुसार, वर्तमान में भोपाल में 150 से अधिक प्रशिक्षित महिला पुरोहित विभिन्न धार्मिक आयोजनों और शुभ कार्यों में कर्मकांड संपन्न करा रही हैं। आश्रम में 300 से अधिक महिलाएं ‘अग्निहोत्र हवन’ की विधि, सही मंत्रोच्चार और वैदिक प्रक्रियाओं की ट्रेनिंग ले रही है।
वहीं, पुरोहित की भूमिका निभा रहीं मधु श्रीवास्तव और राजश्री चौरसिया बताती हैं कि वे सनातन परंपरा के 16 मुख्य संस्कारों में से 15 संस्कार, विवाह समारोह और रुद्राभिषेक जैसे अनुष्ठान पूरी प्रामाणिकता के साथ करा रही हैं।
पहले पूजा कराने में संकोच करते थे लोग
महिला पुरोहितों का कहना है कि शुरुआत में जब वे कर्मकांड कराने पहुंचती थीं, तो परिवारों में थोड़ा संकोच और झिझक देखने को मिलती थी। लेकिन जब उन्होंने शुद्ध मंत्रोच्चार और पूरी धार्मिक विधि के साथ अनुष्ठान संपन्न कराए, तो लोगों का भरोसा बढ़ता चला गया।
सुषमा बालदेया और सुनीता श्रीवास्तव का मानना है कि यदि धार्मिक विधियों, वेदों और मंत्रों का निष्ठापूर्वक अध्ययन किया जाए, तो महिलाएं भी इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकती हैं।
वहीं, अंजना परिहार बताती हैं कि परिवारों का संकोच अब पूरी तरह खत्म हो चुका है और लोग अब खुद खुशी-खुशी महिला पुरोहितों को धार्मिक आयोजनों के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।
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