Support Parmarth TV.  You can send any amount on our UPI Id: 9643218008m@pnb. 

विदेशी मुद्रा भंडार 14 अरब डॉलर बढ़कर 707 अरब डॉलर पर – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar | Parmarth TV Earthquake: महाराष्ट्र और हिमाचल से लेकर अफगानिस्तान में भूंकप से कांपी धरती, लगे इतने झटके | Parmarth TV Petrol-Diesel Prices: स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले देश के बड़े शहरों में इतनी तय कर दी हैं कीमतें | Parmarth TV Atal Pension Yojana: हर महीने करें केवल 210 रुपए निवेश, मिलेगी पांच हजार की पेंशन | Parmarth TV पाक पीएम शहबाज शरीफ ने फिर से दी गीदड़भभकी, कहा- अगर पानी को रोकने या कम करने का प्रयास किया तो… | Parmarth TV Sonam Wangchuk का बड़ा बयान, कहा- देश को सही नेतृत्व चुनने के लिए शांतिपूर्ण क्रांति की जरूरत | Parmarth TV शेयर बाजारों में चौतरफा बिकवाली, निफ्टी दो सप्ताह के निचले स्तर पर – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar | Parmarth TV Gold-Silver Prices: सोना ₹1,066 सस्ता, चांदी भी 2,368 रुपए हुई सस्ती | Parmarth TV अमेरीकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कर दिया है 100% तक का टैरिफ लगाने का ऐलान | Parmarth TV खड़गे की हल्द्वानी रैली के बाद मंच के शुद्धिकरण को लेकर Rahul Gandhi का बड़ा बयान, कहा-यह बीजेपी-आरएसएस की सालों से… | Parmarth TV

गर्भधारण से श्मशान तक… जानिए सनातन धर्म के 16 संस्कार, जिनके पीछे छुपा है गजब का वैज्ञानिक महत्व

गर्भधारण से श्मशान तक… जानिए सनातन धर्म के 16 संस्कार, जिनके पीछे छुपा है गजब का वैज्ञानिक महत्व

धर्म डेस्क। सनातन परंपरा में बच्चा पैदा होने के बाद नहीं, बल्कि गर्भ में आने से पहले ही उसके संस्कार शुरू हो जाते हैं। जानिए जन्म से मृत्यु तक के वो 16 नियम जो इंसान को ‘महापुरुष’ बनाते हैं।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और मॉडर्न लाइफस्टाइल में हम अपनी जड़ों को भूलते जा रहे हैं। लेकिन हाल के वर्षों में ग्लोबल स्तर पर प्राचीन भारतीय जीवन पद्धति को लेकर उत्सुकता बढ़ी है। रिसर्च की मानें तो लोग अब केवल धार्मिक आस्था के लिए नहीं, बल्कि इनके पीछे छिपे विज्ञान (Science) और मनोविज्ञान (Psychology) को समझने के लिए ‘षोडश संस्कारों’ (16 Sanskars) के बारे में सर्च कर रहे हैं।

ऋषि वेदव्यास के अनुसार, जिस प्रकार एक गंदे लोहे को तपाकर और पीटकर शुद्ध व कीमती अस्त्र बना दिया जाता है, ठीक उसी प्रकार ये 16 संस्कार किसी साधारण मनुष्य को सुसंस्कृत और समाज के लिए उपयोगी बनाते हैं।

16 संस्कारों की पूरी सूची और उनका वैज्ञानिक महत्व

हमारे शास्त्रों (विशेषकर गौतम गृह्यसूत्र और मनुस्मृति) में इन संस्कारों को जीवन के चार मुख्य चरणों में बांटा गया है – गर्भावस्था के संस्कार, बाल्यकाल के संस्कार, शिक्षा (विद्यार्थी) जीवन के संस्कार और वयस्क/गृहस्थ जीवन के संस्कार।

1. गर्भाधान संस्कार (Conception)

यह जीवन का पहला संस्कार है। इसका उद्देश्य वासना पूर्ति नहीं, बल्कि एक श्रेष्ठ, मानसिक रूप से स्वस्थ और सदाचारी संतान को जन्म देना है। माता-पिता के शुद्ध विचार गर्भस्थ शिशु की नींव रखते हैं।

2. पुंसवन संस्कार (Protection of the fetus)

गर्भधारण के तीसरे या चौथे महीने में यह संस्कार होता है। वैज्ञानिक दृष्टि से इस समय गर्भ में शिशु का मस्तिष्क विकसित होना शुरू होता है। इस संस्कार के जरिए मां को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत किया जाता है ताकि मिसकैरेज (गर्भपात) न हो।

3. सीमन्तोन्नयन संस्कार (Satisfying the mother’s wishes)

गर्भ के छठे या आठवें महीने में मां को प्रसन्न रखने के लिए यह संस्कार होता है। इसे आज की भाषा में ‘गोद भराई’ भी कहते हैं। इस समय शिशु मां की आवाज और संगीत सुनने लगता है, इसलिए मां को सकारात्मक माहौल दिया जाता है।

4. जातकर्म संस्कार (Childbirth ritual)

