देवों के देव महादेव की आराधना का सबसे पवित्र महीना सावन (श्रावण मास) इस बार शिवभक्तों के लिए कई मायनों में बेहद खास और दुर्लभ महासंयोग लेकर आ रहा है। …और पढ़ें
Publish Date: Tue, 28 Jul 2026 11:17:46 AM (IST)Updated Date: Tue, 28 Jul 2026 11:17:46 AM (IST)
HighLights
- इस बार 30 दिन का होगा श्रावण मास, 30 जुलाई से शुरुआत, व्रत के लिए मिलेंगे 4 सोमवार
- पवित्र महीना सावन इस बार कई मायनों में बेहद खास और दुर्लभ महासंयोग लेकर आ रहा है
- मालवा-निमाड़ सहित उत्तर भारत में सावन का महीना 30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर । देवों के देव महादेव की आराधना का सबसे पवित्र महीना सावन (श्रावण मास) इस बार शिवभक्तों के लिए कई मायनों में बेहद खास और दुर्लभ महासंयोग लेकर आ रहा है। मालवा-निमाड़ सहित उत्तर भारत में इस साल सावन का महीना 30 जुलाई (गुरुवार) से शुरू होगा, जो 28 अगस्त (शुक्रवार) यानी रक्षाबंधन के दिन तक रहेगा।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस साल सावन पूरे 30 दिन का होगा, जिसमें भक्तों को व्रत और पूजा-अर्चना के लिए 4 सोमवार मिलेंगे। इस पूरे माह शिव योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष प्रभाव रहेगा।
33 साल का गणित: क्यों खास है इस बार का संयोग?
इस बार सावन का तीसरा सोमवार (17 अगस्त) सबसे खास रहेगा, क्योंकि इसी दिन नागपंचमी का पर्व भी मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 4 सोमवार वाले सावन मास में नागपंचमी का सोमवार के दिन आना दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग है। पिछले तीन दशक (33 वर्षों) के पंचांग को देखें तो सामान्य 4 सोमवार वाले सावन में ऐसा महासंयोग पांचवीं बार बन रहा है। इससे पहले वर्ष 1996, 1999, 2012 और 2019 में ऐसा संयोग बन चुका है।
2023 का सावन था अपवाद
साल 2023 में भी नागपंचमी सोमवार को आई थी, लेकिन वह सावन सामान्य नहीं था। अधिकमास (मलमास) के कारण 2023 में सावन का महीना पूरे 59 दिनों का था और उसमें 8 सोमवार पड़े थे। तब नागपंचमी सातवें सोमवार को आई थी।
सावन के चारों सोमवार की तिथियां
- पहला सोमवार: 3 अगस्त
- दूसरा सोमवार: 10 अगस्त
- तीसरा सोमवार: 17 अगस्त (नागपंचमी का महासंयोग)
- चौथा सोमवार: 24 अगस्त
कालसर्प दोष निवारण का ‘संजीवनी महायोग’
सोमवार भगवान शिव को समर्पित है और नाग देवता उनके गले का आभूषण हैं। नागपंचमी और तीसरे सोमवार के इस त्रि-संयोग (सोमवार + नागपंचमी + सर्वार्थ सिद्धि योग) को शास्त्रों में अक्षय और संजीवनी महायोग माना गया है। जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष, मांगलिक दोष या राहु-केतु की अशुभ दशा है, वे इस दिन शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा और नाग देवता को दूध अर्पित करें। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
शिवालयों में हलचल तेज, कावड़ यात्राओं की भी तैयारी
महाकाल की नगरी उज्जैन से निकटता के कारण इंदौर में सावन मास का उल्लास अलग ही नजर आता है। शहर के प्राचीन देवगुराड़िया शिव मंदिर, परदेशीपुरा के गेंदेश्वर द्वादश ज्योतिर्लिंग, खजराना और मनकामेश्वर शिव मंदिर सहित प्रमुख शिवालयों में अमरनाथ गुफा की तर्ज पर झांकियां और विशेष श्रृंगार की रूपरेखा तैयार की जा रही है। कावड़ यात्राओं को लेकर भी समितियां तैयारियों में जुट गई हैं।
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