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जयपुर। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला से मारपीट के मामले में एफआईआर दर्ज नहीं होने पर कांग्रेस नेताओं ने जयपुर कमिश्नरेट में धरना दिया। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, विधायक रफीक खान सहित कई कांग्रेस नेता शामिल हुए। इस संबंध मे अशोक गहलोत ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि न्याय मिलने तक हम चुप नहीं बैठेंगे। भाजपा सरकार बताए कि एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों हो रही है?
गहलोत ने रितु बराला की जीरो एफआईआर दर्ज न होने पर गहलोत ने एक्स के माध्यम से कहा कि मेरे वक्त में मैंने एक बहुत बड़ा फैसला किया था कंपल्सरी एफआईआर, का , इतना बड़ा फायदा होगा जो गरीब है, दलित है, पिछड़े हैं, उनको थाने में जा के एफआईआर दर्ज करवाने की कोई तकलीफ नहीं आई थी और थानेदार नहीं करेगा तो एसपी करता, एसपी ऑफिस करता। इतना बड़ा हमने निर्णय किया, इनको पूछो कि तुमने वो हटाया क्यों? हटाने से अब क्या हुआ है? हटाने के बाद में ऐसी स्थिति बन गई है, धक्के खा रहे हैं वहां पर! जिसका रेप हुआ है, उसको कह रहे हैं तुम समझौता कर लो, जिससे रेप किया उससे। तो यह जो स्थिति बनी है, उसी कारण से तमाम तरह से यह गड़बड़ हो रही है।
गहलोत ने कहा कि अगर कंपल्सरी एफआईआर की होती, यह नौबत ही नहीं आती, ना धरना देते, एफआरआई दर्ज हो जाती। तफ्तीश तो पुलिस को करनी होती है ना, एफआईआर दर्ज करने में क्या तकलीफ है? कोई किसी को प्रॉब्लम है, अब कर लीजिए, अगर आपको लगे भई इस एफआईआर में कोई दम नहीं, तफ्तीश आप कर रहे हो, एफअआर लगानी है या चार्जशीट बन सकती है, चार्जशीट पेश करनी है ये बाद की बातें हैं।
सरकार के दिलों-दिमाग के अंदर विपक्ष के प्रति कोई सम्मान नहीं
गहलोत ने कहा कि सरकार के दिलों-दिमाग के अंदर विपक्ष के प्रति कोई सम्मान नहीं है! केंद्र में यही हो रहा है, मोदी के राज में। अगर सम्मान होता तो राहुल गांधी को, खड़गे साहब को सम्मान मिलता पार्लियामेंट के अंदर भी और बाहर भी। आप देख रहे हो क्या स्थिति है।
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