इस वर्ष होलाष्टक 24 फरवरी से लेकर 3 मार्च तक लगेगा। इस दौरान आठ ग्रह अपने उग्र स्वभाव में रहेंगे। ऐसे में आराध्य का पूजन लोगों के लिए हितकर होगा। …और पढ़ें
Publish Date: Tue, 24 Feb 2026 04:39:40 AM (IST)Updated Date: Tue, 24 Feb 2026 04:45:35 AM (IST)
HighLights
- होलाष्टक का समापन होली दहन के साथ होगा
- इस दौरान शुभ कार्यों पर विराम लगा रहेगा
- नकारात्मक उर्जा से बजने के लिए पूजा-अर्चना करें
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी यानि मंगलवार से आठ दिनी होलाष्टक Holastsak 2026 लगेगा जो 3 मार्च तक रहेगा। इस दौरान शुभ कार्य जैसे नामकरण संस्कार, विवाह, सगाई सहित सोलह संस्कारों पर विराम लगेगा। इन आठ दिनों में नया वाहन, प्रापटी आदि खरीदने से भी बचने की हिदायत दी जाती है।
होलाष्टक का समापन होली दहन के साथ 2 मार्च को संपन्न होगी। मान्यता है कि इस दौरान नकारात्मक उर्जा से बजने के लिए आराध्य की भक्ति और हवन-पूजन लाभ दायक होता है। इस दौरान सभी ग्रह अपने उग्र स्वभाव में होते है।
ज्योर्तिविद् गुलशन अग्रवाल के अनुसार होलाष्टक (Holastsak) 24 फरवरी को सुबह 7:04 मिनट पर लगेगा। इस दौरान सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, राहु सहित आठ ग्रह उग्र स्वभाव में रहते हैं। होलाष्टक में भगवान विष्णु, शिव, हनुमान और भक्त की पूजा करना चाहिए।
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होलिका दहन की तीथि को लेकर मतभेद
शंकराचार्य मठ इंदौर के अधिष्ठाता डॉ. गिरीशानंदजी महाराज ने बताया कि इस वर्ष होलिका दहन को लेकर अनेक क्षेत्रों में 2 और 3 मार्च को लेकर मतभेद की स्थिति बनी हुई है। लेकिन शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन 2 मार्च पूर्णिमा को अर्धरात्रि में 1 से 2 बजे के बीच भद्रा पुच्छकाल में किया जाना शास्त्र सम्मत है।
होलिका दहन के दूसरे दिन यानी 3 मार्च को अधिकांश स्थानों में परंपरा के अनुसार होली खेली जाएगी, लेकिन 3 तारीख को चंद्र ग्रहण के कारण बहुत से स्थानों पर 4 मार्च को होली खेली जाएगी।







