Solar Eclipse 2026: साल 2026 का आगाज खगोलीय और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 …और पढ़ें
Publish Date: Mon, 02 Feb 2026 05:21:38 PM (IST)Updated Date: Mon, 02 Feb 2026 05:21:38 PM (IST)
HighLights
- 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण और अमावस्या का दुर्लभ संयोग
- तुलसी के पत्ते से लेकर स्नान-दान तक, ये हैं जरूरी नियम
- भारत में दिखेगा या नहीं और क्या रहेगा सूतक का समय
धर्म डेस्क। साल 2026 का आगाज खगोलीय और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को लगने वाला है। खास बात यह है कि इसी दिन सनातन धर्म में विशेष महत्व रखने वाली फाल्गुन अमावस्या भी है। पितरों के तर्पण और श्राद्ध के लिए समर्पित इस तिथि पर ग्रहण का साया होने के कारण लोगों के मन में सूतक और नियमों को लेकर कई सवाल हैं।
कब और किस समय लगेगा ग्रहण?
ज्योतिष गणना के अनुसार, 17 फरवरी को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण शाम के समय शुरू होगा।
- ग्रहण का आरंभ: शाम 05 बजकर 26 मिनट
- ग्रहण का समापन: शाम 07 बजकर 57 मिनट
ज्योतिषियों का मानना है कि भले ही यह खगोलीय घटना कुछ ही घंटों की हो, लेकिन इसका ऊर्जात्मक प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों पर दिखाई देगा।
क्या भारत में मान्य होगा सूतक काल?
धार्मिक नजरिए से सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले लग जाता है। हालांकि, भारत के संदर्भ में राहत की खबर है। साल 2026 का यह पहला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। शास्त्रों के अनुसार, जो ग्रहण दृश्य नहीं होता, उसका धार्मिक प्रभाव और सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा। इसलिए फाल्गुन अमावस्या पर किए जाने वाले तर्पण, दान और पूजा-पाठ बिना किसी बाधा के किए जा सकेंगे।
ग्रहण के दौरान सावधानियां
भले ही सूतक मान्य न हो, लेकिन ब्रह्मांडीय ऊर्जा के शुद्धिकरण के लिए शास्त्रों में कुछ सावधानियां बताई गई हैं, जिनका पालन करना शुभ माना जाता है:
इन कार्यों से बचें
- भोजन का सेवन: ग्रहण के दौरान भोजन करने से बचना चाहिए क्योंकि माना जाता है कि नकारात्मक किरणें खाद्य पदार्थों को दूषित कर सकती हैं।
- गर्भवती महिलाएं: गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और न ही किसी नुकीली चीज जैसे कैंची, चाकू या सुई का प्रयोग करना चाहिए।
- मूर्ति स्पर्श: मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श करना वर्जित माना गया है।
ये कार्य करें
- तुलसी दल का प्रयोग: ग्रहण लगने से पहले ही दूध, दही और पके हुए भोजन में तुलसी के पत्ते डाल दें।
- मंत्र जप: ग्रहण काल में मौन रहकर इष्ट देव के मंत्रों का मानसिक जप करना अत्यंत फलदायी होता है।
- स्नान और दान: ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल छिड़कें, खुद स्नान करें और जरूरतमंदों को अपनी सामर्थ्य अनुसार दान दें।
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फाल्गुन अमावस्या का महत्व
17 फरवरी को अमावस्या होने के कारण पितृ दोष से मुक्ति के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ है। चूंकि भारत में ग्रहण का सूतक नहीं है, अतः श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर पितरों के निमित्त दान-पुण्य कर सकेंगे।
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