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जयपुर में निर्मित, पूरी दुनिया में मशहूरः एमेज़ॉन ग्लोबल सेलिंग पर लैदर विलेज की कहानी | Parmarth TV

जयपुर में निर्मित, पूरी दुनिया में मशहूरः एमेज़ॉन ग्लोबल सेलिंग पर लैदर विलेज की कहानी | Parmarth TV

हाथ से बनी वस्तुओं के पूरे विश्व में विकास की कहानी

जब राहुल गुप्ता ने जयपुर के एक छोटे से गैराज में लैदर विलेज शुरू किया था, तब वो केवल एक और स्टेशनरी ब्रांड का विकास नहीं कर रहे थे। बल्कि वो ऐसे प्रोडक्ट बनाना चाहते थे, जो समय के दायरे से बढ़कर हों तथा व्यक्तिगत और ऑथेंटिक महसूस हों। आज लैदर विलेज एमेज़ॉन ग्लोबल सेलिंग के माध्यम से पूरी दुनिया में हाथों से बनी एग्ज़िक्यूटिव नोटबुक और जर्नल बेचती है। एक छोटी की टीम के साथ शुरू हुआ यह सफर आज एक बड़े व्यवसाय में तब्दील हो गया है, जो हर महीने 30,000 यूनिट्स की शिपिंग करता है, लेकिन इसकी जड़ें जयपुर की कारीगरी की संस्कृति में जमी हुई हैं। लैदर की हस्तनिर्मित कारीगरी के साथ प्रीमियम स्टेशनरी बनाकर इस ब्रांड ने विंटेज फिनिश, रिसाईकल्ड कॉटन पेपर और समझदार डिटेलिंग के साथ अपनी एक अलग पहचान बना ली है। लैदर विलेज के फाउंडर, राहुल गुप्ता ने कहा, ‘‘हम कुछ ऐसा बनाना चाहते थे, जो लोग एक बार इस्तेमाल करके भूल न जाएं, बल्कि सालों तक अपने साथ रखें।’’


जयपुर में क्राफ्ट की संस्कृति से प्रेरित

इस ब्रांड की पहचान को आकार देने में जयपुर की बड़ी भूमिका रही है। यह शहर हाथों से बने क्राफ्ट की अपनी परंपरा के लिए मशहूर है। चाहे लैदरवर्क हो, टैक्सटाईल, हाथों से बने पेपर या कारीगरी, हर हुनर पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ता रहता है। ऐसे वातावरण में पले-बढ़े राहुल को प्रोडक्ट और डिज़ाईन का विचार स्वाभाविक रूप से मिला। इसलिए लैदर विलेज ने सामान्य नोटबुक नहीं बनाईं, बल्कि ऐसे जर्नल बनाए, जो कारीगरी और व्यक्तिगत पहचान को प्रदर्शित करते हैं। ये प्रोडक्ट प्रोफेशनल्स, ट्रैवलर्स, आर्टिस्ट और गिफ्ट देने वाले यूज़र्स के साथ अलग-अलग तरह के ग्राहकों के लिए बनाए गए।

यह ब्रांड बहुउपयोगिता पर ध्यान केंद्रित करता है। इसके जर्नल का उपयोग लिखने, स्केच करने, जर्नल बनाने, आर्ट या उपहार देने के लिए किया जा सकता है। इससे लैदर विलेज को हाथों की कारीगरी को बनाए रखते हुए व्यापक ग्राहक वर्ग तक पहुँचने में मदद मिली। राहुल ने कहा, ‘‘जर्नल की श्रेणी में बहुत ज्यादा प्रतिस्पर्धा है। इसलिए हम बाजार में जो पहले से उपलब्ध है, उसकी कॉपी करना नहीं चाहते थे, बल्कि हम कुछ ओरिजनल बनाना चाहते थे।’’


