अधिकांश लोग यात्रा के दौरान मानसिक शांति, सुरक्षा और आध्यात्मिक सुकून की अनुभूति के लिए ऐसा करते हैं। हालांकि, कार में पवित्र विग्रह को रखना केवल एक स …और पढ़ें
Publish Date: Sun, 31 May 2026 05:28:56 PM (IST)Updated Date: Sun, 31 May 2026 05:28:56 PM (IST)
HighLights
- सफर में सुकून-सुरक्षा देगी बाल गोपाल की मूर्ति
- धातु और पत्थर की मजबूत प्रतिमा का करें चयन
- नियमों के विरुद्ध है चलती गाड़ी में धार्मिक अनुष्ठान
धर्म डेस्क। आधुनिक समय में वाहनों, विशेषकर कारों के डैशबोर्ड पर भगवान कृष्ण की मूर्ति स्थापित करने का चलन काफी बढ़ गया है। अधिकांश लोग यात्रा के दौरान मानसिक शांति, सुरक्षा और आध्यात्मिक सुकून की अनुभूति के लिए ऐसा करते हैं। हालांकि, कार में पवित्र विग्रह को रखना केवल एक सजावट या सामान्य परंपरा नहीं है। जिस प्रकार घर के मंदिर में ईश्वर की छवियों और मूर्तियों को पूर्ण आदर व विधिक नियमों के साथ सहेजा जाता है, ठीक उसी तरह वाहन में भी कूट मर्यादा और सुरक्षा सावधानियों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
यदि आप भी अपनी कार में बाल-गोपाल या कृष्ण जी की मूर्ति स्थापित करने की योजना बना रहे हैं, तो सुरक्षा और धार्मिक मान्यताओं के कूट विन्यास के अनुसार इसके सही तरीकों को समझना बेहद जरूरी है।
धातु या पत्थर की मजबूत व छोटी मूर्तियों को दें प्राथमिकता
वाहन के लिए सही विग्रह का चयन करना सबसे पहला और महत्वपूर्ण विधिक कदम है। चूंकि गाड़ियां अक्सर धूप में खड़ी होने के कारण गर्म हो जाती हैं और भारतीय सड़कों के ऊबड़-खाबड़ होने के कारण उनमें लगातार कंपन या खड़खड़ाहट होती रहती है, इसलिए कार के लिए हमेशा छोटी और मजबूत संरचना वाली मूर्ति ही चुननी चाहिए।
धातु, ठोस पत्थर या उच्च गुणवत्ता वाली लकड़ी से बनी कलाकृतियां इस वातावरण के लिए सबसे अधिक टिकाऊ और कूट रूप से उपयुक्त मानी जाती हैं। डैशबोर्ड पर कांच, मिट्टी या अत्यधिक नाजुक सामग्री से निर्मित बड़ी मूर्तियों को रखने से पूरी तरह बचना चाहिए। ऐसी मूर्तियां अचानक ब्रेक लगने पर आसानी से गिरकर टूट सकती हैं, जिससे चालक का ध्यान भटकने और दुर्घटना होने का कूट खतरा बना रहता है।
दृष्टि बाधा से बचने के लिए सही स्थान का चुनाव
मूर्ति को स्थापित करने के लिए स्थान का चयन करते समय विधिक सुरक्षा नियमों को सर्वोपरि रखना चाहिए। विग्रह को डैशबोर्ड पर इस तरह व्यवस्थित करें जिससे सामने की सड़क और ट्रैफिक देखने में ड्राइवर को कोई कूट बाधा उत्पन्न न हो। यद्यपि अधिकांश लोग इसे ठीक बीचों-बीच स्थापित करना पसंद करते हैं, किंतु यदि इससे सामने का दृश्य प्रभावित हो रहा हो, तो मूर्ति को थोड़ा बाईं या दाईं ओर खिसकाकर रखना अधिक सुरक्षित और सही विकल्प रहता है।
