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Chandra Grahan 2026: होलिका दहन और धुलेंडी के बीच खग्रास चंद्रग्रहण, भारत में 44 मिनट तक देगा दिखाई… सूतक समय से बरतें ये सावधानियां

Chandra Grahan 2026: होलिका दहन और धुलेंडी के बीच खग्रास चंद्रग्रहण, भारत में 44 मिनट तक देगा दिखाई… सूतक समय से बरतें ये सावधानियां

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर: होलिका दहन और धुलेंड़ी के बीच मंगलवार को खग्रास चंद्रग्रहण (Chandra Grahan 2026) पड़ रहा है। यह ग्रहण दोपहर से लेकर रात तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह चंद्रग्रहण मघा और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में सिंह राशि पर दृश्य होगा।

भारतीय समयानुसार ग्रहण का स्पर्श काल दोपहर 3:29 बजे प्रारंभ होगा। इसका मध्यकाल शाम 6:12 बजे रहेगा और रात्रि 7:2 बजे खंड चंद्रग्रहण का मोक्ष होगा। चूंकि, चंद्रोदय शाम 6:18 बजे होगा, इसलिए ग्रहण का दृश्य प्रभाव इसी समय से माना जाएगा। यह ग्रहण भारत में 44 मिनट तक दिखाई देगा।

सूतक काल सुबह से प्रभावी

ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार ग्रहण का सूतक मंगलवार को सुबह 9:18 बजे से प्रारंभ हो जाएगा। सूतक तीन प्रहर पहले मान्य होता है। हालांकि, बालक, वृद्ध और रोगियों के लिए सूतक दोपहर 3:17 बजे से प्रभावी माना जाना चाहिए।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य और चंद्र ग्रहण का प्रभाव मानव जीवन और देश-दुनिया पर पड़ता है। इस ग्रहण को हिंदू धर्म में अशुभ अवधि माना गया है, जिसमें मांगलिक और शुभ कार्य करने की मनाही रहती है। यात्राएं भी इस दौरान वर्जित मानी जाती हैं।

भारत सहित कई देशों में रहेगा दृश्य

यह चंद्रग्रहण समूचे यूरोप, एशिया, आस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैण्ड, अफ्रीका और उत्तर व दक्षिण अमेरिका के पूर्वी क्षेत्रों में दिखाई देगा। भारत में यह ग्रस्तोदित खंड चंद्रग्रहण मोक्ष काल में दृश्य रहेगा।

सिंह राशि में केतु के साथ चंद्रमा की युति

इस बार चंद्रग्रहण सिंह राशि में लग रहा है, जहां पहले से केतु विराजमान हैं। ऐसे में सिंह राशि में चंद्रमा और केतु की युति बनेगी। वहीं सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र और राहु की युति कुम्भ राशि में रहेगी। दोनों राशियां समसप्तक भाव में रहकर एक-दूसरे पर सप्तम दृष्टि डालेंगी।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस ग्रह स्थिति का प्रभाव देश और दुनिया पर दिखाई दे सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं की आशंका जताई गई है। मौसम में प्रतिकूल परिवर्तन संभव है। राजनीतिक और भौगोलिक बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध और तनाव बढ़ने की संभावना भी व्यक्त की गई है।

इन राशियों पर पड़ेगा अधिक प्रभाव

चंद्रग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर रहेगा। ज्योतिषीय मत के अनुसार सिंह, कर्क, कुम्भ, कन्या और मकर राशि के जातकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं मिथुन, तुला, वृश्चिक, मीन और मेष राशि वालों के लिए यह ग्रहण अपेक्षाकृत शुभ फलदायी हो सकता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानी

ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इस दौरान सुई, कैंची, चाकू जैसी नुकीली या धारदार वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए। ग्रहण को नग्न आंखों से देखने से भी बचने की सलाह दी गई है।

सूतक लगने के बाद गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर न निकलने, विशेषकर श्मशान जैसे नकारात्मक स्थलों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि सावधानी रखने से गर्भस्थ शिशु पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।

ग्रहण काल में क्या करें और क्या न करें

शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल में पूजा-पाठ, हवन, यज्ञ, मूर्ति स्थापना, विवाह और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। सूतक काल में भोजन पकाना या खाना वर्जित माना गया है। बाल कटवाना, नाखून काटना और दाढ़ी बनवाना जैसे शारीरिक शुद्धिकरण कार्य भी नहीं करने चाहिए।

ग्रहण के दौरान भगवान का नाम जपना शुभ माना गया है। “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” और “महामृत्युंजय मंत्र” का जाप लाभकारी बताया गया है। ग्रहण काल में चावल, दूध, दही, सफेद वस्त्र और अन्य सफेद वस्तुओं का दान करना भी पुण्यदायी माना गया है। ज्योतिषीय मान्यता है कि ग्रहण के समय किया गया मंत्र जाप सिद्धप्रद होता है।

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। नईदुनिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। नईदुनिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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