पहले दिन से ही ग्लोबल विचार रखा

आमतौर से छोटे बिज़नेस पहले स्थानीय स्तर पर बिज़नेस जमाते हैं, उसके बाद वो विश्व में विस्तार करने की सोचते हैं। लेकिन लैदर विलेज ने पहले दिन से ही ग्लोबल मानसिकता रखी। राहुल को विश्वास था कि विंटेज स्टाईल से प्रेरित ब्रांड के जर्नल उत्तर अमेरिका और यूरोप के ग्राहकों को बहुत ज्यादा पसंद आएंगे क्योंकि इन जगहों पर हाथों से बने प्रोडक्ट्स और कारीगरी की मांग लगातार बढ़ रही थी।

उनके बिज़नेस में टर्निंग पॉईंट तब आया, जब लैदर विलेज ने एमेज़ॉन ग्लोबल सेलिंग के माध्यम से सेल करना शुरू किया। पहले बैच में कंपनी ने केवल 50 यूनिट बेचीं, जिसका उन्हें बहुत शानदार रिस्पॉन्स मिला। उनके सारे प्रोडक्ट एक ही दिन में बिक गए। तुरंत मिली सफलता से राहुल को आत्मविश्वास मिला कि उनके बिज़नेस में ग्लोबल विस्तार करने की जबरदस्त क्षमता है। जल्द ही उन्हें मिलने वाले ऑर्डर तेजी से बढ़ने लगे। 50 यूनिट का शिपमेंट बढ़कर 100 यूनिट पर, फिर 200 यूनिट पर और धीरे-धीरे कई सौ यूनिट्स प्रतिदिन तक पहुँच गया।

एमेज़ॉन ग्लोबल सेलिंग ने अंतर्राष्ट्रीय बिज़नेस के साथ आने वाली कई चुनौतियों को बहुत आसान बना दिया। लॉजिस्टिक्स, पेमेंट्स, ग्राहकों का विश्वास और मार्केटप्लेस की पहुँच को एमेज़ॉन ग्लोबल सेलिंग ने संभाल लिया, जिससे कंपनी को प्रोडक्ट के विकास और ब्रांड की वृद्धि पर अपना ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली। राहुल ने कहा, ‘‘हमने जब एक्सपोर्ट शुरू किया था, तब एमेज़ॉन ग्लोबल सेलिंग ने हमें इतनी तेजी से पूरे विश्व के ग्राहकों तक पहुँच प्रदान की, जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की थी। उनकी मदद से हम ऑपरेशन की मुश्किलों की बजाय प्रोडक्ट के विकास पर अपना ध्यान केंद्रित कर पाए।’’


प्रतिस्पर्धी बाजार में विश्वास स्थापित करना

लैदर विलेज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक थी हाथों से बने प्रीमियम प्रोडक्ट ऑनलाईन बेचने के लिए विश्वास स्थापित करना। ऑनलाईन खरीद करने वाले ग्राहक लैदर को छूकर पेपर का टैक्सचर महसूस नहीं कर सकते हैं, न ही इसकी डिटेलिंग का उन्हें अनुमान मिल पाता है। राहुल ने कहा कि इसका सबसे सरल उपाय यह है कि प्रोडक्ट के बारे में ईमानदार रहें और लगातार बेहतर क्वालिटी बनाए रखें। कंपनी ऑनलाईन बिक्री करने से पहले सालों तक जर्नल बना चुकी थी, जिससे उन्हें अपनी कारीगरी पर पूरा विश्वास था। राहुल ने बताया कि अपनी श्रेणी के पहले ट्रू विंटेज लैदर जर्नल्स में से एक लैदर विलेज ने ऑनलाईन पेश किया था।

ब्रांड की लोकप्रियता जैसे-जैसे बढ़ी, खासकर भारत और चीन की कई कंपनियों ने इसी तरह के डिज़ाईन कॉपी करना शुरू कर दिया। इससे बाजार कुछ प्रभावित हुआ, लेकिन राहुल ने इसे दूसरी नजर से देखा। उन्होंने इसे इस बात का प्रमाण माना कि जो कैटेगरी उन्होंने शुरू की थी, वह सफल हो चुकी थी। प्रतियोगी कंपनियों को जवाब देने की बजाय, लैदर विलेज ने अपना ध्यान कारीगरी, इनोवेशन और प्रोडक्ट्स की ईमानदार पेशकश पर केंद्रित किया। इससे ब्रांड को विभिन्न इलाकों में भरोसेमंद ग्राहक मिले। आज उन्हें अपने बिज़नेस का एक बड़ा हिस्सा रिपीट कस्टमर्स से प्राप्त होता है। कई खरीददार केवल प्रोडक्ट की क्वालिटी के लिए नहीं, बल्कि ब्रांड से मिलने वाले संपूर्ण अनुभव के लिए वापस आते हैं।

