गुप्त नवरात्र देवी भक्तों के लिए फलदायी माने जाते हैं, जहां साधक देवी को प्रसन्न करने के लिए नौ दिन का व्रत करते हैं।
Publish Date: Tue, 14 Jul 2026 03:34:35 PM (IST)Updated Date: Tue, 14 Jul 2026 03:35:30 PM (IST)
HighLights
- सुबह 6:01 बजे से शुरू होगा शुभ मुहूर्त
- दस महाविद्याओं और गुप्त रूपों की साधना
- कलश स्थापना और सरल पूजा विधि
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। आषाढ़ गुप्त नवरात्र 15 जुलाई बुधवार से प्रारंभ हो रहे हैं। इस अवसर पर घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाएगी। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह छह बजकर एक मिनट से 10 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। इस दौरान मिट्टी के पात्र में जौ बोकर, उसके ऊपर कलश स्थापित किया जाता है। वर्ष में चार नवरात्र होते हैं, जिनमें से दो गुप्त नवरात्र माने जाते हैं। गुप्त नवरात्र देवी भक्तों के लिए फलदायी माने जाते हैं, जहां साधक देवी को प्रसन्न करने के लिए नौ दिन का व्रत करते हैं।
शक्ति और ऊर्जा का होता है आह्वान
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा के अनुसार, गुप्त नवरात्रि में घटस्थापना मां दुर्गा की शक्ति और ऊर्जा का आह्वान करने के लिए की जाती है। इस दौरान मां के ‘गुप्त’ रूपों और दस महाविद्याओं की साधना की जाती है, जिससे पूजा में सकारात्मक ऊर्जा और एकाग्रता बनी रहती है। गुप्त नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों और दस महाविद्याओं की पूजा गोपनीय तरीके से की जाती है, जिससे साधना की शक्ति और प्रभाव बढ़ जाता है।
ब्रह्मांड की ऊर्जा का प्रतीक है कलश की स्थापना
कलश की स्थापना ब्रह्मांड की ऊर्जा का प्रतीक है। यह विशेष रूप से तांत्रिकों, अघोरियों और आध्यात्मिक साधकों के लिए होती है। घटस्थापना के माध्यम से साधक ध्यान और मंत्र जाप द्वारा गुप्त सिद्धियों की प्राप्ति का संकल्प लेते हैं। कलश को जल और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, जो साधक को देवी की कृपा प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करता है।
कलश के मुख पर लगाएं आम के 5 पत्ते लगाएं
पूजा विधि के अनुसार, पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल छिड़कें और एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। माता दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। एक मिट्टी या पीतल के कलश में पवित्र जल भरें, उसमें हल्दी, सिक्का, सुपारी और अक्षत डालें। कलश के मुख पर आम या अशोक के 5 पत्ते लगाएं। इसके बाद एक जटा वाले नारियल पर लाल चुनरी लपेटें और उसे कलश के ऊपर रखें। पूजा में गणेश जी की पूजा के साथ शुरुआत करें और माता रानी को श्रृंगार का सामान अर्पित करें। साधक अपनी साधना को गुप्त रखते हुए “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै” मंत्र का जाप करें। गृहस्थ लोग सामान्य पूजा कर सकते हैं, जबकि तांत्रिक गुप्त मंत्रों द्वारा सिद्धि प्राप्त करते हैं।







