धर्म डेस्क, नईदुनिया। आज के दौर में स्मार्टफोन केवल संवाद का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारी दिनचर्या का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह आंख खुलते ही सबसे पहले हाथ में फोन आता है और रात को सोने से पहले भी आखिरी नजर स्क्रीन पर ही पड़ती है।
दिनभर काम, पढ़ाई, सोशल मीडिया और लगातार आने वाले नोटिफिकेशन के बीच हम अनगिनत बार अपने फोन की स्क्रीन देखते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या फोन का वॉलपेपर सिर्फ सजावट के लिए होता है या फिर इसका हमारी मानसिक स्थिति और ऊर्जा पर भी प्रभाव पड़ता है?
वास्तु विशेषज्ञ जय मदान के अनुसार, हम जो चीजें बार-बार देखते हैं, उनका असर सीधे हमारे विचारों और भावनाओं पर पड़ता है। यही वजह है कि फोन का वॉलपेपर भी हमारे मूड, सोच और मानसिक ऊर्जा को प्रभावित कर सकता है।
बार-बार दिखने वाली तस्वीरें डालती हैं मानसिक प्रभाव
मनोविज्ञान के अनुसार, इंसान का दिमाग उन चीजों को तेजी से ग्रहण करता है जिन्हें वह लगातार देखता है। फोन का वॉलपेपर भी हमारे मानसिक स्पेस का हिस्सा बन जाता है, क्योंकि दिन में सैकड़ों बार हमारी नजर उस पर पड़ती है। अगर स्क्रीन पर शांत, सुंदर और सकारात्मक तस्वीरें हों तो वे मन को सुकून देती हैं। वहीं गहरे रंग, अस्त-व्यस्त या नकारात्मक चित्र कई बार अनजाने में बेचैनी और चिड़चिड़ापन बढ़ा सकते हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ सकारात्मक और प्रेरणादायक तस्वीरों को वॉलपेपर बनाने की सलाह देते हैं।
प्रकृति से जुड़ी तस्वीरें देती हैं सुकून
हरियाली, पहाड़, नीला आसमान, बहता पानी या उगते सूरज जैसी तस्वीरें सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती हैं। व्यस्त जीवनशैली और तनाव के बीच ऐसी तस्वीरें आंखों और दिमाग दोनों को राहत पहुंचाती हैं।
कई लोग अपने फोन पर प्रेरणादायक विचार या लक्ष्य से जुड़ी तस्वीरें लगाते हैं। इससे हर बार फोन देखने पर उन्हें अपने उद्देश्य की याद आती है और वे अधिक फोकस्ड महसूस करते हैं। यह आदत व्यक्ति को मानसिक रूप से प्रेरित रखने में मदद करती है।
फैमिली फोटो बढ़ाती है भावनात्मक जुड़ाव
फोन वॉलपेपर पर परिवार की तस्वीरें लगाने का चलन भी काफी बढ़ा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, परिवार या खुशहाल पलों की तस्वीरें भावनात्मक सुरक्षा का एहसास कराती हैं। तनाव या अकेलेपन के समय किसी अपने की मुस्कुराती तस्वीर मन को राहत देती है और सकारात्मक भावनाएं पैदा करती है।
ऐसी तस्वीरें यह एहसास कराती हैं कि व्यक्ति अकेला नहीं है और उसके साथ उसका परिवार खड़ा है। यही कारण है कि फैमिली फोटो कई लोगों के लिए मानसिक ताकत का स्रोत बन जाती है।
पूजनीय तस्वीर लगाने पर क्यों होती है बहस?
कई लोग अपने फोन पर देवी-देवताओं या पूजनीय व्यक्तियों की तस्वीर लगाते हैं। उनके लिए यह श्रद्धा और आस्था का विषय होता है। उन्हें लगता है कि दिनभर भगवान की तस्वीर साथ रहने से सकारात्मक ऊर्जा और सुरक्षा का एहसास बना रहता है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि फोन एक गैजेट है, जिसे हर परिस्थिति में इस्तेमाल किया जाता है। कई बार लोग बिना हाथ धोए फोन इस्तेमाल करते हैं या इसे कहीं भी रख देते हैं। ऐसे में पूजनीय तस्वीर लगाने को लेकर अलग-अलग विचार सामने आते हैं। जय मदान के अनुसार, यह पूरी तरह व्यक्ति की सोच और व्यवहार पर निर्भर करता है कि वह उस तस्वीर की गरिमा किस तरह बनाए रखता है।
मूलांक के अनुसार चुनें शुभ वॉलपेपर
वास्तु विशेषज्ञ जय मदान ने मूलांक के आधार पर वॉलपेपर चुनने की सलाह भी दी है। मूलांक जन्मतिथि के अंकों को जोड़कर निकाला गया एकल अंक होता है। जैसे 1, 10, 19 या 28 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक 1 माना जाता है।
- मूलांक 1 : उगते सूर्य की तस्वीर
- मूलांक 2 : जल या चंद्रमा से जुड़े चित्र
- मूलांक 3 : पीले रंग और गुरु से संबंधित तस्वीर
- मूलांक 4 : सकारात्मक कथन वाले वॉलपेपर
- मूलांक 5 : उगते पौधे की तस्वीर
- मूलांक 6 : गुलाबी फूल या चमकीली वस्तुएं
- मूलांक 7 : गुरु, लक्ष्य या फैमिली फोटो
- मूलांक 8 : नीले फूल, क्रिस्टल या कार्य से जुड़ी तस्वीर
- मूलांक 9 : लाल फूल, क्रिस्टल या पहाड़ की तस्वीर
सोच बदलने का माध्यम बन सकता है वॉलपेपर
विशेषज्ञों का मानना है कि कोई भी वॉलपेपर रातों-रात किस्मत नहीं बदल सकता, लेकिन यह आपकी सोच और मानसिकता पर असर जरूर डाल सकता है। सकारात्मक तस्वीरें व्यक्ति को प्रेरित करती हैं और उसके फैसलों को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं। बेहतरीन वॉलपेपर वही माना जाता है, जो व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा दे, आत्मविश्वास बढ़ाए और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहे। आखिरकार, फोन की स्क्रीन पर दिखने वाली तस्वीरें केवल दृश्य नहीं होतीं, बल्कि वे हमारी सोच और भावनाओं का भी हिस्सा बन जाती हैं।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। नईदुनिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। नईदुनिया अंधविश्वास के खिलाफ है।







