धर्म डेस्क। इस बार ज्येष्ठ मास में चार नहीं आठ मंगल पड़ेंगे। पांच मई को पहला मंगल शुरू होगा। शिव-शनि हनुमान मंदिर के पुजारी पं बालकृष्ण शास्त्री के अनुसार इस साल ज्येष्ठ का महीना दो मई से लेकर 29 जून तक रहेगा।
अधिक मास के कारण ज्येष्ठ माह पूरे 59 दिन का होगा। 19 साल बाद यह संयोग बन रहा है। इससे पहले 2007 में ज्येष्ठ मास में आठ मंगल पड़े थे।
धार्मिक दृष्टि से अधिक मास को बहुत पवित्र माना जाता है
गौरतलब है कि अधिक मास जिसे मलमास भी कहा जाता है हिंदू पंचांग का एक विशेष महीना होता है। यह तब जोड़ा जाता है जब चंद्र वर्ष लगभग 354 दिन और सौर वर्ष लगभग 365 दिन के बीच का अंतर बढ़ जाता है।
इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर ढाई से तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। धार्मिक दृष्टि से अधिक मास को बहुत पवित्र माना जाता है। इस महीने में विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते।
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इस बार ज्येष्ठ मास दो महीने का, ऐसे होंगे शुभ मंगल योग
ज्येष्ठ मास 2 मई से शुरू हो रहा है। अतिरिक्त मास 29 जून तक चलेगा। इस दौरान पड़ने वाले सभी 8 बड़े मंगल की सूची इस प्रकार है।
पहला बड़ा मंगलः 5 मई
दूसरा बड़ा मंगलः 12 मई
तीसरा बड़ा मंगलः 19 मई
चौथा बड़ा मंगलः 26 मई
पांचवां बड़ा मंगलः 2 जून
छठा बड़ा मंगलः 9 जून
सातवां बड़ा मंगलः 16 जून
आठवां बड़ा मंगलः 23 जून को मनाया जाएगा।
ऐसे बन रहा है महासंयोग
इस दुर्लभ संयोग का मुख्य कारण वर्ष 2026 में होने वाला अधिक मास पुरुषोत्तम मास है। इससे ज्येष्ठ का पूरा महीना लगभग 60 दिनों यानी 2 महीने का होगा। इसी अतिरिक्त समय के कारण इस पावन महीने में मंगलवारों की संख्या दोगुनी 8 हो गई है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ मास के मंगलवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व है। भक्त इन दिनों विशेष रूप से भंडारे आयोजित करते हैं और बजरंगबली के वृद्ध स्वरूप बुढ़वा मंगल की उपासना करते हैं। ज्योतिषविदों का मानना है कि जेठ मास में पूजन-हवन और आराधना से विशेष लाभ मिलेगा।