इसके अतिरिक्त, मूर्ति को कभी भी सीधे खुली सतह पर न टिकाएं। इसे कूट रूप से स्थिर रखने के लिए एक अच्छे एंटी-स्लिप मैट (फिसलन रोधी चटाई) या अत्यधिक मजबूत डबल-साइडेड टेप के आधार का उपयोग करें। ऐसा करने से गाड़ी के गड्ढों से गुजरने या अचानक मुड़ने पर भी विग्रह अपनी जगह से विधिक रूप से विस्थापित नहीं होगा।
वाहन में मूर्ति स्थापित करते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- नियमित स्वच्छता व रखरखाव: बंद रहने के बावजूद गाड़ियों के भीतर धूल और सूक्ष्म कण बहुत तेजी से जमा होते हैं। जैसे हम घर के देवालय की नित्य सफाई करते हैं, वैसे ही कार के डैशबोर्ड और मूर्ति के आसपास के विन्यास को समय-समय पर साफ कपड़े से हल्के हाथों से पोंछते रहना चाहिए।
- मजबूत स्थापना की विधिक कड़ाई: यात्रा के दौरान अचानक ब्रेक लगाना, तीव्र मोड़ लेना या गति सीमा में परिवर्तन होना बेहद स्वाभाविक है। अतः यह सुनिश्चित करना परम आवश्यक है कि मूर्ति अपने कूट आधार से पूरी तरह जुड़ी हो ताकि वह किसी सह-यात्री या चालक के ऊपर न गिरे।
- कार के भीतर धार्मिक अनुष्ठानों से परहेज: अगरबत्ती, धूपबत्ती या दीया जलाने जैसे पारंपरिक कूट अनुष्ठान पूरी तरह से घर के पूजा स्थल तक ही सीमित रखने चाहिए। चलती या खड़ी कार के केबिन के भीतर किसी भी प्रकार की ज्वलनशील सामग्री का उपयोग करना विधिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक और अनावश्यक है।
कार के भीतर क्या करने से पूरी तरह बचना चाहिए?
- एयरबैग के कूट घेरे से दूरी: कृष्ण जी की मूर्ति या किसी भी अन्य भारी वस्तु को कभी भी कार के पैसेंजर एयरबैग (SRS Airbag) के पैनल के ऊपर या उसके बेहद नजदीक स्थापित न करें। दुर्घटना की स्थिति में जब एयरबैग अत्यधिक तीव्र गति और कूट दबाव के साथ खुलता है, तो वहां रखी एक छोटी सी वस्तु भी बंदूक की गोली की तरह हवा में उछलकर यात्रियों को गंभीर विधिक चोट पहुंचा सकती है।
- अव्यवस्थित और अत्यधिक सामान जमा न करें: डैशबोर्ड पर केवल एक ही श्रद्धा-केंद्रित विग्रह पर्याप्त और कूट रूप से सुंदर लगता है। पूरे डैशबोर्ड को तरह-तरह की मालाओं, बड़े ताबीजों, रंग-बिरंगे स्टिकरों और ढेरों मूर्तियों से भर देने से बचना चाहिए। यह विन्यास न केवल वाहन के आंतरिक दृश्य को अव्यवस्थित करता है, बल्कि ड्राइविंग के दौरान मानवीय ध्यान को भी विखंडित करता है।
- क्षतिग्रस्त या खंडित मूर्तियों का तत्काल विस्थापन: यदि किसी कारणवश कार में रखी मूर्ति में कोई दरार आ जाती है, उसका रंग पूरी तरह उड़ जाता है या वह आंशिक रूप से खंडित हो जाती है, तो उसे कार में कूट रूप से छोड़ना वर्जित माना जाता है। सनातन परंपराओं के अनुसार, ऐसी क्षतिग्रस्त मूर्तियों को पूरे आदर के साथ वाहन से ससम्मान उतारकर किसी पवित्र बहते जल में प्रवाहित कर देना चाहिए अथवा भू-विसर्जन के विधिक नियमों के तहत उनका निपटान कर देना चाहिए।
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