शहर में पहली बार देवसुर तपागच्छ के 81 संतों का एक साथ मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर का साक्षी बनने के लिए समाज के सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं जुटे। इस अवसर प…और पढ़ें
Publish Date: Thu, 09 Jul 2026 10:23:31 AM (IST)Updated Date: Thu, 09 Jul 2026 10:23:31 AM (IST)
HighLights
- चातुर्मास में समाज को प्रमाद त्यागकर धर्म पुरुषार्थ की ओर अग्रसर करना लक्ष्य
- शहर में पहली बार देवसुर तपागच्छ के 81 संतों का एक साथ मंगल प्रवेश हुआ
- इस अवसर का साक्षी बनने के लिए समाज के सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं जुटे
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर में हर दिन के साथ आत्मोत्थान के पर्व चातुर्मास का उल्लास बढ़ता जा रहा है। इस कड़ी में जैन श्वेतांबर देवसुर तपागच्छ समाज के लिए बुधवार का दिन खास रहा। शहर में पहली बार देवसुर तपागच्छ के 81 संतों का एक साथ मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर का साक्षी बनने के लिए समाज के सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं जुटे। इस अवसर पर गुरुओं के जयघोष से क्षेत्र गूंजयमान हुआ।
हायलिंक सिटी स्थित जैन तपागच्छ मंदिर पर हुआ वैसे ही जयघोष गूंजने लगे। आचार्य राजचंद्रसुरेश्वरजी महाराज ने कहा कि इंदौर आगमन का उद्देश्य समाज को प्रमाद त्यागकर धर्म पुरुषार्थ की ओर अग्रसर करना है। चातुर्मास के दौरान धर्म आराधना, सदाचार, ध्यान, संयम एवं आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी जाएगी, जिससे मानव जीवन धर्मनिष्ठ एवं संस्कारवान बन सके।
इस अवसर पर बैंड-बाजों की मधुर धुन बज रही थी तो महिलाओं सिर पर मंगल कलश धारण किए हुए थे।108 शोभायात्रा तथा श्री नवकार परिवार के युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। इस अवसर पर पुण्यपालजी सुराणा, कैलाशजी नाहर, यशवंत जैन, पुंडरीक पालरेचा, प्रवीण गुरुजी, महेंद्र गुरुजी, विपिन सोनी, आरके. मेहता आदि मौजूद थे।
इन संतों का हुआ आगमन
आचार्य राजचंद्रसुरेश्वरजी महाराज., पूज्य गच्छाधीपति श्री विज्ञानप्रभसुरेश्वरजी महाराज सहित 81 साधु-संतों का मंगल प्रवेश हुआ। इसमें पंन्यास, गणिवर्य तथा साधु-साध्वी भगवंत शामिल है। संत गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से लंबी पदयात्रा कर इंदौर पहुंचे हैं। आगामी चार महीनों तक ये संत शहर के लगभग 20 प्रमुख श्रीसंघों में चातुर्मास कर धर्म आराधना एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन देंगे।







