Support Parmarth TV.  You can send any amount on our UPI Id: 9643218008m@pnb. 

तुर्किये में नाटो समिट के दौरान Donald Trump की लोकेशन तक पहुंच गए थे ईरानी एजेंट, अब हुआ ये दावा | Parmarth TV Iran-US War: ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने तक ईरान खींच सकता हैं युद्ध को, बन रही ये रणनीति | Parmarth TV Abhijit Deepke का बड़ा बयान, कहा-फिलहाल सीजेपी को राजनीतिक पार्टी नहीं बनाया जाएगा, राहुल गांधी से… | Parmarth TV LPG Price: क्या आज सस्ता हो गया है 14.2 किलो वाला घरेलू सिलेंडर, ये है ताजा रेट | Parmarth TV दिन भर की गिरावट के बाद हरे निशान में बंद हुआ सेंसेक्स – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar | Parmarth TV ब्रिटिश कोलंबिया में जंगल की आग का प्रकोप लगातार बरकरार | Parmarth TV अब नई परेशानी में घिरे पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना, मोबाइल में मिले 90 पोर्न वीडियो  | Parmarth TV Gold and Silver Prices: आज ये है सोने-चांदी का ताजा भाव, खरीदने से पहले… | Parmarth TV PM Vishwakarma Scheme: ट्रेनिंग के दौरान लाभार्थी को मिलता है रोजाना 500 रुपए स्टाइपैंड, मिलते हैं ये लाभ भी | Parmarth TV National Weather Forecast: राजस्थान और मध्यप्रदेश में बारिश का कहर, अब इन जिलों के लिए जारी हुआ है अलर्ट | Parmarth TV

15 दिनों के लिए बीमार हुए भगवान जगन्नाथ, सोने के कुएं से निकले जल से हुआ था जलाभिषेक, अब इस दिन देंगे दर्शन

15 दिनों के लिए बीमार हुए भगवान जगन्नाथ, सोने के कुएं से निकले जल से हुआ था जलाभिषेक, अब इस दिन देंगे दर्शन

धर्म डेस्क। विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ मंदिर में सालाना रथयात्रा उत्सव की औपचारिक शुरुआत देवस्नान पूर्णिमा के पावन अवसर से हो चुकी है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के इस पावक दिन पर भगवान जगन्नाथ, उनके अग्रज भ्राता बलभद्र, बहन सुभद्रा और सुदर्शन चक्र को 108 दिव्य कलशों के सुगंधित जल से महास्नान कराया गया।

इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान के संपन्न होते ही महाप्रभु अगले 15 दिनों के लिए ‘अनासार’ यानी एकांतवास में चले गए हैं। इस विशेष अवधि में भक्तों के लिए गर्भगृह के कपाट बंद रहेंगे और रथयात्रा के दिन ही भगवान पुनः दर्शन देंगे।

स्वर्ण कूप से आता है महास्नान का पावन जल

मान्यता है कि इस महाअभिषेक के लिए उपयोग में लाया जाने वाला जल मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक ‘स्वर्ण कूप’ (सोने के कुएं) से निकाला जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस अद्वितीय कुएं का निर्माण श्रीमंदिर के निर्माता राजा इंद्रद्युम्न ने कराया था और इसके भीतर सोने की ईंटें जड़ी हुई हैं।

वर्षभर इस पवित्र कुएं को लगभग दो टन भारी लोहे के ढक्कन से सुरक्षित बंद रखा जाता है, जिसे खोलने के लिए 15 से 17 सेवादारों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। ढक्कन हटाने के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 108 कलशों में जल भरकर स्नान मंडप तक पहुंचाया जाता है।

शास्त्रों के अनुसार कलशों का आवंटन और महास्नान

शास्त्रों और मंदिर की स्थापित परंपराओं के अनुसार, चारों विग्रहों के स्नान के लिए कलशों की संख्या पहले से निर्धारित है। परंपरा के मुताबिक सबसे पहले सुदर्शन जी का अभिषेक किया जाता है, जिसके बाद क्रमशः बड़े भाई बलभद्र, माता सुभद्रा और अंत में जगत के नाथ भगवान जगन्नाथ को स्नान कराया जाता है।

इस महास्नान में चारों विग्रहों के लिए कलशों का आवंटन इस प्रकार होता है:

भगवान जगन्नाथ के लिए 35 कलश, भ्राता बलभद्र के लिए 33 कलश, बहन सुभद्रा के लिए 22 कलश और सुदर्शन जी के लिए 18 कलशों का उपयोग किया जाता है।

108 कलशों के स्नान के बाद ‘बीमार’ होते हैं भगवान

सनातन संस्कृति में भगवान जगन्नाथ को मानवीय रूप में पूजा जाता है। ज्येष्ठ मास की चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बीच शीतल जल के 108 कलशों से स्नान करने के कारण भगवान को ज्वर (बुखार) आ जाता है और वे ‘अस्वस्थ’ हो जाते हैं। यही वजह है कि वे अगले 15 दिनों के लिए अनासार गृह में विश्राम करते हैं।

इस एकांतवास के दौरान मंदिर परिसर का माहौल पूरी तरह शांत रखा जाता है। मंदिर में घंटियां बजाने की मनाही होती है और इस अवधि में कोई भी मांगलिक या नया निर्माण कार्य नहीं किया जाता।

राजवैद्य की देखरेख में आयुर्वेदिक उपचार

अनासार काल के दौरान महाप्रभु का इलाज मंदिर के विशेष राजवैद्य करते हैं। इस मानवीय लीला के तहत भगवान को जड़ी-बूटियों से निर्मित काढ़ा और विशेष आयुर्वेदिक औषधियां दी जाती हैं। यह पूरी प्रक्रिया भगवान और भक्तों के बीच के आत्मीय और पारिवारिक संबंध को जीवंत करती है।

15 दिनों के सफल उपचार और स्वास्थ्य लाभ के बाद, भगवान ‘नवयौवन दर्शन’ के माध्यम से पुनः अपने भक्तों के सामने आते हैं। इसके ठीक बाद, तीनों भव्य रथों पर सवार होकर भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर के लिए विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा पर निकलते हैं।

Trending News