हस्तनिर्मित परंपरा को बनाए रखते हुए विकास

कंपनी ने पिछले सालों में जबरदस्त विकास किया है। साल 2018 में, लैदर विलेज ने लगभग 40 से 50 यूनिट बेची थीं। आज यह संख्या बढ़कर प्रतिमाह 30,000 यूनिट से अधिक हो चुकी है। उनके बिज़नेस ने साल-दर-साल शानदार वृद्धि दर्ज की है। उनका बिज़नेस कभी 20 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, तो कभी वृद्धि की दर बढ़कर 200 प्रतिशत तक भी पहुँच गई है।

हस्तनिर्मित उत्पादों के बिज़नेस को बढ़ाने की अपनी चुनौतियाँ भी होती हैं। मशीन द्वारा बने प्रोडक्ट्स से अलग, हाथों से बने जर्नल के लिए कुशल कारीगर, प्रशिक्षण और एक सी क्वालिटी बनाए रखना बहुत जरूरी है। राहुल जानते थे कि उनका बिज़नेस विकास तभी कर पाएगा, जब बिज़नेस के साथ-साथ इससे जुड़े कारीगरों का भी विकास होगा। एक गैराज में दो लोगों से शुरू हुआ यह सफर आज 200 से अधिक कारीगरों की एक प्रोडक्शन टीम तक विकसित हो चुका है, जिसमें स्थानीय समुदायों के महिला और पुरुष, दोनों शामिल हैं।

सीनियर कारीगर नए टीम मेंबर्स को प्रशिक्षित करते हैं ताकि पारंपरिक कला पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रहे और क्वालिटी लगातार एक सी बनी रहे। राहुल इसे बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं क्योंकि इससे कंपनी का विकास होता है और कारीगरों को स्थिर रोजगार के अवसर मिलते हैं, जिनमें से कई गाँवों से आए हैं। राहुल ने कहा, ‘‘हमारे लिए विकास का मतलब केवल सेल बढ़ाना नहीं है, बल्कि हम कारीगरी को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाना और आजीविका के अवसरों का निर्माण करना चाहते हैं।’’

भविष्य की तैयारी

विश्व के बाजारों में मजबूत पहुँच के साथ लैदर विलेज भविष्य की योजनाओं पर काम कर रही है। कंपनी का उद्देश्य साल 2030 तक जर्नल कैटेगरी में दुनिया के सबसे बड़े कैटालोग ब्रांड्स में से एक बनना है। कंपनी नोटबुक, स्केचबुक और ऐसे ही अन्य प्रोडक्ट्स में विस्तार करना चाहती है। राहुल का मानना है कि भारतीय ब्रांड्स के पास दुनिया में विस्तार करने के अवसर लोगों की कल्पना से भी बड़े हैं। वो उद्यमियों को सुझाव देते हैं कि उन्हें पहले दिन से ही ग्लोबल सोच रखनी चाहिए और क्वालिटी पर ध्यान केंद्रित करके कुछ ओरिजनल बनाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘भारत में बेहतरीन कारीगरी मौजूद है। लेकिन इस कारीगरी को दुनिया के सामने सही तरीके से पेश करने की जरूरत है।’’

लैदर विलेज ने जयपुर के छोटे से गैरेज से पूरी दुनिया के ग्राहकों तक पहुँचकर साबित कर दिया है कि बेहतरीन प्रोडक्ट, शानदार कारीगरी और एक सही ग्लोबल प्लेटफॉर्म भारतीय कंपनियों को ऐसे ब्रांड बनाने में मदद कर सकते हैं, जो स्थायी प्रभाव रखते हैं।’’

 

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