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Mahabharata Story: 100 पुत्रों की मृत्यु का बदला लेना चाहते थे धृतराष्ट्र, भीम के लिए रचा था घातक षड्यंत्र; ऐसे टाली बड़ी अनहोनी

Mahabharata Story: 100 पुत्रों की मृत्यु का बदला लेना चाहते थे धृतराष्ट्र, भीम के लिए रचा था घातक षड्यंत्र; ऐसे टाली बड़ी अनहोनी

Mahabharata Hindu Mythology: महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद धृतराष्ट्र अपने पुत्रों की मृत्यु का प्रतिशोध लेना चाहते थे। …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 01 Jun 2026 03:59:12 PM (IST)Updated Date: Mon, 01 Jun 2026 03:59:12 PM (IST)

महाभारत युद्ध के बाद धृतराष्ट्र ने रची थी भीम को मारने की योजना (AI Generated Image)

HighLights

  1. श्रीकृष्ण ने धृतराष्ट्र की योजना समझ ली
  2. धृतराष्ट्र के मन में प्रतिशोध की आग थी
  3. सत्य जानकर धृतराष्ट्र को हुआ पश्चाताप

धर्म डेस्क, नईदुनिया। महाभारत युद्ध में कौरवों की पराजय और पांडवों की विजय के बाद हस्तिनापुर में युद्धोत्तर औपचारिकताएं पूरी की जा रही थीं। हालांकि, अपने 100 पुत्रों की मृत्यु से दुखी और आक्रोशित धृतराष्ट्र के मन में प्रतिशोध की भावना अभी भी जीवित थी। विशेष रूप से दुर्योधन और दुशासन के वध ने उनके हृदय में गहरा आघात पहुंचाया था।

भीम के प्रति था सबसे अधिक क्रोध

युद्ध के दौरान भीम ने अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा करते हुए धृतराष्ट्र के अधिकांश पुत्रों का वध किया था। उन्होंने गदा युद्ध में दुर्योधन की जंघा तोड़ी थी और दुशासन का भी अंत किया था। इसी कारण धृतराष्ट्र के मन में भीम के प्रति सबसे अधिक रोष था।

आशीर्वाद के बहाने रचा गया षड्यंत्र

युद्ध समाप्ति के बाद युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव माता गांधारी तथा धृतराष्ट्र का आशीर्वाद लेने पहुंचे। धृतराष्ट्र ने अपने मन की कटुता को छिपाते हुए पांडवों का स्वागत किया और एक-एक कर उन्हें गले लगाने लगे। लेकिन उनके मन में भीम के लिए अलग ही योजना चल रही थी।

श्रीकृष्ण ने समय रहते समझी मंशा

भगवान श्रीकृष्ण धृतराष्ट्र के मन में चल रहे विचारों को समझ चुके थे। उन्हें ज्ञात था कि धृतराष्ट्र के शरीर में दस हजार हाथियों के बराबर बल है। जब भीम को गले लगाने की बारी आई, तब श्रीकृष्ण ने सावधानी बरतते हुए भीम को पीछे कर दिया और उनकी जगह भीम के समान आकार की लोहे की प्रतिमा आगे कर दी।

क्रोध में तोड़ दी लोहे की प्रतिमा

धृतराष्ट्र ने यह समझकर कि सामने भीम खड़े हैं, उन्हें अपनी बाहों में जकड़ लिया। वर्षों से मन में संचित क्रोध उस क्षण फूट पड़ा और उन्होंने पूरी शक्ति से प्रतिमा को दबोच लिया। परिणामस्वरूप मजबूत लोहे की प्रतिमा भी टूटकर नष्ट हो गई।

सच सामने आने पर हुआ पश्चाताप

प्रतिमा टूटने के बाद धृतराष्ट्र को लगा कि उन्होंने भीम का वध कर दिया है। जैसे ही उनका क्रोध शांत हुआ, उन्हें अपने कृत्य पर गहरा पछतावा होने लगा। तब श्रीकृष्ण ने उन्हें बताया कि भीम सुरक्षित हैं और जिसे उन्होंने नष्ट किया, वह केवल लोहे की प्रतिमा थी। इसके बाद भीम को उनके सामने लाया गया। धृतराष्ट्र का क्रोध समाप्त हो चुका था और उन्होंने भीम को गले लगाकर आशीर्वाद दिया।

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