मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में स्थित ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर (कुकर्रामठ) अपनी कलचुरी कालीन स्थापत्य कला और एक वफादार कुत्ते की मार्मिक कथा के लिए …और पढ़ें
By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Wed, 26 Aug 2026 04:24:36 PM (IST)Updated Date: Wed, 26 Aug 2026 05:02:57 PM (IST)
HighLights
- MP के डिंडौरी में स्थित ‘ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर’ कुत्ते की समाधि से जुड़ा हुआ है
- बंजारे ने गलतफहमी से अपने वफादार कुत्ते को मारा था, इसके में पश्चाताप में इसे बनाया
- यहां सच्चे मन से पूजन करने से आर्थिक और सांसारिक ऋणों से मुक्ति मिलती है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में एक ऐसा प्राचीन और अनोखा शिव मंदिर स्थित है, जो अपनी ऐतिहासिक बनावट के साथ-साथ एक वफादार कुत्ते से जुड़ी लोककथा के लिए प्रसिद्ध है। जिला मुख्यालय से लगभग 12 किमी दूर कुकर्रामठ गांव में स्थित ‘ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर’ आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) द्वारा संरक्षित एक कलचुरी कालीन (6ठी से 13वीं शताब्दी) धरोहर है। मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के सांसारिक और आर्थिक ऋणों से मुक्ति मिलती है।
क्या है मंदिर के पीछे छिपी सदियों पुरानी कहानी?
इस मंदिर और गांव के नाम का संबंध एक वफादार कुत्ते की मार्मिक कथा से जुड़ा हुआ है। पुरानी लोककथा के अनुसार, लाखा नाम के एक बंजारे ने अपनी जरूरत के समय अपने बेहद समझदार और वफादार कुत्ते को एक स्थानीय राजा के पास गिरवी रख दिया था। कुछ समय बाद राजमहल में बड़ी चोरी हो गई। कुत्ते ने अपनी सूझबूझ से चोरों द्वारा छिपाया गया पूरा माल बरामद करवा दिया। राजा कुत्ते की इस स्वामिभक्ति से बेहद प्रसन्न हुए और उन्होंने उसके गले में एक पत्र बांधकर उसे मालिक के पास वापस जाने के लिए मुक्त कर दिया। इसके बाद जब कुत्ता अपने मालिक बंजारे के पास पहुंचा, तो बंजारे ने सोचा कि कुत्ता राजा के यहां से भागकर आ गया है। गुस्से में आकर बंजारे ने बिना सोचे-समझे कुत्ते को लाठी से पीट-पीटकर मार डाला। कुत्ता मारने के बाद जब उसने उसके गले में बंधा राजा का पत्र पढ़ा, तब उसे अपनी भूल का एहसास हुआ।
अपने किए पर भारी पश्चाताप करते हुए बंजारे ने उसी स्थान पर अपने प्रिय कुत्ते की समाधि बनवाई। कालान्तर में इसी समाधि स्थल पर भगवान शिव का मंदिर स्थापित किया गया, जिसे आज ‘ऋण मुक्तेश्वर महादेव’ और गांव को ‘कुकर्रामठ’ (कुक्कर यानी कुत्ता) के नाम से जाना जाता है।
क्या है मंदिर की धार्मिक मान्यता
- मंदिर के गर्भगृह में लगभग 3 फीट ऊंचा प्राचीन शिवलिंग स्थापित है।
- सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां कांवड़िए मां नर्मदा का जल चढ़ाते हैं। महाशिवरात्रि पर यहां विशाल मेले का आयोजन होता है और हजारों श्रद्धालु मन्नत मांगने पहुंचते हैं। सुरक्षा के लिए पुलिस बल भी तैनात रहता है।
- ऐतिहासिक धरोहर और पर्यटन स्थल का दर्जा होने के बावजूद यह क्षेत्र वर्तमान में बुनियादी सुविधाओं (जैसे पेयजल, विश्राम गृह आदि) की कमी से जूझ रहा है। स्थानीय लोग व श्रद्धालु यहां सुविधाओं के विस्तार की मांग कर रहे हैं।







