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जयपुर। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय राजधानी जयपुर के जेएलएन मार्ग पर ओटीएस चौराहे हैंगिंग ब्रिज निर्माण के अनुबंध रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। न्यायालय ने इस मामले में प्रदेश की भजनलाल सरकार को फटकार लगाते हुए बोल दिया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय किए गए अनुबंध के आधार पर ही इसका निर्माण होगा। इस पर अब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी है।
गहलोत ने एक्स के माध्यम से इस मामले में भाजपा सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि जयपुर को जाम-मुक्त बनाने के विज़न के साथ हमारी कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2021-22 में ओटीएस, रामबाग, जेडीए, जवाहर सर्किल, बीटू बाईपास, लक्ष्मीमंदिर और चौमू हाउस जैसे 7 प्रमुख चौराहों को ट्रैफिक लाइट फ्री करने का ऐतिहासिक काम शुरू किया था। बी-2 बाईपास और लक्ष्मीमंदिर तिराहे पर फ्लाईओवर व अंडरपास इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। लेकिन संकीर्ण राजनीतिक सोच से ग्रस्त भाजपा सरकार ने आते ही ओटीएस चौराहे पर बनने वाले हैंगिंग ब्रिज का अनुबंध ही रद्द कर दिया। जनता रोज जाम में पिसती रही और यह जनकल्याणकारी प्रोजेक्ट भी भाजपा के ‘इंतजारशास्त्र’ और ‘बदले की राजनीति’ की भेंट चढ़ गया।
उच्च न्यायालय ने इस सोई हुई सरकार को आईना दिखाया
गहलोत ने इस संबंध में आगे कहा कि अब माननीय उच्च न्यायालय ने इस सोई हुई सरकार को आईना दिखाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यह परियोजना हमारी तत्कालीन सरकार की घोषणा के अनुरूप ही पूरी होगी। न्यायालय की यह टिप्पणी भाजपा सरकार के मुंह पर करारा तमाचा है कि “सरकार बदलने से अनुबंध नहीं बदला जा सकता और राजनीतिक द्वेष में सरकारी वादे नहीं तोड़े जा सकते।” गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी, हर विकास कार्य को ‘सियासी चश्मे’ से देखना बंद कीजिए। जनहित को सर्वोपरि रखिए, क्योंकि राजस्थान की जनता विकास चाहती है, आपकी सरकार का यह हठधर्मिता और राजनीतिक प्रतिशोध वाला रवैया नहीं।
PC: hindi.news18
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