Support Parmarth TV.  You can send any amount on our UPI Id: 9643218008m@pnb. 

National Weather Forecast: राजस्थान के 11 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी, कई राज्यों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट | Parmarth TV Petrol-Diesel Prices: देश के महानगरों में आज सुबह इतनी तय कर दी हैं दोनों ईंधनों की कीमतें | Parmarth TV LPG Prices: उपभोक्ताओं को मिली राहत, इतने तय हो गए हैं सिलेंडर के दाम | Parmarth TV BJP: भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी अस्पताल में भर्ती, सीने में बताया जा रहा इंफेक्शन | Parmarth TV RBI Rules: बैंक में कर्मचारियों का बर्ताव नहीं रहा आपके साथ सही तो कर सकते हैं यहां पर शिकायत | Parmarth TV LIC: बुढ़ापे की टेंशन होगी खत्म, बहुत ही शानदार है ये प्लान, जीवनभर मिलेगी पेंशन | Parmarth TV Petrol-Diesel Prices: अपडेट हो गई हैं दोनों ईंधनों की कीमतें, जयपुर, दिल्ली, मुंबई सहित प्रमुख शहरों में ये है रेट | Parmarth TV LPG Prices: जयपुर सहित देश के प्रमुख शहरों में आज ये हैं सिलेंडरों की कीमतें | Parmarth TV नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो की तरह इमरान खान भी छोड़ सकते हैं पाकिस्तान, सरकार बना रही दबाव | Parmarth TV इंटरनेट पर गलत कंटेंट होने के कारण बच्चों के लिए इस पर पूरी तरह पाबंदी लगाना सही नहीं: Supreme Court | Parmarth TV

मूर्ति नहीं, नाभिकमल चक्र की पूजा! कहीं चढ़नी पड़ती है 1000 सीढ़ियां, जानिए आरासना धाम और गुजरात के इस मंदिर का पौराणिक कनेक्शन

मूर्ति नहीं, नाभिकमल चक्र की पूजा! कहीं चढ़नी पड़ती है 1000 सीढ़ियां, जानिए आरासना धाम और गुजरात के इस मंदिर का पौराणिक कनेक्शन

राजस्थान का सिरोही जिला अरावली की पहाड़ियों के बीच बसे अपने प्राचीन और चमत्कारिक देवी मंदिरों के लिए जाना जाता है। यहां स्थित आरासना अंबा माता मंदिर म…और पढ़ें

Publish Date: Sun, 18 Oct 2026 11:39:07 AM (IST)Updated Date: Sun, 18 Oct 2026 11:39:07 AM (IST)

उमरनी का भद्रकाली मंदिर, जहां दो शेरों पर सवार हैं मां काली। (सोशल मीडिया)

धर्म डेस्क। राजस्थान का सिरोही जिला अरावली की प्राकृतिक वादियों के साथ-साथ अपने अति-प्राचीन, अलौकिक और रहस्यमयी शक्तिपीठों के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्थित आरासना अंबा माता, मातर माता, भद्रकाली (उमरनी) और मुखरी माता के मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और सांस्कृतिक विरासत के मुख्य केंद्र हैं।

इन मंदिरों में पारंपरिक प्रतिमा के स्थान पर ‘नाभिकमल’ पूजन से लेकर 21 किलोमीटर लंबी रहस्यमयी गुफा और 2 शेरों पर सवार मां भद्रकाली के दर्शन होते हैं।

आइए जानते हैं सिरोही के इन 4 अनोखे देवी मंदिरों की प्रामाणिक और पौराणिक कथाएं-

1. आरासना अंबा माता मंदिर (नाभिकमल रूपी चक्र पूजन)

  • स्थान और विशेषता: पिंडवाड़ा के पास स्थित यह मंदिर विश्वप्रसिद्ध दांता अंबाजी शक्तिपीठ से सीधा सम्बंध रखता है। इतिहासकारों के अनुसार, यहां मां की किसी पारंपरिक मूर्ति के स्थान पर देवी के नाभिकमल रूपी चक्र की पूजा की जाती है।

