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भगवान राम की तपोभूमि क्यों कहलाता है चित्रकूट…श्री कृष्ण से क्या है संबंध? जानिए 14 साल के वनवास की पूरी गाथा

भगवान राम की तपोभूमि क्यों कहलाता है चित्रकूट…श्री कृष्ण से क्या है संबंध? जानिए 14 साल के वनवास की पूरी गाथा

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पंचवटी (चित्रकूट) वह स्थल है जिसका संबंध भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण से जुड़ा हुआ है। यह वही स्थान है जहां से रावण ने माता सीता का छल से अपहरण किया था, जिसके बाद प्रभु राम ने रावण वध और लंका विजय का अपना धर्म पूरा किया था।

वाल्मीकि रामायण और ग्रंथ ‘राम वन गमन पथ’ के अनुसार, प्रभु श्रीराम ने अपने 14 सालों के वनवास में से लगभग 12 साल (11 साल 11 महीने और 11 दिन) एक ही स्थान यानी चित्रकूट में व्यतीत किए थे। वनवास के अंतिम 2 सालों में ही उन्होंने मारीच वध, बालि वध, रामसेतु निर्माण और रावण वध जैसे ऐतिहासिक कार्य संपन्न किए।

अयोध्या से चित्रकूट तक का सफर

राम-सीता के विवाह के कुछ समय बाद महाराज दशरथ ने श्रीराम के राज्याभिषेक की घोषणा की थी। परंतु माता कैकयी द्वारा मांगे गए दो वरदानों के कारण प्रभु राम को 14 साल के वनवास पर जाना पड़ा और भरत को अयोध्या का राज्य मिला।

  • सुमंत के रथ से शुरुआत: अयोध्या से चित्रकूट की दूरी 250 किलोमीटर से अधिक है। श्रीराम, सीता और लक्ष्मण ने शुरुआती 140 किलोमीटर की यात्रा महाराज दशरथ के मंत्री सुमंत के रथ पर तय की।
  • पैदल यात्रा और नदियां: इसके बाद का सफर उन्होंने पैदल तय किया। सबसे पहले उन्होंने तमसा नदी पार की, फिर श्रृंगवेरपुर में गंगा नदी पार कर प्रयागराज पहुंचे। इसके बाद यमुना नदी पार कर महर्षि वाल्मीकि के आश्रम पहुंचे और अंत में चित्रकूट पहुंचे।

चित्रकूट से अमरकंटक और पंचवटी की यात्रा

  • चित्रकूट में करीब 12 साल संन्यासी जीवन बिताने के बाद तीनों माता अनुसूइया के आश्रम पहुंचे। इसके बाद टिकरिया, सरभंगा आश्रम, सुतीक्ष्ण आश्रम, अमरपाटन, गोरसरी घाट, मार्कंडेय आश्रम और सारंगपुर होते हुए 380 किलोमीटर की दूरी तय करके अमरकंटक पहुंचे।
  • अमरकंटक के बाद वे पंचवटी (गोदावरी नदी के तट) पहुंचे और अपनी कुटिया बनाई।
  • जटायु से भेंट-शूर्पणखा प्रसंग: पंचवटी में ही श्रीराम की मुलाकात अपने पिता के मित्र जटायु से हुई। यहीं शूर्पणखा का नाक-कान काटने की घटना हुई और श्रीराम-लक्ष्मण ने खर-दूषण का वध किया।
  • सीता अपहरण: इसके बाद रावण ने अपने मामा मारीच की मदद से माता सीता का अपहरण कर लिया।

किष्किंधा और महज 5 दिनों में रामसेतु का निर्माण

सीता जी की खोज में राम और लक्ष्मण ने पंचवटी से 1255 किलोमीटर की पैदल यात्रा की और दक्षिण में किष्किंधा पहुंचे, जो पंपा नदी के पास स्थित है।

1. हनुमान जी से भेंट: बालि का वध कर सुग्रीव को राजा बनाने के बाद, वानर सेना को माता सीता की खोज में भेजा गया। सम्पाती नाम के गीध ने हनुमान जी को बताया कि माता सीता समुद्र पार 100 योजन दूर लंका में हैं।

2. 5 दिन में बना रामसेतु: नल और नील की मदद से विशाल समुद्र पर केवल 5 दिनों में रामसेतु का निर्माण कर लिया गया।

  • पहला दिन: 14 योजन
  • दूसरा दिन: 20 योजन
  • तीसरा दिन: 21 योजन
  • चौथा दिन: 22 योजन
  • पांचवां दिन: 23 योजन

3. लंका विजय: पुल पार कर श्रीराम लंका पहुंचे, रावण का वध किया और माता सीता को लेकर अयोध्या लौट आए।

चित्रकूट का श्रीकृष्ण से क्या है पावन संबंध?

त्रेतायुग में भगवान राम ने चित्रकूट के कामदगिरि पर्वत पर अपने वनवास का लंबा समय बिताया था। वे कामदगिरि की परिक्रमा करके एक स्थान पर शालिग्राम जी की पूजा किया करते थे।

जब त्रेतायुग समाप्त हुआ और द्वापरयुग का आगमन हुआ, तब भगवान श्री हरि ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापरयुग में श्रीकृष्ण ने चित्रकूट के इसी कामदगिरि पर्वत में वास किया और ‘बांके बिहारी’ कहलाए। आज भी कामदगिरि पर्वत पर ‘बांके बिहारी मंदिर’ स्थित है, जहाँ प्रतिसाल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इस प्रकार त्रेतायुग के श्रीराम और द्वापरयुग के श्रीकृष्ण का चित्रकूट से अद्भुत और अभिन्न संबंध है।

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