Jagannath Rath Yatra: उज्जैन के इस्कान मंदिर में 27 जून को निकलने वाली रथ यात्रा के लिए भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा महारानी के लिए शुद्ध रेशम के कपड़े से पोशाक तैयार की जा रही है। दो लाख रुपये की लागत से बनाई जा रही पोशाक पर रेशम के धागे से कसीदेकारी की जा रही है। कारीगर पिच्छीकारी के द्वारा रथ के शिखर का आवरण भी तैयार कर रहे हैं।
By Prashant Pandey
Publish Date: Sat, 21 Jun 2025 09:14:51 AM (IST)
Updated Date: Sat, 21 Jun 2025 11:16:45 AM (IST)
HighLights
- भगवान जगन्नाथ के लिए रेशम की पोशाक तैयार करने में जुटे कारीगर।
- यात्रा के लिए तीन रथों का निर्माण, अलग-अलग रथ पर सवार होंगे भगवान।
- 27 जून को निकलेगी रथ यात्रा, कृषि मंडी चौराहा से प्रारंभ होगी शोभायात्रा।
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। भरतपुरी स्थित इस्कान मंदिर में 27 जून को निकलने वाली रथ यात्रा को लेकर जोरदार तैयारी की जा रही है। पश्चिम बंगाल के कारीगर भगवान जगन्नाथ, बलदेव व सुभद्रा महारानी के लिए शुद्ध रेशम के कपड़े से पोशाक तैयार कर रहे हैं। बेजोड़ दस्तकारी से तैयार हो रही पोशाक की कीमत करीब दो लाख रुपये बताई जा रही है। कारीगर पिच्छीकारी के द्वारा रथ के शिखर का आवरण भी तैयार कर रहे हैं।
पीआरओ राघव पंडित दास प्रभु ने बताया भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलदेव व बहन सुभद्रा 27 जून को जब रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे, तब यही पोशाक धारण करेंगे। गुलाबी रंग के शुद्ध रेशम के कपड़े से बनाई जा रही पोशाक पर रेशम के धागे से अत्यंत ही सुंदर कसीदेकारी की जा रही है। कलाकारों ने मोर व बतख की आकृति से पोशाक को सजाया है। बीते दो माह से कारीगर प्रतिदिन 8 से 10 घंटे काम कर रहे हैं।
शिखर के कवर पर धार्मिक चिह्न
इस्कान मंदिर प्रबंधन द्वारा वर्ष 2024 से रथ यात्रा में तीन रथ शामिल किए जा रहे हैं। इस बार भी भगवान जगन्नाथ, बलदेव तथा महारानी सुभद्रा अलग-अलग रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे। कारीगर इन तीनों रथ के शिखर के लिए आवरण तैयार कर रहे हैं। पिच्छीकारी के द्वारा तैयार हो रहे आवरण पर विभिन्न धार्मिक व मांगलिक चिह्नों का अंकन किया जा रहा है। इनमें शंख,चक्र, गदा, कलश, स्वस्तिक शामिल है। मंदिर का लोगों भी सज्जा का अंग है।
कृषि मंडी चौराहा से निकलेगी यात्रा
इस्कान मंदिर की रथ यात्रा 27 जून को आगर रोड स्थित कृषि उपज मंडी से दोपहर 2 बजे प्रारंभ होगी। इसके बाद कोयला फाटक, चामुंडा चौराहा, फ्रीगंज ओवरब्रिज, टावर चौक, तीन बत्ती चौराहा, देवास रोड होते हुए कालिदास अकादमी परिसर में बसाई गई गुंडिचा नगरी पहुंचकर संपन्न होगी।







