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शिव का सबसे रौद्र ‘शरभ’ अवतार, आखिर क्यों आमने-सामने आ गए थे महादेव और श्रीहरि?

शिव का सबसे रौद्र ‘शरभ’ अवतार, आखिर क्यों आमने-सामने आ गए थे महादेव और श्रीहरि?

धर्म डेस्क। सनातन धर्म में भगवान शिव और भगवान विष्णु को एक-दूसरे का परम भक्त माना जाता है, लेकिन पौराणिक कथाओं में एक ऐसा प्रसंग भी मिलता है जब सृष्टि की रक्षा के लिए दोनों दिव्य शक्तियों को आमने-सामने आना पड़ा। शिव पुराण में वर्णित यह कथा भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार और भगवान शिव के शरभ अवतार से जुड़ी हुई है।

क्या है मान्यता

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दैत्यराज हिरण्यकश्यप के अत्याचारों का अंत करने के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया था। आधे मनुष्य और आधे सिंह के रूप में प्रकट होकर उन्होंने हिरण्यकश्यप का वध किया, लेकिन इसके बाद भी उनका क्रोध शांत नहीं हुआ।

भगवान शिव से गुहार

भगवान नरसिंह के उग्र रूप और बढ़ते क्रोध को देखकर देवता भयभीत हो गए। उन्हें डर सताने लगा कि यदि यह क्रोध शांत नहीं हुआ तो पूरी सृष्टि संकट में पड़ सकती है। तब सभी देवता भगवान शिव की शरण में पहुंचे और उनसे रक्षा की प्रार्थना की।

कथा के अनुसार, सबसे पहले भगवान शिव ने अपने अंशावतार वीरभद्र को नरसिंह भगवान को शांत करने के लिए भेजा। वीरभद्र ने उनसे शांत होने का आग्रह किया, लेकिन नरसिंह देव क्रोध में इतने डूबे थे कि उन्होंने किसी की बात नहीं मानी।

इसके बाद महादेव ने स्वयं एक अत्यंत शक्तिशाली और विचित्र रूप धारण किया। उन्होंने शरभ अवतार लिया, जिसे आधा सिंह, आधा पक्षी और आठ पैरों वाला दिव्य रूप बताया गया है। इस रूप के विशाल पंख और नुकीले पंजे बेहद भयावह थे।

दोनों में हुआ था भयानक युद्ध

शिव पुराण के मुताबिक, जब शरभ अवतार और नरसिंह भगवान आमने-सामने आए तो दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। कहा जाता है कि शरभ देव ने अपनी शक्ति से नरसिंह भगवान को अपने पंजों में जकड़ लिया और आकाश में ले गए।

इस दौरान भगवान नरसिंह को महादेव की असीम शक्ति का अनुभव हुआ और धीरे-धीरे उनका क्रोध शांत होने लगा। उन्हें यह बोध हुआ कि यह सब सृष्टि की रक्षा के लिए हो रहा है। अंत में नरसिंह भगवान ने महादेव को प्रणाम किया और शांत होकर बैकुंठ लौट गए।

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