धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में समय को चार युगों (सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग) में बांटा गया है। इनमें कलयुग को अंतिम युग माना जाता है। श्रीमद्भागवत पुराण, विष्णु पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में कलयुग के अंत को लेकर कई बातें कही गई हैं।
इन्हीं मान्यताओं के साथ ‘भविष्यमालिका’ भी इन दिनों चर्चा में है। माना जाता है कि इसे लगभग 500 साल पहले ओडिशा के संत अच्युतानंद दास ने लिखा था। इसमें भविष्य से जुड़ी कई घटनाओं का उल्लेख भी किया गया है। हालांकि, इन भविष्यवाणियों को लेकर सभी के अलग-अलग मत हैं। हालांकि, इनकी ऐतिहासिक या वैज्ञानिक पुष्टि भी उपलब्ध नहीं है।
क्या है भविष्यमालिका?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संत अच्युतानंद दास ने भविष्य से जुड़े 300 से अधिक ग्रंथों की रचना की थी। इन्हें सामूहिक रूप से भविष्यमालिका या अच्युतानंद मालिका कहा जाता है। मान्यता है कि ये ग्रंथ ओडिशा के जगन्नाथ पुरी से जुड़े कुछ मठों और मंदिरों में सुरक्षित हैं। इनमें दुनिया के भविष्य, कलयुग के अंत और नए युग की शुरुआत से जुड़ी कई भविष्यवाणियों का उल्लेख मिलता है।
कलयुग के अंत में क्या होगा?
भविष्यमालिका के अनुसार, जैसे-जैसे कलयुग अपने अंतिम चरण में पहुंचेगा, वैसे-वैसे धरती पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कुछ मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि बाढ़ और अन्य प्राकृतिक घटनाओं के कारण पुराने शहर और गांव दोबारा सामने आ सकते हैं। भविष्यमालिका में यह भी उल्लेख मिलता है कि समय के साथ केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और अमरनाथ जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों के अस्तित्व पर संकट आ सकता है।
इन भविष्यवाणियों को बड़े प्राकृतिक बदलाव और कलयुग के अंतिम दौर का संकेत माना गया है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि किसी वैज्ञानिक या आधिकारिक स्रोत से नहीं हुई है।
भगवान कल्कि के अवतार का भी उल्लेख
सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, जब धरती पर अधर्म बढ़ जाएगा और धर्म का संतुलन बिगड़ जाएगा, तब भगवान विष्णु कल्कि अवतार धारण करेंगे। मान्यता है कि वे अधर्म का अंत कर धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे और इसके बाद नए युग का आरंभ होगा।
भविष्यमालिका में कहा गया है कि कलयुग में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ेगी जो बिना शास्त्र ज्ञान के स्वयं को संत या गुरु बताएंगे। ऐसे लोग धर्म का उपयोग केवल धन और प्रसिद्धि कमाने के लिए करेंगे तथा लोगों की आस्था का गलत फायदा उठाएंगे।
अन्न की गुणवत्ता में आएगी गिरावट
भविष्यवाणियों में यह भी उल्लेख मिलता है कि कलयुग के अंतिम चरण में भूमि की उपजाऊ शक्ति कम हो जाएगी। अनाज, फल और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता घटेगी और शुद्ध भोजन मिलना कठिन होता जाएगा। इसे प्रकृति के असंतुलन का संकेत माना गया है।
कलयुग में भी बताया गया है मुक्ति का मार्ग
हालांकि, धार्मिक ग्रंथों में कलयुग को सबसे कठिन युग माना गया है, लेकिन इसके साथ ही इसे मोक्ष प्राप्ति के लिए सबसे सरल युग भी बताया गया है। महर्षि व्यास के अनुसार, जिस पुण्य की प्राप्ति सतयुग में कठिन तपस्या और त्रेता व द्वापर में बड़े यज्ञों से होती थी, वही फल कलयुग में सच्चे मन से ईश्वर का नाम स्मरण, भक्ति और सत्कर्म करने से भी प्राप्त किया जा सकता है।







