Support Parmarth TV.  You can send any amount on our UPI Id: 9643218008m@pnb. 

नेत्रहीन पर्वतारोही  के लिए टोरंटो यूनिवर्सिटी ने तैयार की खास तकनीक वाली जैकेट | Parmarth TV सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- SIR है एक वैध और संवैधानिक प्रक्रिया | Parmarth TV भारतीय शेयर बाजार हल्की गिरावट के साथ बंद – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar | Parmarth TV Gold-Silver Prices: 4,503 रुपए गिर गए हैं चांदी के दाम, दो दिन में हो गई है इतनी सस्ती | Parmarth TV अमेरिका-ईरान के बीच फिर शुरू हो सकती है बड़ी जंग, ईरान अब कर रहा है ऐसा | Parmarth TV Ashok Gehlot का बड़ा बयान, कहा-राहुल गांधी बोलते हैं… | Parmarth TV Petrol-Diesel Prices: आज इतनी तय कर दी हैं दोनों ईंधनों की कीमतें | Parmarth TV US-Iran War: सीजफायर वार्ता के बीच अमेरिका सेना ने ईरान पर कर दिया हमला, इन्हें बनाया निशाना | Parmarth TV पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर गहलोत का बड़ा बयान, कहा- केन्द्र सरकार देश को सच्चाई से अवगत क्यों नहीं करवा रही है… | Parmarth TV मां की याद में शुरू की 1,500 किलोमीटर की पैदल यात्रा | Parmarth TV

आखिर क्यों अपनी ही भतीजी त्रिजटा से डरता था रावण? पढ़ें रामायण की यह रहस्यमयी कथा

आखिर क्यों अपनी ही भतीजी त्रिजटा से डरता था रावण? पढ़ें रामायण की यह रहस्यमयी कथा

धर्म डेस्क। रामायण में कई ऐसे पात्र हैं, जिनकी कहानियां आज भी लोगों को चौंकाती हैं। इन्हीं में से एक है लंकापति रावण और उसकी भतीजी त्रिजटा का रहस्यमयी रिश्ता। अपार शक्ति और ज्ञान का स्वामी रावण, जिस से देवता तक कांपते थे, वही रावण अपनी ही भतीजी त्रिजटा के सामने असहज और भयभीत रहता था। इसके पीछे एक गहरी पौराणिक कथा छिपी है। आइए जानते हैं, आखिर ऐसा क्यों था।

कौन थी त्रिजटा?

त्रिजटा, रावण के छोटे भाई विभीषण की पुत्री थी। जैसे विभीषण धर्म, सत्य और विवेक के मार्ग पर चलते थे, वैसी ही उनकी बेटी त्रिजटा भी दिव्य ज्ञान से संपन्न थी। उसे भविष्य की घटनाओं का पूर्वाभास होता था और उसके देखे गए सपने कभी असत्य नहीं होते थे।

राक्षस कुल में जन्म लेने के बावजूद त्रिजटा सदैव सत्य और धर्म के पक्ष में खड़ी रही। वह यह भली-भांति जानती थी कि रावण अधर्म के मार्ग पर चल पड़ा है और उसका विनाश निश्चित है।

त्रिजटा का भयावह सपना

जब माता सीता अशोक वाटिका में बंदी थीं, तब उन्हें डराने और प्रताड़ित करने के लिए रावण कई राक्षसियों को भेजता था। इन्हीं राक्षसियों में त्रिजटा भी शामिल थी।

एक रात त्रिजटा ने एक ऐसा भयानक सपना देखा, जिसने सब कुछ बदल दिया। सपने में उसने देखा कि पूरी लंका नगरी जलकर राख हो चुकी है। रावण का अंत हो चुका है और विभीषण, भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता के साथ पुष्पक विमान में विराजमान होकर लंका के ऊपर से जा रहे हैं।

रावण क्यों डर गया?

त्रिजटा ने अपना सपना अन्य राक्षसियों को सुनाया और कहा कि यह भविष्यवाणी जल्द ही सच होने वाली है। यह सुनते ही सभी राक्षसियां भयभीत हो गईं और माता सीता को सताना बंद कर दिया।

जब यह बात रावण तक पहुंची, तो वह भी विचलित हो उठा। रावण जानता था कि त्रिजटा के सपने कभी झूठे नहीं होते। यही कारण था कि वह त्रिजटा के सामने स्वयं को असहाय महसूस करता था और उसके शब्दों से भयभीत रहता था।

अधर्म के अंत का संकेत

त्रिजटा का सपना दरअसल अधर्म पर धर्म की विजय का संकेत था। यही वजह है कि रावण, जिसने कभी किसी से भय नहीं खाया, वह भी त्रिजटा की भविष्यवाणियों से डरता था।

Trending News