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भाई-बहन के रिश्ते तक ही सीमित नहीं है रक्षाबंधन, देवताओं से भी जुड़ा…क्या है इसका अनसुना इतिहास

भाई-बहन के रिश्ते तक ही सीमित नहीं है रक्षाबंधन, देवताओं से भी जुड़ा…क्या है इसका अनसुना इतिहास

रक्षाबंधन का पर्व केवल भाई-बहन के प्रेम तक सीमित नहीं है। यह सुरक्षा और पवित्रता के संकल्प का भी प्रतीक है। इंद्राणी और महर्षि दुर्वासा से जुड़ी इसकी …और पढ़ें

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari

Publish Date: Fri, 14 Aug 2026 11:02:50 AM (IST)Updated Date: Fri, 14 Aug 2026 11:02:50 AM (IST)

रक्षाबंधन के पावन पर्व के कई पौराणिक और धार्मिक महत्व हैं। (फाइल फोटो)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रक्षाबंधन का पर्व सिर्फ भाई-बहन के प्रेम और तोहफों के लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बहुत गहरा है। प्राचीन काल से ही यह पर्व सुरक्षा के संकल्प, भक्ति और पवित्रता का प्रतीक रहा है। हालांकि, समय के साथ इसका स्वरूप बदला है। आज यह मुख्य रूप से भाई-बहन के रिश्ते तक ही सिमट गया है।

रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं

  • ‘सलोनो’ और रक्षा सूत्र से जुड़ा इतिहास: प्राचीन काल में सावन महीने की पूर्णिमा को ‘सलोनो’ कहा जाता था। मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहले महर्षि दुर्वासा ने ग्रह-दोषों से बचाव के लिए रक्षासूत्र बांधने की परंपरा शुरू की थी। महाभारत काल में भी भगवान श्रीकृष्ण ने सुरक्षा के लिए रक्षासूत्र को बहुत जरूरी बताया था।

  • जब पत्नी ने पति को बांधी थी राखी: ऋग्वेद के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच युद्ध चल रहा था, तब देवराज इंद्र की जीत के लिए उनकी पत्नी इंद्राणी ने देवगुरु बृहस्पति के कहने पर इंद्र की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था। इसके प्रभाव से देवताओं को जीत मिली। यह प्रसंग दर्शाता है कि रक्षासूत्र केवल भाई-बहन के लिए ही नहीं था।
  • ब्राह्मणों और यजमानों की परंपरा: शास्त्रों में ब्राह्मणों द्वारा अपने यजमानों को अच्छे आचरण और मंगलकामना का संकल्प दिलाते हुए मौली (रक्षासूत्र) बांधने की पुरानी परंपरा रही है।
  • सावन मास और इसका आध्यात्मिक महत्व

    सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति का समय माना जाता है। इस महीने में रक्षाबंधन मनाने के पीछे दो मुख्य आध्यात्मिक कारण हैं-

    • पवित्रता का संकल्प: यह त्योहार मन की बुराइयों पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
    • विश्व बंधुत्व (भाईचारे) की भावना: आध्यात्मिक दृष्टि से सभी इंसान एक ही ईश्वर की संतान हैं। रक्षाबंधन हमें आपस में पवित्रता, सम्मान और भाईचारा बनाए रखने की सीख देता है।

    आज के दौर में इसका सच्चा संदेश

    आज के समय में रक्षाबंधन का स्वरूप थोड़ा औपचारिक और दिखावे वाला हो गया है, जहां ध्यान तोहफों और सजावटी राखियों पर ज्यादा रहता है।

    लेकिन जानकारों का मानना है कि आज के दौर में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्तियों और सामाजिक पतन को रोकने के लिए रक्षाबंधन के असली मतलब को समझना जरूरी है। रक्षाबंधन का सच्चा संदेश सिर्फ धागा बांधना नहीं, बल्कि रिश्तों में सच्चाई, पवित्र आचरण और एक-दूसरे की रक्षा करने का संकल्प लेना है।

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