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कब है घर की ‘दशा’ सुधारने वाला दशा माता व्रत? नोट कर लें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पीपल पूजा के नियम

कब है घर की ‘दशा’ सुधारने वाला दशा माता व्रत? नोट कर लें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पीपल पूजा के नियम

Dasha Mata Vrat 2026: होलिका दहन के ठीक 10वें दिन माता दशा की पूजा करने से सोई हुई किस्मत जाग जाती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 12 Mar 2026 09:33:15 PM (IST)Updated Date: Thu, 12 Mar 2026 09:33:15 PM (IST)

कब है घर की ‘दशा’ सुधारने वाला दशा माता व्रत।

HighLights

  1. कब है घर की ‘दशा’ सुधारने वाला दशा माता व्रत।
  2. नोट कर लें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा के नियम।
  3. राजा नल और रानी दमयंती की कथा का विधान।

धर्म डेस्क। हिंदू धर्म में घर की ‘दशा’ और आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए समर्पित ‘दशा माता व्रत’ इस साल 17 मार्च 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को होने वाला यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं द्वारा घर की उन्नति, खुशहाली और बरकत के लिए रखा जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन के ठीक 10वें दिन माता दशा की पूजा करने से सोई हुई किस्मत जाग जाती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

क्यों है पीपल पूजा और कच्चे सूत का महत्व?

दशा माता व्रत में पीपल के वृक्ष की पूजा को ‘कायाकल्प’ करने वाला माना गया है। इस दिन महिलाएं कच्चे सूत का 10 गांठों वाला ‘दशा माता का डोरा’ तैयार करती हैं। पूजा के दौरान पीपल के पेड़ की 10 बार परिक्रमा करते हुए इस सूत को तने पर लपेटा जाता है। माना जाता है कि पीपल में भगवान विष्णु का वास होता है, इसलिए यह व्रत श्री हरि की कृपा दिलाने में भी सहायक है।

व्रत के कड़े नियम – बिना नमक का भोजन और शुद्धि

इस व्रत के नियम अत्यंत विशिष्ट हैं। व्रत रखने वाली महिलाएं पूरे दिन में केवल एक बार ही भोजन ग्रहण करती हैं, जिसमें नमक का प्रयोग पूरी तरह वर्जित होता है।

भोजन में मुख्य रूप से गेहूं से बने पकवानों का सेवन किया जाता है। साथ ही, इस दिन घर की गहरी सफाई का भी विधान है; मान्यता है कि घर से बेकार कचरा और पुरानी झाड़ू बाहर निकालने से लक्ष्मी जी का स्थायी वास होता है।

राजा नल और रानी दमयंती की कथा का विधान

शास्त्रों के अनुसार, दशा माता की कथा सुने बिना यह व्रत अपूर्ण माना जाता है। इस दिन राजा नल और रानी दमयंती की पौराणिक कथा सुनी जाती है, जो यह बताती है कि कैसे सही समय और भक्ति से जीवन की बिगड़ी हुई दशा को सुधारा जा सकता है। महिलाएं पूजा के बाद गले में पवित्र डोरा धारण करती हैं, जिसे साल भर सुख-समृद्धि के प्रतीक के रूप में पहना जाता है।

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