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दोपहर में पूजा करना शुभ है या अशुभ? जानें क्या कहते हैं नियम और कौन सा समय है सबसे बेस्ट

दोपहर में पूजा करना शुभ है या अशुभ? जानें क्या कहते हैं नियम और कौन सा समय है सबसे बेस्ट

शास्त्रों के अनुसार दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक देवी-देवताओं का विश्राम काल होने से सामान्य पूजा वर्जित है। जबकि ब्रह्म मुहूर्त और प्रातः काल पूजा के लिए…और पढ़ें

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari

Publish Date: Sat, 01 Aug 2026 01:35:26 PM (IST)Updated Date: Sat, 01 Aug 2026 01:35:26 PM (IST)

पूजा-पाठ के लिए प्रातःकाल और ब्रह्म मुहूर्त को सही समय माना गया है। (AI जनरेटेड)

HighLights

  1. दोपहर 12:00 बजे से शाम 04:00 बजे तक सामान्य दैनिक पूजा करना वर्जित है
  2. कहा जाता है कि यह देवी-देवताओं के आराम करने का समय है
  3. पूजा-पाठ के लिए ब्रह्म मुहूर्त, प्रात काल और सूर्यास्त का समय उत्तम है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर देखा जाता है कि कई लोग दिनचर्या की व्यस्तता के कारण दोपहर में स्नान करके पूजा-पाठ करते हैं, तो वहीं कुछ विशेष अनुष्ठान दोपहर तक चलते रहते हैं। ऐसे में मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या दोपहर के समय पूजा करना सही है? शास्त्रों और वास्तु के अनुसार दोपहर में सामान्य पूजा-पाठ करने को लेकर कुछ स्पष्ट नियम बताए गए हैं।

क्या दोपहर में पूजा करना शुभ माना जाता है?

हिंदू धर्म और शास्त्रों के अनुसार, सामान्य पूजा का शुभारंभ दोपहर में करना वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दोपहर 12:00 बजे से शाम 04:00 बजे तक का समय देवी-देवताओं के विश्राम का समय होता है। यही कारण है कि इस दौरान प्रमुख मंदिरों के कपाट (पट) बंद कर दिए जाते हैं। मान्यता है कि इस समय पूजा करने से भगवान के विश्राम में विघ्न पड़ता है।

किन विशेष परिस्थितियों में दोपहर में हो सकती है पूजा?

शास्त्रों में कुछ विशेष परिस्थितियों और अनुष्ठानों के लिए दोपहर के समय की छूट दी गई है-

  • सुबह से चल रहा अनुष्ठान: यदि आपके घर में कोई मांगलिक कार्य या बड़ा अनुष्ठान सुबह से ही चल रहा है और वह दोपहर या शाम तक जारी रहता है, तो उसमें कोई दोष नहीं होता।
  • विशेष मुहूर्त (जैसे अभिजीत मुहूर्त): नवरात्रि में घटस्थापना या कुछ विशेष व्रतों का शुभ मुहूर्त दोपहर में पड़ता है। उदाहरण के लिए, सुबह का मुहूर्त छूटने पर दोपहर का अभिजीत मुहूर्त सबसे उत्तम माना जाता है।
  • दोष निवारण पूजा: कालसर्प दोष या राहुकाल से जुड़ी विशेष शांति पूजा यदि दोपहर के समय तय की गई हो, तो वह बाध्यता के तहत की जा सकती है।
  • मानसिक पूजा और नाम जप: दोपहर में आप भगवान की मूर्ति या मंदिर को स्पर्श किए बिना मानसिक रूप से अपने इष्टदेव का ध्यान, नाम जप या दूर से प्रणाम कर सकते हैं।

पूजा के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ और फलदायी समय कौन सा है?

शास्त्रों के अनुसार, दिन के तीन समय की गई पूजा सबसे अधिक फलदायी और पुण्य देने वाली मानी गई है:

  • ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 04:00 बजे से 05:30 बजे): सूर्योदय से लगभग डेढ़ से दो घंटे पहले का यह समय पूजा के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस समय वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा सबसे अधिक होती है और मन एकाग्र रहता है।
  • प्रात काल (सूर्योदय से सुबह 08:00 बजे तक): ब्रह्म मुहूर्त के बाद का यह समय भी पूजा के लिए बेहद शुभ होता है। इस समय देवी-देवता जाग्रत अवस्था में होते हैं। इस समय पूजा करने से आरोग्य, यश, बुद्धि और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय): सूर्यास्त के बाद संध्या समय मुख्य रूप से भगवान शिव और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए उत्तम माना जाता है। इस समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने और आरती करने से नकारात्मकता दूर होती है।
  • निशिता काल (मध्य रात्रि): देर रात या मध्य रात्रि का यह मुहूर्त विशेष मंत्र सिद्धि, तंत्र साधना और कालरात्रि/जन्माष्टमी जैसी विशेष रात्रियों की पूजा के लिए प्रयोग किया जाता है।
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