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Publish Date: Sat, 30 May 2026 02:23:23 PM (IST)Updated Date: Sat, 30 May 2026 02:23:23 PM (IST)
HighLights
- कौन हैं मां चामुंडेश्वरी जिनकी शरण में पहुंचे Ranveer Singh
- जानिए इस ऐतिहासिक शक्तिपीठ का रहस्य और इतिहास
- समुद्र तल से 3,489 फीट की ऊंचाई पर स्थित है मंदिर
धर्म डेस्क। एक विवादास्पद मिमिक्री मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट के निर्देश पर FWICE (फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयीज) द्वारा लगाए गए बैन के बीच बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह मंगलवार को कर्नाटक के प्रसिद्ध श्री चामुंडेश्वरी देवी मंदिर पहुंचे। उन्होंने पहाड़ी की चोटी पर स्थित इस ऐतिहासिक शक्तिपीठ में माथा टेककर आशीर्वाद लिया। देश-विदेश में प्रसिद्ध यह मंदिर अपनी भव्यता, धार्मिक महत्व और वास्तुकला के लिए जाना जाता है।
कौन हैं मां चामुंडेश्वरी?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चामुंडेश्वरी देवी (जिन्हें स्थानीय स्तर पर ‘चामुंडी’ भी कहा जाता है) भगवान शिव की अर्धांगिनी माता पार्वती का अवतार और दुर्गा शक्ति का उग्र रूप हैं। माना जाता है कि माता ने इसी पहाड़ी पर आतंक मचाने वाले राक्षस महिषासुर का वध किया था, जिसके कारण उन्हें ‘महिषासुर मर्दिनी’ के रूप में पूजा जाता है।
समुद्र तल से 3,489 फीट की ऊंचाई पर स्थित है मंदिर

यह पवित्र मंदिर कर्नाटक के मैसूरु में चामुंडी पहाड़ियों पर समुद्र तल से लगभग 3,489 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। स्कंद पुराण सहित कई प्राचीन ग्रंथों में आठ पहाड़ियों से घिरे ‘त्रिमुता क्षेत्र’ नामक एक पवित्र स्थान का उल्लेख मिलता है, जिसके पश्चिमी भाग में यह सबसे प्राचीन मंदिर स्थापित है। चामुंडी मंदिर के समीप ही ऐतिहासिक महाबलेश्वर मंदिर भी स्थित है।
मैसूरु राजपरिवार से जुड़ा है इतिहास
श्री चामुंडेश्वरी मंदिर के वर्तमान भव्य स्वरूप के पीछे मैसूरु के राजपरिवार का ऐतिहासिक योगदान रहा है। माता के परम भक्त महाराजा कृष्णा राजा वोडेयार ने साल 1827 में इस प्राचीन मंदिर का बड़े पैमाने पर जीर्णोद्धार (Restoration) करवाया था।
उन्होंने ही मंदिर के प्रवेश द्वार पर सात मंजिला सुंदर गोपुरम का निर्माण कराया था। राजपरिवार द्वारा भेंट किए गए ऐतिहासिक रथों का उपयोग आज भी विशेष धार्मिक अवसरों और त्योहारों के जुलूस में किया जाता है।
द्रविड़ शैली की भव्य वास्तुकला
पारंपरिक द्रविड़ वास्तुकला शैली में निर्मित यह मंदिर कला और आध्यात्मिकता का एक बेजोड़ नमूना है। यह मुख्य रूप से एक चतुर्भुजाकार (Quadrangular) संरचना है, जिसके प्रवेश द्वार पर बने सात मंजिला गोपुरम (पिरामिडनुमा मीनार) के शिखर पर सात स्वर्ण कलश स्थापित हैं। मंदिर परिसर के भीतर नवरंग हॉल, अंतर्ला मंडप, प्राकार और मुख्य गर्भगृह शामिल हैं, जिसके ठीक ऊपर एक छोटा और सुंदर ‘विमान’ (मीनार) बना हुआ है।
अस्वीकरण – इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य सूचनाओं, विभिन्न धार्मिक माध्यमों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों पर आधारित है। नईदुनिया इसके पूर्ण सत्य होने का दावा नहीं करता है एवं पाठकों से विवेक का उपयोग करने का अनुरोध करता है।







