धर्म डेस्क। ज्योतिष शास्त्र में सबसे न्यायप्रिय और प्रभावशाली ग्रह माने जाने वाले शनि देव 26 जुलाई से वक्री होने जा रहे हैं। इसका अर्थ यह है कि इस दिन से शनि देव की उल्टी चाल (आभासी गति) प्रारंभ हो जाएगी, जो आने वाले लगभग 140 दिनों तक जारी रहेगी। कर्म, धर्म और न्याय के स्वामी शनि ग्रह की इस बदली चाल का व्यापक असर न केवल सभी 12 राशियों के जातकों पर, बल्कि देश-विदेश के घटनाक्रमों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
इन राशियों को बरतनी होगी विशेष सावधानी
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, शनि के वक्री होने की इस अवधि में मेष राशि वाले लोगों को मानसिक तनाव और अनिद्रा या चिंता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इन जातकों को अत्यधिक सोचने-विचारने से बचने की सलाह दी जाती है। वहीं दूसरी ओर, मीन राशि के जातकों को कोई भी फैसला जल्दबाजी में लेने से बचना चाहिए और धैर्य व शांति के साथ कदम उठाने चाहिए।
वृषभ, सिंह और मकर राशि के लिए खुलेंगे प्रगति के द्वार
शनि देव की यह उल्टी चाल वृषभ, सिंह और मकर राशि के जातकों के लिए बेहद शुभ और लाभदायक साबित हो सकती है। इस दौरान इन राशियों से जुड़े लोगों को कार्यक्षेत्र में सफलता, करियर में नई ऊंचाइयां और पूर्व में रुकी हुई योजनाओं में सकारात्मक गति मिलने की प्रबल संभावना है।
वैश्विक कूटनीति और भारत पर असर
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, शनि ग्रह अमूमन 135 से 140 दिनों के भीतर अपनी चाल में परिवर्तन लाते हैं। उन्होंने बताया कि इस बार शनि का वक्री होना अंतरराष्ट्रीय राजनीति, कूटनीतिक समझौतों और विदेश नीतियों में बड़े बदलावों की वजह बन सकता है।
दुनिया भर के देश अपनी आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और राष्ट्रीय संसाधनों को मजबूत करने पर विशेष जोर देंगे। जहाँ तक भारत की बात है, तो यह समय देश के लिए अनुसंधान, वैज्ञानिक खोजों और नई राष्ट्रीय उपलब्धियों के दृष्टिकोण से अत्यंत अनुकूल रहने वाला है।
प्राकृतिक असंतुलन की जताई जा रही संभावना
ज्योतिषीय मान्यताओं और ग्रहों के प्रभाव का विश्लेषण करें तो इस अवधि में देश-दुनिया के कुछ हिस्सों में भारी वर्षा, भूस्खलन तथा भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह से ज्योतिषीय दृष्टिकोण है और इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता।
क्या वास्तव में उल्टी दिशा में चलने लगते हैं शनि?
खगोल विज्ञान (Astronomy) के सिद्धांतों के अनुसार, कोई भी ग्रह वास्तव में पीछे की ओर गति नहीं करता। चूंकि पृथ्वी सूर्य के ज्यादा नजदीक है, इसलिए वह अपनी कक्षा में शनि ग्रह से अधिक तीव्र गति से चक्कर लगाती है। जब पृथ्वी अपनी परिक्रमा के दौरान शनि को पीछे छोड़ती है (ओवरटेक करती है), तब पृथ्वी से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो शनि उलटी दिशा में बढ़ रहा हो। इसी दृष्टि संबंधी भ्रम (आभासी स्थिति) को ज्योतिष में ‘वक्री’ होना कहा जाता है।
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शनि के प्रतिकूल प्रभावों से बचाव के अचूक उपाय
ज्योतिष शास्त्र में शनि के वक्र दृष्टि से बचने और शुभ फलों की प्राप्ति के लिए कुछ प्रमुख धार्मिक उपाय बताए गए हैं:
- मंत्र जाप: प्रत्येक शनिवार को “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- हनुमान उपासना: प्रतिदिन अथवा शनिवार को नियमपूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- स्तोत्र पाठ: शनि देव की प्रसन्नता के लिए शनि स्तोत्र एवं शनि कवच का नियमित पाठ करना लाभदायक होता है।
- दान-पुण्य: असहाय और जरूरतमंद लोगों को काले तिल, काली उड़द, सरसों का तेल, काले जूते या छाते का दान करें।
- दीपदान व सेवा: शनिवार को शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं और निर्धन व्यक्तियों को भोजन कराएं।







