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15 जुलाई से गजकेसरी योग और बुध पुष्य नक्षत्र में शुरू होंगे गुप्त नवरात्र, तंत्र-मंत्र सिद्धि से होगा चमत्कार

15 जुलाई से गजकेसरी योग और बुध पुष्य नक्षत्र में शुरू होंगे गुप्त नवरात्र, तंत्र-मंत्र सिद्धि से होगा चमत्कार

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। पंचांग की गणना के अनुसार 15 जुलाई को गजकेसरी योग में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्र का आरंभ होगा। विशेष यह है कि इस दिन बुध पुष्य नक्षत्र की साक्षी भी रहेगी।

ज्योतिष के जानकारों के अनुसार गुप्त नवरात्र की घट स्थापना के दिन योग और नक्षत्र का ऐसा महासंयोग सालों में बनता है। ऐसे शुभ दिन देवी आराधना की शुरुआत करना साधक, आराधक को पूर्ण फल प्रदान करने वाली मानी गई है।

ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर 15 जुलाई बुधवार से गुप्त नवरात्र का आरंभ होगा। इस दिन पुष्य नक्षत्र, हर्षल उपरांत व्रज योग, बव करण तथा कर्क राशि के चंद्रमा की साक्षी रहेगी।

तिथि, वार, योग, नक्षत्र व करण की यह श्रेष्ठ स्थिति गजकेसरी योग का निर्माण कर रही है। नक्षत्र की दृष्टि से भी यह दिन सर्वोत्तम है तथा इसकी शुभता और बढ़ गई है। नवरात्र के नौ दिन में वैदिक तंत्र, मंत्र तथा यंत्र की सिद्धि के लिए इस दिन से आदि शक्ति मां दुर्गा की साधना, आराधना शुरु करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा।

वर्षभर में चार नवरात्र विशेष

पं.डब्बावाला ने बताया कि श्रीमद् देवी भागवत में वर्षभर में चार नवरात्र बताए गए हैं। इनमें दो नवरात्र गुप्त तथा दो प्राकट्य कहे गए हैं। धर्मशास्त्र के अनुसार माघ व आषाढ़ मास के नवरात्र गुप्त तथा चैत्र व अश्विन मास के नवरात्र को प्राकट्य नवरात्र माना जाता है। गुप्त नवरात्र तंत्र, मंत्र तथा यंत्र की सिद्धि के लिए विशेष माने जाते हैं। इनमें साधक गुप्त साधना करते हैं, जबकि प्राकट्य नवरात्र में साधक और गृहस्थ दोनों देवी की आराधना करते हैं।

दो सर्वार्थ सिद्धि योग और तीन रवि योग

गुप्त नवरात्र में दो सर्वार्थ सिद्धि योग और तीन रवि योग का संयोग रहेगा। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार इन योगों में विशेष कार्य संपादित किए जाते हैं। इस प्रकार के योग में बैंकिंग, टेक्नोलाजीआदि से जुड़े कार्यों की शुरुआत भी की जा सकती है। विशिष्ट साधना के लिए योगों का बड़ा महत्व बताया जाता है।

16 को सूर्य का कर्क में प्रवेश

16 जुलाई को रात्रि में सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश होगा। कर्क राशि का अधिपति चंद्रमा है, जब सूर्य चंद्र की राशि कर्क में प्रवेश करते हैं तो वर्षा ऋतु की स्थिति में सुधार आता है। दक्षिण पश्चिम से जुड़े मानसून का विशेष प्रभाव देखा जाएगा। इस दौरान वर्षा ऋतु का प्रबल दर्शन होगा।

22 को भड्डाली नवमी गुप्त नवरात्रि पूर्ण

22 जुलाई बुधवार को गुप्त नवरात्र पूर्ण होंगे। इसी दिन भड्डाली नवमी का भी पर्व रहेगा यह नवमी अबूझ मुहूर्त की श्रेणी में मानी जाती है। इस दौरान विशेष कार्य किए जा सकते हैं। हालांकि गुरु का तारा अस्त होने के कारण विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं होंगे।

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