आषाढ़ शुक्ल द्वितीया पर गुरुवार को राजा महाकाल की नगरी उज्जैन भगवान जगन्नाथ के जयघोष से गुंजायमान हो उठी। शहर में दो स्थानों से निकली भगवान जगन्नाथ की…और पढ़ें
Publish Date: Fri, 17 Jul 2026 01:06:11 PM (IST)Updated Date: Fri, 17 Jul 2026 01:06:11 PM (IST)
HighLights
- इस्कान की रथयात्रा में 35 फीट ऊंचे नंदी घोष रथ पर विराजे भगवान
- शहर में दो स्थानों से निकली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्राओं में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला
- मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर भगवान का स्वागत किया और प्रसादी का वितरण किया
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : आषाढ़ शुक्ल द्वितीया पर गुरुवार को राजा महाकाल की नगरी उज्जैन भगवान जगन्नाथ के जयघोष से गुंजायमान हो उठी। शहर में दो स्थानों से निकली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्राओं में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।
एक ओर 118 साल पुरानी खाती समाज की पारंपरिक रथयात्रा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रभु का रथ खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया, वहीं दूसरी ओर इस्कॉन की भव्य रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा 35 फीट ऊंचे नंदीघोष रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकले।
रथयात्रा अपने पारंपरिक वैभव के साथ शहर के प्रमुख मार्गों से निकली
कार्तिक चौक स्थित जगदीश मंदिर से दोपहर 3 बजे शुरू हुई खाती समाज की रथयात्रा अपने पारंपरिक वैभव के साथ शहर के प्रमुख मार्गों से निकली। यात्रा में धर्मध्वजाएं, भजन मंडल, अखाड़ों के हैरतअंगेज प्रदर्शन करते युवा, बैंड की मधुर धुन पर नृत्य करते समाजजन और विभिन्न मंचों से स्वागत के लिए की जा रही पुष्पवर्षा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर भगवान का स्वागत किया और प्रसादी का वितरण किया।
विशेष पोशाक पहने भगवान ने मोह लिया मन
इधर दोपहर 1:30 बजे इंदिरा नगर चौराहा से शुरू हुई इस्कॉन मंदिर की रथयात्रा का प्रमुख आकर्षण 35 फीट ऊंचा भव्य नंदी घोष रथ रहा। भगवान जगन्नाथ को लगभग ढाई लाख रुपये मूल्य की विशेष अलंकारिक पोशाक पहनाई गई, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
विदेशी भक्तों की सहभागिता ने भी यात्रा को विशेष आकर्षण प्रदान किया
सुसज्जित रथ पर विराजमान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन के लिए पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। हरे कृष्ण महामंत्र के संकीर्तन, मृदंग और झांझ की मधुर स्वर लहरियों के बीच आगे बढ़ती रथयात्रा में श्रद्धालु नृत्य करते हुए शामिल हुए। विदेशी भक्तों की सहभागिता ने भी यात्रा को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
पुरी की तरह अहिल्या की नगरी इंदौर में भी हर ओर गूंजा व्यंकट रमणा गोविंदा का जयघोष







