साधकों के लिए यह समय तंत्र-मंत्र और आत्मिक साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।इस अवसर पर शहर के माता मंदिर विभिन्न पूजन-अनुष्ठान होंगे। पुजारी गुलश…और पढ़ें
Publish Date: Tue, 14 Jul 2026 11:02:04 AM (IST)Updated Date: Tue, 14 Jul 2026 11:02:04 AM (IST)
HighLights
- मानसिक जप एवं रात्रि साधना का अवसर आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्र कल से
- सर्वार्थ सिद्धि के संयोग में शुरु होगी साधना, भड़ली नवमी पर रहेगा अबूझ मुहूर्त
- काली मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, हरसिद्धि मंदिर में होंगे विशेष अनुष्ठान
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इस वर्ष मां दुर्गा के दस रूप दस महाविद्या की साधना का आषाढ़ माह की नवरात्र पर्व 15 जुलाई से होगा।
वर्ष में आने वाली चार नवरात्र में से दो गुप्त नवरात्र में बाहरी उत्सव के बजाय मानसिक जप और रात्रि साधना का विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिर्विदों के अनुसार तंत्र साधना के लिए विशेेष माने जाने वाले पर्व में चतुर्थी तिथि का क्षय होने के कारण इस बार नवरात्रि 9 के बजाय केवल 8 दिनों की होगी।इस दौरान बन रहे शुभ संयोग इसकी महत्ता को कई गुना बढ़ा रहे हैं।
साधकों के लिए यह समय तंत्र-मंत्र और आत्मिक साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।इस अवसर पर शहर के माता मंदिर विभिन्न पूजन-अनुष्ठान होंगे। पुजारी गुलशन अग्रवाल के अनुसार काली मंदिर खजराना में माता गुप्त साधना की जाएगी। नवमी पर विशेष पूजन और अनुष्ठान होगा।
काली माता मंदिर विजय नगर शतचंडी यज्ञ किया जाएगा। माताजी का विशेष श्रृंगार, एवं हर दिन महाआरती और रात में मंत्र-जप व शक्ति साधना के विशेष प्रबंध रहेंगे।अन्नपूर्णा मंदिर अन्नपूर्णा रोड के स्वामी जयेंद्रानंद महाराज ने बताया कि नियमित आरती और दिव्य श्रृंगार के साथ कई भक्त यहां दुर्गा सप्तशती का पाठ करेंगे। हरसिद्धि मंदिर हरसिद्धि के पुजारी सुनील शुक्ला ने बताया मंदिर में प्रतिदिन विशेष देवी पूजन, महाआरती और मनोहारी शंगार किया जाएगा।
तृतीया एवं चतुर्थी तिथि का संयुक्त पूजन
आचार्य शिवप्रसाद तिवारी ने बताया कि प्रतिपदा से नवमी तक का क्रम तो रहेगा, लेकिन चतुर्थी तिथि घटने (क्षय होने) के कारण पूजा के लिए 8 दिन ही मिलेंगे। 17 जुलाई को तृतीया और चतुर्थी तिथि का संयुक्त पूजन एक ही दिन किया जाएगा।नवरात्र के पहले दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग रहेगा। भड़ली नवमी पर 22 जुलाई को अबूझ मुहूर्त माना गया। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नए प्रतिष्ठान का उद्घाटन और अन्य सभी मांगलिक कार्यों के लिए अलग से पंचांग या मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है।
ये है दस महाविद्या और विशेषता
- काली: समय, परिवर्तन और मृत्यु की देवी है। ये सभी महाविद्याओं में प्रथम हैं।
- तारा: मार्गदर्शक और ब्रह्मांडीय ज्ञान की देवी, जो सांसारिक भटकाव से पार लगाती हैं।
- त्रिपुर सुंदरी: सुंदरता, आनंद और पूर्णता प्रदान करती है।
- भुवनेश्वरी: संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी और विस्तार की देवी है।
- छिन्नमस्ता: अहंकार के नाश और कुंडलिनी जागरण का प्रतीक हैं।
- त्रिपुर भैरवी: उग्र तेज, अनुशासन और तपस्या की देवी है।
- धूमावती: दुर्भाग्य और दुखों का नाश क मोह-माया के अंत का ज्ञान देती हैं।
- बगलामुखी: शत्रुओं का नाश करने और नकारात्मकता को रोकने वाली है।
- मातंगी: आंतरिक सत्य, कला और संगीत की देवी है।
- कमला: समृद्धि, भाग्य और ऐश्वर्य को प्रदान करती है।
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