कैंची धाम के नीम करोली बाबा को लेकर फैले चमत्कारों और दावों के पीछे की सच्चाई, उनका आध्यात्मिक जीवन और 11 सितंबर 1973 को हुए उनके देवलोकगमन के इतिहास …और पढ़ें
By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Fri, 11 Sep 2026 03:34:22 PM (IST)Updated Date: Fri, 11 Sep 2026 03:34:22 PM (IST)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम और वहां के संत नीम करोली बाबा का नाम आते ही मन में एक साधारण से दिखने वाले संत, कंधे पर कंबल और उनसे जुड़ी अलौकिक घटनाओं की छवि उभरती है। ट्रेन रुकने की कथा से लेकर पानी के घी में बदलने और अमेरिकी आध्यात्मिक गुरु रामद के LSD प्रयोग तक- बाबा से जुड़ी कई कहानियां श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित हैं।
आइए जानते हैं नीम करोली बाबा के जीवन, उनके दृष्टिकोण, वैज्ञानिक-आध्यात्मिक पहलुओं और कैंची धाम की वैश्विक लोकप्रियता से जुड़ी पूरी सच्चाई:
1. ट्रेन रुकने से लेकर पानी को घी बनाने तक- क्या थे प्रमुख प्रसंग?
- ट्रेन का रुकना: कहा जाता है कि एक बार रेलवे कर्मचारियों ने बाबा को बिना टिकट समझकर ट्रेन से उतरने को कहा। बाबा शांत भाव से नीचे उतर गए, लेकिन इसके बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। बाद में जब बाबा को आदरपूर्वक ट्रेन में वापस बैठाया गया, तब जाकर ट्रेन चली।
2. आस्था बनाम तर्क: कहानियों का आधार क्या है?
- बाबा से जुड़े अधिकांश किस्से उनके द्वारा स्वयं नहीं लिखे गए, बल्कि उनके भक्तों द्वारा सांझा किए गए अनुभवों पर आधारित हैं।
- अनुभव बनाम वैज्ञानिक प्रमाण: किसी भक्त के लिए जीवन में आया चमत्कारिक बदलाव पूर्णतः वास्तविक होता है, परंतु वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अलौकिक दावों को सिद्ध करने के लिए कड़े प्रमाणों की आवश्यकता होती है।
- समय के साथ कहानियों का विस्तार: वर्षों तक मौखिक रूप से सुनाई जाने वाली कहानियों में समय के साथ कुछ बातें जुड़ने या अतिशयोक्ति होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, यद्यपि भक्तों के व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभव उनके लिए पूर्ण सत्य हैं।
3. चमत्कारों पर स्वयं नीम करोली बाबा का दृष्टिकोण
- नीम करोली बाबा स्वयं को किसी भी प्रकार के चमत्कार या अलौकिक शक्तियों से दूर रखते थे:
- हनुमान जी की भक्ति का संदेश: जब भी भक्त उनकी पूजा करने या उन्हें भगवान मानने का प्रयास करते, तो बाबा उन्हें स्पष्ट मना करते थे। उनका संदेश सीधा था—”आस्था रखनी है तो भगवान हनुमान में रखो, किसी इंसान को उसका केंद्र मत बनाओ।”
- प्रचार और तस्वीरों से दूरी: वह अपनी तस्वीरें खिंचवाने से बचते थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में किसी को अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया और न ही कोई केंद्रीय धार्मिक ढांचा बनाया।
4. 11 सितंबर 1973: बाबा का अंतिम समय
- सितंबर 1973 में आगरा में चिकित्सक से परामर्श के बाद बाबा ट्रेन से लौट रहे थे। रास्ते में स्वास्थ्य बिगड़ने पर वे मथुरा स्टेशन पर उतरे और भक्तों से वृंदावन ले जाने को कहा। 11 सितंबर 1973 को वृंदावन के अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। भक्तों के अनुसार, उन्होंने अपने अंतिम क्षणों में ऑक्सीजन लेने से इनकार कर दिया था।
5. स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग का कैंची धाम कनेक्शन
- कैंची धाम की वैश्विक प्रसिद्धि में टेक दिग्गजों की कहानियों का बड़ा योगदान रहा है-
- स्टीव जॉब्स: एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स 1970 के दशक में आध्यात्मिक खोज में भारत आए थे। यद्यपि जब वे कैंची धाम पहुंचे, उससे पहले (सितंबर 1973) बाबा का निधन हो चुका था, लेकिन इस यात्रा ने उनके जीवन और विचारों पर गहरा प्रभाव डाला।
- मार्क जुकरबर्ग: फेसबुक (Meta) के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने 2015 में खुलासा किया था कि जब उनका बिजनेस कठिन दौर से गुजर रहा था, तब उनके मेंटर स्टीव जॉब्स ने उन्हें भारत के इस मंदिर में जाने की सलाह दी थी। जुकरबर्ग यहां आए और उन्होंने माना कि इस यात्रा ने उन्हें कंपनी के विजन को नए सिरे से समझने में मदद की।







