Support Parmarth TV.  You can send any amount on our UPI Id: 9643218008m@pnb. 

24 घंटे में इंस्टाग्राम पर दोगुने हो गए हैं कॉकरोच जनता पार्टी के फॉलोअर्स | Parmarth TV Rajasthan की तीन राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को होगा मतदान, इन सांसदों का खत्म हो रहा है कार्यकाल | Parmarth TV राहुल गांधी के बारे में मदन दिलावर के विवादित बयान को लेकर Jully ने बोल दी है बड़ी बात, कहा- जो व्यक्ति स्वयं… | Parmarth TV अमेरिका फिर से करने वाला है ईरान पर हमला! डोनाल्ड ट्रंप ने अब उठा लिया है ये बड़ा कदम | Parmarth TV NEET Paper Leak: सीकर के छात्र ने की थी आत्महत्या, अब राहुल गांधी ने परिजनों को दिया ये आश्वसान | Parmarth TV China: कोयला खदान में भीषण विस्फोट, 90 लोगों की मौत, बढ़ सकता है मृतकों का आंकड़ा | Parmarth TV Jaipur: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 420 युवाओं को दी बड़ी सौगात, ये बड़ा ऐलान भी किया | Parmarth TV PM Kisan Scheme: इस महीने में जारी होगी 23वीं किस्त! | Parmarth TV Aadhaar Card: अब इस तारीख तक फ्री में अपडेट करवा सकते हैं आधार कार्ड, बढ़ गई है समय सीमा | Parmarth TV अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी Ivanka Trump को मिली जान से मारने की धमकी | Parmarth TV

एआई से चिंतित दुनिया! – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

एआई से चिंतित दुनिया! – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

घूम-फिर कर सवाल यही आएगा कि क्या ऐसे कानूनों से वह चिंता दूर होगी, जिसके लिए ये सारी कवायद की जा रही है? अक्सर किसी नई तकनीक और उसके प्रभाव को रोकने में कानून अक्षम साबित होते हैं।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने अपनी अमेरिका यात्रा की इसे एक बड़ी कामयाबी बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने उनकी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) संबंधी योजना को स्वीकार कर लिया। पिछले हफ्ते जब ह्वाइट हाउस में दोनों नेता मिले, तो सुनक ने बाइडेन के सामने प्रस्ताव रखा कि ब्रिटेन एआई के विनियम का केंद्र बनना चाहता है। बाइडेन इस पर सहमत हो गए। जब दो विश्व नेता किसी ऐसे एजेंडे पर सहमत हो, तो यह समझा जा सकता है कि संबंधित मुद्दा दुनिया में किस तरह चिंता का विषय हुआ है। दरअसल, ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया के कई देशों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर सख्त और कड़े कानून बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इन कानूनों के तहत दिखने में असली लेकिन फर्जी सामग्री बनाने वाली तकनीकों पर प्रतिबंध लगाना भी संभव है। मगर घूम-फिर कर सवाल यही आएगा कि क्या ऐसे कानूनों से वह चिंता दूर होगी, जिसके लिए ये सारी कवायद की जा रही है? अक्सर किसी नई तकनीक और उसके प्रभाव को रोकने में कानून अक्षम साबित होते हैं।

बहरहाल, यह सच है कि इस समय दुनिया भर में एआई को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। तकनीक की दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोग- मसलन ट्विटर के मालिक इलॉन मस्क और गूगल के सीईओ तक एआई को लेकर चेतावनी दे चुके हैं। ऐसे में उचित ही है कि सरकारें भी इस बात पर विचार करें कि कैसे एआई के दुष्प्रभावों से लोगों को बचाया जाए। पिछले हफ्ते ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय साइंस और तकनीक परिषद ने एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें कहा गया कि एआई से तैयार सामग्री कई तरह से नुकसानदायक हो सकती है। मसलन, अगर किसी देश की संसदीय समिति किसी विषय पर जनता से राय मांगती हैं, तो तो एआई के जरिये जनता की फर्जी राय दर्ज कराई जा सकती है, जिससे यह संकेत जाएगा कि कि जनता की राय एक खास पक्ष में है। फिर कॉपीराइट, प्राइवेसी और उपभोक्ता सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बनाए गए कानून एआई के नए दौर में नाकाफी हो गए हैं। इसलिए अगर सरकारें नया कानूनी ढांचा बनाना चाहती हैं, यह पहल सही दिशा में मानी जाएगी।



Trending News