नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की पवित्र योगिनी एकादशी का व्रत इस वर्ष 10 जुलाई को रखा जाएगा। भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा, संयम और विधि-विधान से करने पर व्यक्ति को पापों से मुक्ति, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 10 जुलाई को सुबह 8:16 बजे प्रारंभ होगी और 11 जुलाई को सुबह 5 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर गृहस्थजन 10 जुलाई को ही योगिनी एकादशी का व्रत रखेंगे। व्रती अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक पारण करेंगे।
तुलसी दल के साथ फरारी भोग अर्पित किया जाएगा
एकादशी पर नगर के प्रमुख सनातन धर्म मंदिर में भगवान चक्रधर व गिर्राजधरण, जनकगंज स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर, थाटीपुर स्थित द्वारिकाधीश मंदिर, पुराने जिला कोर्ट भवन के पास स्थित गिर्राज मंदिर, सदर बाजार स्थित गिर्राज मंदिर तथा किलागेट स्थित जानकी वल्लभ मंदिर में ठाकुरजी का दिव्य शृंगार किया जाएगा। भगवान को तुलसी दल के साथ फरारी भोग अर्पित किया जाएगा।
व्रत से ज्ञात-अज्ञात पापों से मिलती है मुक्ति
धर्मग्रंथों में योगिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के ज्ञात-अज्ञात पाप, दोष और बुरे कर्म नष्ट हो जाते हैं। शास्त्रों में यह भी वर्णित है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्यफल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस व्रत से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाले अनेक कष्ट दूर होते हैं।
भगवान विष्णु का पंचामृत से करें अभिषेक
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार व्रत के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। इसके बाद पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप, नैवेद्य और मौसमी फलों से श्रीहरि का पूजन करें। विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है। रात्रि में भजन-कीर्तन और जागरण करने का भी विधान है।
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि योगिनी एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और सेवा का संदेश भी देती है।
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