17 अगस्त को सूर्यदेव अपनी स्वराशि सिंह और मघा नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं, जहां पहले से मौजूद केतु के साथ ‘सूर्य-केतु युति’ का निर्माण हो रहा है। इ…और पढ़ें
By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Wed, 19 Aug 2026 03:38:43 PM (IST)Updated Date: Wed, 19 Aug 2026 03:38:43 PM (IST)
HighLights
- 17 अगस्त को सूर्यदेव ने अपनी राशि सिंह और मघा नक्षत्र में प्रवेश किया है
- 5 राशियों, मिथुन, कर्क, सिंह, वृश्चिक और कुंभ को सावधान रहने की सलाह
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में सूर्यदेव को आत्मा, आत्मविश्वास, पिता और मान-सम्मान का कारक माना जाता है, जबकि केतु एक छाया ग्रह हैं जिन्हें अलगाव, भ्रम और मानसिक तनाव से जोड़कर देखा जाता है। 17 अगस्त को सूर्यदेव अपनी स्वराशि सिंह में प्रवेश कर चुके हैं। वहीं, केतु के स्वामित्व वाले मघा नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं। सिंह राशि में केतु पहले से विराजमान हैं। ऐसे में सिंह राशि और मघा नक्षत्र में दोनों ग्रहों का मिलना ‘सूर्य-केतु युति’ का निर्माण कर रहा है। इस स्थिति के प्रभाव से 5 राशियों को अपने करियर, स्वास्थ्य और आर्थिक फैसलों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
इन 5 राशियों पर पड़ेगा प्रभाव
- मिथुन राशि (तीसरा भाव)- बनते काम में अड़चनें और मेहनत का फल मिलने में देरी हो सकती है। भाई-बहनों से विवाद से बचें और कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों से बहस के बजाय काम पर ध्यान दें।
- कर्क राशि (दूसरा भाव – धन व वाणी)- अनचाहे खर्चे बढ़ सकते हैं। वाणी की कटुता से रिश्तों में खटास आ सकती है। उधारी या जोखिम भरे निवेश से पूरी तरह बचें।
- सिंह राशि (प्रथम भाव – लग्न)- स्वभाव में गुस्सा, चिड़चिड़ापन या भ्रम की स्थिति आ सकती है। अहंकार से बचें और जल्दबाजी में कोई बड़ा वित्तीय या करियर संबंधी फैसला न लें।
- वृश्चिक राशि (दसवां भाव – करियर)- कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तालमेल बिगड़ सकता है। नौकरी बदलने या नया काम शुरू करने में जल्दबाजी न करें तथा वाहन सावधानी से चलाएं।
- कुंभ राशि (सातवां भाव – वैवाहिक जीवन)- जीवनसाथी के साथ गलतफहमियां या मतभेद हो सकते हैं। बिजनेस पार्टनरशिप में किसी भी दस्तावेज पर बिना पढ़े हस्ताक्षर न करें।
अशुभ प्रभाव कम करने के ज्योतिषीय उपाय
- सूर्य देव को अर्घ्य: प्रतिदिन सुबह तांबे के लोटे से जल अर्पित करें और “ॐ सूर्याय नमः” का जाप करें।
- हनुमान आराधना: मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करने से केतु का नकारात्मक प्रभाव शांत होता है।
- दान-पुण्य: रविवार को गुड़, तांबा या लाल वस्त्र का दान करें तथा जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
यह भी पढ़ें- टाइगर को भगवान मानते हैं MP के आदिवासी, जंगल में जाने से पहले होती है अनोखे मूर्ती की पूजा, जानें क्या है बाघदेव का सच






