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महाभारत का वो अमर श्राप… क्यों 3000 साल बाद भी मुक्ति को तरस रहा है अश्वत्थामा?

महाभारत का वो अमर श्राप… क्यों 3000 साल बाद भी मुक्ति को तरस रहा है अश्वत्थामा?

धर्म डेस्क। महाभारत के युद्ध को समाप्त हुए हजारों साल बीत चुके हैं, लेकिन एक योद्धा आज भी अपनी मुक्ति की राह देख रहा है। वह योद्धा है अश्वत्थामा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु द्रोणाचार्य का यह पुत्र आज भी भटक रहा है और अपने घावों से होने वाली असहनीय पीड़ा को सह रहा है। आखिर भगवान कृष्ण ने क्यों एक ब्राह्मण पुत्र को इतना कठोर और क्रूर श्राप दिया? आइए जानते हैं उस ‘प्रतिशोध की काली रात’ की कहानी।

प्रतिशोध की वो काली रात और जघन्य अपराध

महाभारत युद्ध के अंत में जब दुर्योधन अपनी अंतिम सांसें ले रहा था, तब अश्वत्थामा ने प्रतिज्ञा की थी कि वह पांडवों का समूल विनाश कर देगा। इसी प्रतिशोध की आग में जलते हुए उसने रात के अंधेरे में पांडवों के शिविर पर हमला किया। लेकिन, अनजाने में उसने पांडवों के पांच पुत्रों (द्रौपदी के उपपांडवों) की सोते समय हत्या कर दी। इस जघन्य अपराध ने युद्ध के समस्त धर्म-नियमों को तार-तार कर दिया था।

ब्रह्मास्त्र का प्रयोग और उत्तरा का गर्भ

जब पांडवों को इस नरसंहार का पता चला, तो वे अश्वत्थामा के पीछे भागे। स्वयं को असुरक्षित देख अश्वत्थामा ने अमोघ ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर दिया। उसे ब्रह्मास्त्र चलाना तो आता था, लेकिन उसे वापस बुलाने की विद्या ज्ञात नहीं थी।

जब भगवान कृष्ण ने उसे शस्त्र वापस लेने को कहा, तो उसने उसे अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ की ओर मोड़ दिया ताकि पांडवों का वंश ही समाप्त हो जाए। उत्तरा के अजन्मे शिशु (परीक्षित) पर वार करना कृष्ण के क्रोध का कारण बना।

माथे की मणि और श्री कृष्ण का दंड

भगवान कृष्ण ने न केवल उत्तरा के गर्भ की रक्षा की, बल्कि दंड स्वरूप अश्वत्थामा के माथे पर जन्म से ही चमकने वाली दिव्य मणि को जबरन निकलवा लिया। यह मणि उसे भूख, प्यास, थकान और हर प्रकार की बीमारियों से बचाती थी।

कृष्ण का वो ‘अमर’ श्राप

मणि छिन जाने के बाद भगवान कृष्ण ने अश्वत्थामा को श्राप देते हुए कहा…

“तू कलयुग के अंत तक इस पृथ्वी पर भटकता रहेगा। तेरे शरीर से मवाद और रक्त बहता रहेगा, तू मृत्यु की कामना करेगा लेकिन तुझे मृत्यु प्राप्त नहीं होगी। तू समाज से बहिष्कृत रहेगा और अकेलेपन में घुटता रहेगा।”

क्या आज भी जीवित है अश्वत्थामा?

लोक मान्यताओं के अनुसार, अश्वत्थामा आज भी मध्य प्रदेश के असीरगढ़ किले (बुरहानपुर) के शिव मंदिर में पूजा करने आता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि वह अक्सर अपने माथे के जख्म को भरने के लिए तेल मांगते हुए दिखाई देता है।

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