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शिव के श्राप से उनाकोटी के पत्थर बने देवी-देवता, लेकिन मूर्ति संख्या एक करोड़ से एक कम…जानें इस पर्वत का रहस्य

शिव के श्राप से उनाकोटी के पत्थर बने देवी-देवता, लेकिन मूर्ति संख्या एक करोड़ से एक कम…जानें इस पर्वत का रहस्य

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari

Publish Date: Fri, 24 Jul 2026 05:17:52 PM (IST)Updated Date: Fri, 24 Jul 2026 05:17:52 PM (IST)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत में कई ऐसे प्राचीन धार्मिक स्थल हैं, जो अपनी वास्तुकला और रहस्यमयी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध हैं। इन्हीं में से एक है त्रिपुरा का उनाकोटी। इस स्थान को लेकर सबसे चर्चित मान्यता यह है कि यहां 99 लाख 99 हजार 999 पत्थर की मूर्तियां हैं, यानी एक करोड़ से सिर्फ एक कम। इसे लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।

कहां स्थित है उनाकोटी?

उनाकोटी त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से करीब 145 किलोमीटर दूर स्थित एक प्राचीन धार्मिक स्थल है। यहां पहाड़ियों को काटकर बनाई गई भगवान शिव और अन्य देवी-देवताओं की विशाल शैल-प्रतिमाएं (रॉक-कट स्कल्पचर) देखने को मिलती हैं।

‘उनाकोटी’ का अर्थ ही होता है ‘एक करोड़ से एक कम’, इसलिए इस स्थान का नाम भी इसी मान्यता से जोड़ा जाता है।

क्यों माना जाता है रहस्यमयी?

घने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्र के बीच स्थित उनाकोटी लंबे समय से इतिहासकारों के लिए रिसर्च का विषय रहा है। आज भी यह स्पष्ट नहीं है कि इन विशाल शैल प्रतिमाओं का निर्माण किसने कराया, कब कराया और इन्हें बनाने का उद्देश्य क्या था। हालांकि, इतिहासकार इन्हें कई शताब्दियों पुरानी कलाकृतियां मानते हैं।

भगवान शिव के श्राप की कथा

लोकमान्यताओं के अनुसार, एक बार भगवान शिव एक करोड़ देवी-देवताओं के साथ यात्रा पर निकले थे। रास्ते में उन्होंने उनाकोटी में रात बिताई। भगवान शिव ने सभी से सूर्योदय से पहले उठने को कहा था, लेकिन सुबह केवल शिव ही जागे। बाकी सभी देवी-देवता सोते रह गए। इससे क्रोधित होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्थर बनने का श्राप दे दिया।

मान्यता है कि इसी कारण यहां 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियां हैं और भगवान शिव अकेले आगे बढ़ गए, इसलिए संख्या एक करोड़ से एक कम रह गई।

शिल्पकार कालू की कथा भी है प्रचलित

एक अन्य लोककथा के अनुसार, कालू नामक एक शिल्पकार भगवान शिव और माता पार्वती के साथ कैलाश जाना चाहता था। भगवान शिव ने उससे कहा कि अगर वह एक ही रात में एक करोड़ देवी-देवताओं की मूर्तियां बना देगा, तो उसे अपने साथ कैलाश ले जाएंगे। पूरी रात मेहनत करने के बावजूद सुबह गिनती में एक मूर्ति कम निकली। इसी कारण शिल्पकार की इच्छा पूरी नहीं हो सकी और इस स्थान का नाम उनाकोटी पड़ गया।

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