कुलैथ में भी ओडिशा की परंपरा के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है। इससे पहले भगवान अस्वस्थ होते हैं और स…और पढ़ें
Publish Date: Fri, 10 Jul 2026 02:23:51 PM (IST)Updated Date: Fri, 10 Jul 2026 02:24:25 PM (IST)
HighLights
- औषधीय भोग और एकांतवास की परंपरा
- घट फटने का अद्भुत चमत्कार
- दो दिवसीय भव्य मेला और रथ यात्रा
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। लगभग 172 वर्ष पुराने कुलैथ स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में आषाढ़ शुक्ल दशमी, गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की ज्वरलीला के अंतर्गत प्रभु के अस्वस्थ होने पर सुबह की आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए गए। अब सात दिनों तक श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र महाराज और बहन सुभद्रा के दर्शन नहीं होंगे। इस अवधि में भगवान को औषधीय काढ़ा, दलिया और खिचड़ी का भोग अर्पित किया जाएगा। सात दिन बाद 15 जुलाई को भगवान के स्वस्थ होने पर मंदिर के पट खोले जाएंगे।
परंपरागत रूप से उनका दिव्य शृंगार कर भात का भोग अर्पित किया जाएगा। इसके अगले दिन 16 जुलाई की सुबह भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी। इस यात्रा में आसपास के राज्यों के साथ-साथ विभिन्न जिलों से भी श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु ओडिशा की जगन्नाथ रथयात्रा में शामिल नहीं हो पाते, वे कुलैथ की रथ यात्रा में शामिल होकर पुण्य फल प्राप्त करते हैं। भगवान के ज्वरलीला में जाने के साथ ही रथ यात्रा की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।
कुलैथ में भी ओडिशा की परंपरा के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है। इससे पहले भगवान अस्वस्थ होते हैं और सात दिन तक एकांतवास में रहते हैं। मंदिर के पुजारी भानु श्रीवास्तव ने बताया कि गुरुवार सुबह आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए गए। भगवान के विग्रह के समीप नीम की पत्तियां रखी गई हैं और उन्हें औषधीय काढ़ा अर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही दलिया और खिचड़ी का भोग लगाया जाएगा। भगवान के दर्शन अब 15 जुलाई को पट खुलने के बाद ही होंगे।
घट फटने का चमत्कार
कुलैथ में भगवान जगन्नाथ की प्रत्यक्ष उपस्थिति का प्रमाण माने जाने वाले भात के घट फटने की परंपरा आज भी श्रद्धा का केंद्र है। भगवान को अर्पित किए गए मिट्टी के सात घट एक-दूसरे के ऊपर रखे जाते हैं। सबसे पहले सबसे ऊपर रखा घट स्वतः चार भागों में विभाजित हो जाता है, इसके बाद अन्य सभी घट भी फट जाते हैं। इसके पश्चात यही भात प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को वितरित किया जाता है। इस अद्भुत परंपरा को देखने के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु कुलैथ पहुंचते हैं।
रथ यात्रा की तैयारियां शुरू
भगवान जगन्नाथ के एकांतवास में जाने के साथ ही कुलैथ में रथ यात्रा की तैयारियां तेज हो गई हैं। यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र महाराज और बहन सुभद्रा को रथ में विराजमान कर पूरे गांव का भ्रमण कराया जाएगा। रात्रि में यात्रा गांव स्थित माता के मंदिर पहुंचेगी, जहां भगवान का रात्रि विश्राम होगा। मान्यता है कि इस दौरान भगवान अपनी मौसी के घर विश्राम करते हैं। अगले दिन यात्रा पुनः प्रारंभ होकर मुख्य मंदिर पहुंचेगी, जहां परंपरा के अनुसार भगवान को भात के घट अर्पित किए जाएंगे।
दो दिन तक लगता है मेला
रथ यात्रा के दौरान कुलैथ गांव में दो दिनों तक मेले जैसा माहौल रहता है। आसपास के राज्यों तथा पड़ोसी जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में शामिल होने पहुंचते हैं। मेले में दूर-दूर से आए दुकानदार भी अपनी दुकानें सजाते हैं।






