Gayatri Mantra Chant: हिंदू धर्म में गायत्री मंत्र को ‘वेदों का सार’ और सर्वश्रेष्ठ मंत्र माना गया है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, यह मंत्र केवल आध् …और पढ़ें
Publish Date: Fri, 13 Feb 2026 07:26:12 PM (IST)Updated Date: Fri, 13 Feb 2026 07:26:12 PM (IST)
HighLights
- हिंदू धर्म में गायत्री मंत्र का विशेष महत्व है
- जप करने वाला साधक जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है
- राजा अश्वपति ने 100 वर्षों तक पुष्कर तीर्थ में गायत्री जप किया था
धर्म डेस्क। हिंदू धर्म में गायत्री मंत्र को ‘वेदों का सार’ और सर्वश्रेष्ठ मंत्र माना गया है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, यह मंत्र केवल आध्यात्मिक उन्नति का साधन नहीं, बल्कि मनुष्य के संचित पापों को नष्ट करने वाला एक दिव्य अस्त्र भी है। महर्षि पराशर ने राजा अश्वपति को इस मंत्र की अमोघ शक्ति के बारे में विस्तार से समझाया है।
जप की संख्या और उसका फल
एक से सौ बार: एक बार के जप से दिनभर के, 10 बार से दिन-रात के और 100 बार जप से पूरे महीने के पाप नष्ट हो जाते हैं।
हजार से लाख: एक हजार जप साल भर के दुखों को हर लेता है। एक लाख जप वर्तमान जन्म के पाप मिटाता है, जबकि 10 लाख जप पिछले तीन जन्मों के कर्मों को शुद्ध करता है।
करोड़ और मोक्ष: एक करोड़ बार जप करने से सभी जन्मों के पापों का अंत होता है और दस करोड़ जप मनुष्य को जन्म-मरण के चक्र से मुक्त कर ‘मोक्ष’ प्रदान करता है।
राजा अश्वपति की तपस्या और सती सावित्री का जन्म
संतान सुख से वंचित मध्य प्रदेश के सत्यवादी राजा अश्वपति ने महर्षि वशिष्ठ के सुझाव पर गायत्री माता की आराधना की। उन्होंने पुष्कर तीर्थ में 100 सालों तक कठोर तपस्या की। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने दर्शन दिए, जिसके फलस्वरूप उन्हें पुत्री रत्न की प्राप्ति हुई। यही कन्या इतिहास में ‘सती सावित्री’ के नाम से अमर हुई।
साधना की सही विधि
- दिशा: साधक का मुख पूर्व की ओर होना चाहिए।
- मुद्रा: मस्तक थोड़ा झुका हुआ और हथेली ‘सर्प के फन’ (अर्द्धमुद्रित सर्पफणाकृति) के समान आकार में होनी चाहिए।
- माला: जप के लिए स्फटिक या श्वेत कमल के बीजों की माला सबसे उत्तम मानी गई है।
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