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ऊं का उच्चारण करना शरीर और मन दोनों के लिए है लाभकारी, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है सकारात्मक प्रभाव

ऊं का उच्चारण करना शरीर और मन दोनों के लिए है लाभकारी, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है सकारात्मक प्रभाव

ऊं का उच्चारण करते समय शरीर में कंपन उत्पन्न होता है, जिससे पेट और श्वसन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पाचन क्रिया बेहतर हो सकती है और पेट की अत …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 04 Jun 2026 09:19:00 AM (IST)Updated Date: Thu, 04 Jun 2026 09:19:00 AM (IST)

ऊं का उच्चारण करना शरीर और मन दोनों के लिए है लाभकारी। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. यह तीन मुख्य ध्वनियों- अ, उ और म से मिलकर बना है
  2. इसका उच्चारण किसी भी आयु वर्ग का व्यक्ति अपनी क्षमता और सुविधा के अनुसार कर सकता है
  3. नियमित रूप से ऊं का उच्चारण करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भारत की प्राचीन योग और ध्यान परंपरा में ऊं का विशेष महत्व माना गया है। यह तीन मुख्य ध्वनियों- अ, उ और म से मिलकर बना है। इसका उच्चारण किसी भी आयु वर्ग का व्यक्ति अपनी क्षमता और सुविधा के अनुसार कर सकता है। नियमित रूप से ऊं का उच्चारण करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

यह कहना है प्राकृतिक चिकित्सक भानु सरकानुनगो का। उनके अनुसार ऊं का उच्चारण करते समय शरीर में कंपन उत्पन्न होता है, जिससे पेट और श्वसन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नियमित अभ्यास से पाचन क्रिया बेहतर हो सकती है और पेट की अतिरिक्त चर्बी कम करने में भी सहायता मिल सकती है। इसके साथ ही यह फेफड़ों को सक्रिय बनाता है, जिससे सांस लेने की क्षमता में सुधार हो सकता है।

वहीं ऊं के उच्चारण से अस्थमा के मरीजों को भी इससे राहत मिलती है। यह फेफड़ों में जमा कफ को बाहर निकालने में मदद कर सकता है और गले की खराश को कम करने में सहायक माना जाता है। उच्चारण मन को शांत करने का एक सरल तरीका माना जाता है। इससे शरीर में मौजूद नकारात्मकता और तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

एकाग्रता बढ़ती है और याददाश्त बेहतर होती है

नियमित अभ्यास करने वाले लोगों में एकाग्रता बढ़ने और याददाश्त बेहतर होने के अनुभव भी सामने आए हैं। माइग्रेन से पीड़ित लोगों को भी इससे कुछ हद तक राहत मिल सकती है। इसके अलावा उच्च रक्तचाप और थायराइड से जुड़े मरीजों के लिए भी यह लाभकारी माना जाता है, हालांकि किसी भी बीमारी में चिकित्सकीय उपचार जारी रखना जरूरी है। जब कई लोग एक साथ बैठकर ऊं का उच्चारण करते हैं तो वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। सामूहिक रूप से किया गया यह अभ्यास मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सामाजिक जुड़ाव की भावना को भी मजबूत करता है।

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