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ग्रहण में भोजन के नियम, जानें किसे है खाने की मनाही और किन लोगों को दी गई है विशेष छूट

ग्रहण में भोजन के नियम, जानें किसे है खाने की मनाही और किन लोगों को दी गई है विशेष छूट

धर्म डेस्क। साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण आज यानी 3 मार्च को लग रहा है। होली के आसपास होने के कारण ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से यह ग्रहण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शास्त्रों के अनुसार, सूतक काल एक संवेदनशील समय होता है जब वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है।

चंद्र ग्रहण का समय और धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण लगने से ठीक 9 घंटे पहले सूतक काल प्रभावी हो जाता है। आज लगने वाले ग्रहण के लिए सूतक सुबह (पंचांग भेद के अनुसार लगभग 6:20 बजे) से ही शुरू हो गया है।

शास्त्रों में इस अवधि को अशुद्ध माना गया है, इसलिए इस दौरान विशेष सावधानी बरतने और ईश-वंदना करने की सलाह दी जाती है।

भोजन को लेकर शास्त्रों के कड़े निर्देश

शास्त्रों में चंद्र ग्रहण के दौरान भोजन पकाने और खाने, दोनों को वर्जित बताया गया है। इसके पीछे मुख्य रूप से दो कारण माने जाते हैं-

नकारात्मक प्रभाव – माना जाता है कि ग्रहण काल में सूक्ष्म कीटाणु और नकारात्मक किरणें भोजन को दूषित कर देती हैं।

स्वास्थ्य पर असर – इस दौरान वातावरण में बदलाव के कारण पाचन तंत्र संवेदनशील हो जाता है, जिससे भारी भोजन सेहत को नुकसान पहुँचा सकता है।

किन्हें मिलती है विशेष छूट? (Exceptions)

चंद्र ग्रहण के नियम अत्यंत कठोर हैं, लेकिन शास्त्रों में मानवीय आधार पर कुछ विशेष वर्गों को इन नियमों से छूट दी गई है-

गर्भवती महिलाएं – गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और शिशु की पोषण संबंधी जरूरतों को देखते हुए उन्हें भोजन की छूट है।

बच्चे और बुजुर्ग – छोटे बच्चों और शारीरिक रूप से कमजोर बुजुर्गों पर उपवास के नियम लागू नहीं होते।

रोगी व्यक्ति – जो लोग बीमार हैं या नियमित दवाइयां ले रहे हैं, उनके लिए सूतक के नियम शिथिल रहते हैं। वे फलाहार या हल्का पथ्य भोजन ले सकते हैं।

भोजन की शुद्धि का अचूक उपाय

यदि घर में पहले से पका हुआ भोजन, दूध या पानी रखा है, तो उसे दूषित होने से बचाने के लिए सूतक शुरू होने से पहले उसमें तुलसी के पत्ते (तुलसी दल) या कुशा घास डाल देना चाहिए।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी तुलसी में शुद्धिकरण की अद्भुत क्षमता मानी जाती है, जो नकारात्मक किरणों के प्रभाव को कम करती है। हालांकि, ग्रहण समाप्त होने के बाद ताजा भोजन बनाना ही श्रेष्ठ माना गया है।

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