  • पौराणिक कथा: मान्यता है कि आरासुर नामक नरभक्षी राक्षस का वध करने के कारण मां को ‘आरासुरी देवी’ कहा गया।
  • दांता रियासत से सम्बंध: लोककथा के अनुसार, दांता के राजा की भक्ति से प्रसन्न होकर मां उनके साथ चल पड़ीं, लेकिन शर्त यह थी कि राजा पीछे मुड़कर नहीं देखेंगे। दांता की सीमा पर राजा ने पीछे देख लिया और देवी वहीं ठहर गईं (जहां आज गुजरात का अंबाजी धाम स्थित है)। इसलिए आरासना और अंबाजी को एक ही दिव्य शक्ति के दो रूप माना जाता है।
  • 2. मातर माता मंदिर (1,000 सीढ़ियां और देवड़ा राजवंश की वंशवृद्धि)

    • स्थान और स्वरूप: सिरोही के सिरणवा पर्वत पर स्थित इस प्राचीन मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 1,000 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मातर माता को आबूराज की अधिष्ठात्री ‘अर्बुदा देवी’ का ही स्वरूप माना जाता है।
    • देवड़ा राजवंश का वरदान: वर्ष 1206 में जालोर से निर्वासित शासक मानिक्यराय ने बरलूट को राजधानी बनाया था। नि:संतान मानिक्यराय को मातर माता के आशीर्वाद से पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसके बाद से देवड़ा राजवंश की वंशवृद्धि और राज्य की स्थिरता के लिए माता की आराधना की जाने लगी।

    3. भद्रकाली मंदिर, उमरनी (2 शेरों पर सवार माता और 8,000 वर्ष पुराना इतिहास)

    • स्थान और अनोखी प्रतिमा: आबूरोड से 5 किलोमीटर दूर उमरनी गांव की पहाड़ियों में स्थित यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां मां भद्रकाली/काली दो शेरों पर सवार होकर दर्शन देती हैं।
    • राजा अम्बरीष की तपस्या: मान्यतानुसार, इस धाम का इतिहास लगभग 8,000 वर्ष पुराना है। यहां परम ज्ञानी तपस्वी राजा अम्बरीष ने घोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर मां कल्याणी रूप में प्रकट हुईं। राजा के अनुरोध पर मां इसी अद्वितीय स्वरूप में यहां विराजमान हुईं। अब तक यहां तीन बार भव्य मंदिरों का जीर्णोद्धार और निर्माण हो चुका है।

    4. मुखरी माता मंदिर (21 किमी लंबी रहस्यमयी गुफा और मोर-मोरनी समाधि)

    • 21 किमी लंबी गुफा: माउंट आबू के प्रवेश द्वार पर स्थित इस प्राकृतिक पहाड़ी मंदिर के भीतर करीब 21 किलोमीटर लंबी संकरी गुफा है। मान्यता है कि इस गुफा का दूसरा छोर माउंट आबू स्थित प्रसिद्ध ‘अधर देवी मंदिर’ के पास निकलता है। (सुरक्षा कारणों से वर्तमान में गुफा पर द्वार लगाकर इसे बंद रखा गया है)।
    • मोर-मोरनी की समाधि: मंदिर परिसर में एक मोर-मोरनी के जोड़े से जुड़ी भावुक कथा प्रसिद्ध है। इस जोड़े ने मंदिर में वर्षों तक जप-तप कर एक साथ अपने प्राण त्यागे थे। भक्तों ने उन्हें परिसर में समाधि देकर उनका स्मारक मंदिर बनवाया।

    नवरात्रि में उमड़ती है अपार भीड़

    शारदीय नवरात्रि के दौरान इन सभी चारों धामों में विशेष अनुष्ठान, घटस्थापना और विशाल मेलों का आयोजन होता है, जहां राजस्थान, गुजरात और देश भर से हजारों पर्यटक और श्रद्धालु मां भगवती के चमत्कारी स्वरूपों के दर्शन करने पहुंचते हैं।

    Trending News