शिशु के जन्म लेते ही यह संस्कार होता है। इसके तहत पिता नवजात शिशु को शहद और घी चटाता है और उसके कान में वेदमंत्र बोलता है।

गूगल फैक्ट: आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि मां के दूध से पहले शहद चटाने से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ती है और स्वर्ण प्राशन (सोने की भस्म के साथ) से बुद्धि प्रखर होती है।

5. नामकरण संस्कार (Naming ceremony)

जन्म के 11वें या 12वें दिन बच्चे का नाम रखा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नक्षत्रों की गणना करके ऐसा नाम रखा जाता है जिसका ध्वनि विज्ञान (Sound Science) बच्चे के व्यक्तित्व पर सकारात्मक प्रभाव डाले।

6. निष्क्रमण संस्कार (First outing)

जन्म के चौथे महीने में बच्चे को पहली बार घर से बाहर निकालकर सूर्य और चंद्रमा के दर्शन कराए जाते हैं। वैज्ञानिक नजरिए से, इस उम्र तक बच्चे की आंखें बाहरी रोशनी और पंचभूतों (प्रकृति) को सहने के लिए तैयार हो जाती हैं, जिससे उसे विटामिन डी और शुद्ध हवा मिलती है।

7. अन्नप्राशन संस्कार (First feeding of solid food)

छठे महीने में बच्चे को पहली बार अन्न (जैसे खीर या दलिया) खिलाया जाता है। चिकित्सा विज्ञान (Pediatrics) भी यही मानता है कि 6 महीने तक केवल मां का दूध और उसके बाद बच्चे का पाचन तंत्र ठोस अन्न पचाने के योग्य हो जाता है।

8. चूड़ाकर्म या मुंडन संस्कार (Tonsuring)

पहले या तीसरे वर्ष में बच्चे के सिर के बाल पहली बार मुंडवाए जाते हैं। गर्भ के बाल हटाने से सिर की नसें सक्रिय होती हैं, बौद्धिक विकास तेज होता है और गर्मियों में बच्चे का सिर ठंडा रहता है।

9. कर्णवेध संस्कार (Ear piercing)

बच्चे के कान छेदे जाते हैं। एक्यूपंक्चर (Acupuncture) विज्ञान के अनुसार, कान के निचले हिस्से में एक ऐसा बिंदु होता है जो मस्तिष्क की नसों और आंखों की रोशनी से जुड़ा होता है। कान छेदने से हर्निया जैसी बीमारियों से बचाव होता है और पुरुषों में अंडकोष की सुरक्षा होती है।

10. उपनयन या यज्ञोपवीत संस्कार (Sacred thread ceremony)

इसे जनेऊ संस्कार भी कहते हैं। इसके बाद बच्चा ‘द्विज’ (दूसरा जन्म) कहलाता है और विद्या ग्रहण करने योग्य बनता है। हृदय के पास से गुजरने वाला यह धागा ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है।

11. वेदारंभ संस्कार (Starting Vedic education)

उपनयन के तुरंत बाद गुरु के सानिध्य में वेदों और ज्ञान की शिक्षा शुरू होती है ताकि बच्चा आत्मनिर्भर और संस्कारी नागरिक बन सके।

12. केशांत संस्कार (First shaving of beard)

गुरुकुल की शिक्षा पूरी होने पर लगभग 16 वर्ष की आयु में ब्रह्मचर्य की समाप्ति के प्रतीक स्वरूप पहली बार दाढ़ी-मूंछ का मुंडन किया जाता था।

13. समावर्तन संस्कार (Graduation ceremony)

इसे आज का ‘दीक्षांत समारोह’ (Graduation) कह सकते हैं। गुरुकुल की शिक्षा पूरी होने पर शिष्य गुरु को गुरुदक्षिणा देकर वापस अपने घर लौटता था।

14. विवाह संस्कार (Marriage)

यह जीवन का सबसे महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। इसके जरिए मनुष्य ब्रह्मचर्य से गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करता है। यह केवल दो शरीरों का नहीं, बल्कि दो आत्माओं का मिलन है, जिससे सृष्टि का चक्र आगे बढ़ता है।

15. आवसथ्याधान या वानप्रस्थ संस्कार (Preparing for retirement)

उम्र के ढलने पर (लगभग 50 वर्ष के बाद) व्यक्ति सांसारिक मोह-माया छोड़कर समाज सेवा और ईश्वर भक्ति की ओर कदम बढ़ाता है।

16. अंत्येष्टि संस्कार (Funeral rites)

यह जीवन का अंतिम यानी 16वां संस्कार है। मृत्यु के बाद मृत शरीर को अग्नि को समर्पित किया जाता है, जिससे पंचतत्वों (क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा) से बना शरीर वापस उन्हीं तत्वों में विलीन हो जाता है।

सनातन धर्म के ये 16 संस्कार अंधविश्वास नहीं, बल्कि पूरी तरह से एक सुव्यवस्थित जीवन जीने की साइंटिफिक गाइडबुक हैं। जन्म से पहले की मानसिक स्थिति से लेकर मृत्यु के बाद तक, हर मोड़ पर समाज और मनुष्य को संतुलन में रखना ही इन संस्कारों का असली उद्देश्य है।

Trending News