हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष शनि जयंती का पर्व बेहद खास और फलदायी होने जा रहा है। ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाने वाली शनि जयंती इस बार 1 …और पढ़ें
Publish Date: Sat, 02 May 2026 06:02:12 PM (IST)Updated Date: Sat, 02 May 2026 06:02:12 PM (IST)
HighLights
- शनिवार के दिन बन रहा दुर्लभ संयोग
- 16 मई को मनाई जाएगी शनि जयंती
- देवता को प्रसन्न करने के अचूक उपाय
धर्म डेस्क। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष शनि जयंती का पर्व बेहद खास और फलदायी होने जा रहा है। ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाने वाली शनि जयंती इस बार 16 मई 2026 को पड़ रही है। इस वर्ष का सबसे बड़ा संयोग यह है कि यह जयंती स्वयं शनिवार के दिन ही है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में एक अत्यंत शुभ और दुर्लभ ‘महायोग’ माना जा रहा है।
तिथि और शुभ मुहूर्त
शनि देव की कृपा पाने के लिए इस बार भक्तों को लंबा समय मिलेगा। अमावस्या तिथि और शुभ योगों का विवरण इस प्रकार है:
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 मई, प्रातः 5:11 बजे से।
- अमावस्या तिथि समापन: 17 मई, देर रात 1:30 बजे तक।
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:07 से 4:48 तक (साधना के लिए श्रेष्ठ समय)।
- सौभाग्य योग: सुबह 10:26 बजे तक।
- शोभन योग: 16 मई से शुरू होकर 17 मई की सुबह 6:15 बजे तक।
न्याय के देवता का आध्यात्मिक महत्व
शनि देव को ब्रह्मांड का मुख्य न्यायाधीश या ‘न्याय का देवता’ माना जाता है। वे किसी भी व्यक्ति को उसके अच्छे और बुरे कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि जयंती का दिन सोए हुए भाग्य को जगाने का एक ‘गोल्डन चांस’ होता है। इस दिन सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा न केवल जीवन के संघर्षों को कम करती है, बल्कि अटूट समृद्धि और मानसिक शांति का मार्ग भी प्रशस्त करती है।
साढ़ेसाती और ढैय्या से पीड़ित जातकों के लिए वरदान
ज्योतिषियों के अनुसार, जिन जातकों की कुंडली में वर्तमान में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उनके लिए यह दिन किसी वरदान से कम नहीं है। शनिवार को पड़ने वाली शनि जयंती पर किए गए विशेष उपाय कष्टों की तीव्रता को कम कर देते हैं और नकारात्मक प्रभावों को शांत करते हैं।
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कैसे पाएं शनि देव की कृपा?
- तैलाभिषेक: शनि देव की प्रतिमा पर सरसों का तेल अर्पित करें। माना जाता है कि इससे शनि दोष तत्काल शांत होते हैं।
- दान का महत्व: इस दिन काली उड़द, काले तिल, लोहे के बर्तन और अनाज का दान करना विशेष फलदायी है।
- पीपल पूजा: संध्या काल में पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं।
- मंत्र जप: ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप और शनि चालीसा का पाठ करने से जीवन के समस्त क्लेश दूर होते हैं।
- यज्ञ और उपवास: ग्रह शांति के लिए इस दिन हवन करना और उपवास रखकर शनि मंदिरों के दर्शन करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। नईदुनिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। नईदुनिया अंधविश्वास के खिलाफ है।







