आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर लोग घर लौटने पर सुकून के बजाय भारीपन, थकान और चिड़चिड़ापन महसूस करते हैं। यदि आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो यह घर …और पढ़ें
Publish Date: Thu, 29 Jan 2026 08:04:00 AM (IST)Updated Date: Thu, 29 Jan 2026 08:04:00 AM (IST)
HighLights
- घर में कपूर के साथ मिलाकर जलाएं ये दो चीजें।
- तनाव कम करने, एकाग्रता बढ़ाने में मददगार।
- गहराई से वातावरण का शुद्धिकरण करते हैं।
धर्म डेस्क। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर लोग घर लौटने पर सुकून के बजाय भारीपन, थकान और चिड़चिड़ापन महसूस करते हैं। यदि आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो यह घर में मौजूद ‘स्टैग्नेंट एनर्जी’ (रुकी हुई ऊर्जा) का संकेत हो सकता है। वास्तु शास्त्र और आयुर्वेद में इसका एक अचूक समाधान बताया गया है कपूर के साथ लोबान और गुग्गल का मिश्रण।
प्राकृतिक औषधि हैं लोबान और गुग्गल
आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार, लोबान और गुग्गल पेड़ों से प्राप्त होने वाली प्राकृतिक राल (Resin) हैं। जहाँ कपूर हवा को तुरंत ऊर्जायुक्त बनाता है, वहीं लोबान और गुग्गल गहराई से वातावरण का शुद्धिकरण करते हैं।
लोबान – इसे मानसिक तनाव कम करने और एकाग्रता बढ़ाने के लिए जाना जाता है।
गुग्गल – इसमें शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो वातावरण को कीटाणुमुक्त बनाते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण – केवल आस्था नहीं, सेहत भी
धार्मिक महत्व के साथ-साथ इसका वैज्ञानिक आधार भी बेहद मजबूत है। कपूर और गुग्गल के धुएं में एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं। बदलते मौसम या मानसून के दौरान, यह धुआं एक प्राकृतिक ‘एयर प्यूरीफायर’ की तरह काम करता है, जो सर्दी, खांसी और सांस संबंधी सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट कर देता है।
वास्तु दोष और नकारात्मक ऊर्जा का समाधान
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के अंधेरे कोनों या भारी फर्नीचर के पीछे अक्सर नकारात्मक ऊर्जा जमा हो जाती है, जिससे आर्थिक तंगी और गृह-क्लेश की स्थिति बनती है।
विधि – संध्या काल (दिन और रात के मिलन का समय) में पीतल या मिट्टी के पात्र में भीमसेनी कपूर जलाएं और उस पर थोड़ा लोबान व गुग्गल डालें।
उपाय – इस धुएं को पूरे घर में दिखाएं। मान्यता है कि इससे ‘बुरी नजर’ का प्रभाव खत्म होता है और सकारात्मकता का संचार होता है।
सावधानी और सही तरीका
विशेषज्ञों का कहना है कि हमेशा शुद्ध भीमसेनी कपूर का ही प्रयोग करना चाहिए। धुआं इतना अधिक न करें कि सांस लेने में दिक्कत हो; बस हल्की सुगंध ही काफी है। धुआं दिखाने के बाद कुछ देर के लिए खिड़कियां खोल दें ताकि नकारात्मकता बाहर निकल सके और ताजी हवा अंदर आ सके।







