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आरएसएस और उनकी विचारधारा का वंदे मातरम से कभी कोई नाता ही नहीं रहा: Gehlot | Parmarth TV

आरएसएस और उनकी विचारधारा का वंदे मातरम से कभी कोई नाता ही नहीं रहा: Gehlot | Parmarth TV

जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चित्तौड़गढ़ में केन्द्रीय मंत्री अमित शाह द्वारा वंदे मातरम को लेकर दिए भाषण को लेकर भाजपा-आरएसएस पर निशाना साधा है। गहलोत ने आज इस संबंध में एक्स के माध्यम से बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि कल चित्तौड़गढ़ में अमित शाह ने वंदे मातरम पर ज्ञान बांटा।

यह सुनकर इतिहास के जानकारों को हंसी आई। भाजपा-आरएसएस का वंदे मातरम से क्या संबंध है? यह वही आरएसएस और उनकी विचारधारा है जिसका वंदे मातरम से कभी कोई नाता ही नहीं रहा। आज इतिहास पर प्रवचन दे रहे हैं, यह इनका अपराध बोध है, कुछ और नहीं। इसलिए ये संसद में अब वंदे मातरम को लेकर कानून बना रहे हैं।

गहलोत ने कहा कि 1896 में कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार वंदे मातरम गूंजा। 1905 से यह हर कांग्रेस अधिवेशन की परंपरा बन गया। कांग्रेस के नेता वंदे मातरम का उद्घोष करते हुए अंग्रेजों से सीधी टक्कर लेते थे। अंग्रेजों ने प्रतिबंध लगाया, जुर्माने लगाए, जेल भेजा, लाठियां बरसाईं तब भी कांग्रेसजन और जोश से वंदे मातरम गाते रहे। 1937 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर इसका समावेशी स्वरूप अपनाया गया ताकि यह हर भारतीय का साझा गीत बने, लेकिन आरएसएस का कभी वंदे मातरम से कोई लेना देना नहीं रहा।

गहलोत ने कहा कि 1925 में आरएसएस के गठन से लेकर 1947 की आजादी तक इन्होंने कभी वंदे मातरम को अपना गीत नहीं बनाया। जिस गीत के लिए हजारों देशभक्त फांसी चढ़े, जेल गए, लाठियां खाईं, अंग्रेजों के डर से उसे गाने की हिम्मत आरएसएस कभी नहीं जुटा पाया। इसके बजाय 1939 में जब पूरा देश वंदे मातरम गाकर अंग्रेजों से लोहा ले रहा था, आरएसएस ने अपने लिए अलग प्रार्थना नमस्ते सदा वत्सले गढ़ ली जिससे अंग्रेजी सरकार आरएसएस से नाराज न हो जाए। जब 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में देश का बच्चा-बच्चा, बूढ़ा-जवान सड़कों पर अंग्रेजों के खिलाफ उतर पड़ा, आरएसएस उस आंदोलन से दूर  रहकर अंग्रेजों की खुशामद में लगा रहा।

भाषणों से इतिहास नहीं बदलता

गहलोत ने कहा कि यही वजह है कि आजादी के बाद देश की जनता ने दशकों तक इन्हें सत्ता से दूर रखा। अब सत्ता में आकर यह अपने इतिहास के पन्ने बदलना चाहते हैं, ताकि अपने दागों को धो सकें। पर याद रखिए, भाषणों से इतिहास नहीं बदलता। देश की जनता सब जानती है, इनके यह पाप ऐसे धुलने वाले नहीं हैं।

PC:  hindi.oneindia

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